भक्तमाल: विमलनाथ
अन्य नाम-विमलनाथ स्वामी
शिष्य - श्री अमर, 116 गणधर
आराध्य - जैन धर्म
उम्र: 6,000,000
ऊँचाई - 60 धनुष
रंग - सुनहरा
जन्म स्थान - काम्पिल्य
जन्म दिवस - माघ शुक्ल मास की तृतीया तिथि
निर्वाण स्थान : शिखरजी
वैवाहिक स्थिति - विवाहित
पिता - राजा कृतवर्मा
माता - रानी श्यामा देवी
प्रसिद्ध - जैन धर्म के 13वें तीर्थंकर
वंश: इक्ष्वाकु
प्रतीक (लंछना): सूअर
भगवान विमलनाथ जैन धर्म में 12वें तीर्थंकर
वासुपूज्य स्वामी जी के बाद 13वें तीर्थंकर हैं, उनके लिए पूजनीय हैं पवित्रता, वैराग्य और आध्यात्मिक ज्ञान। उनका जीवन आंतरिक शुद्धि (विमल = शुद्ध) और सांसारिक मोह से मुक्ति के मार्ग का प्रतीक है।
भगवान विमलनाथ की जीवन गाथा
भगवान विमलनाथ का जन्म एक राजपरिवार में राजकुमार के रूप में हुआ था। बचपन से ही उनमें करुणा, ज्ञान और वैराग्य के गुण दिखाई देते थे।
❀ राज्य पर विधिपूर्वक शासन करने के बाद उन्होंने सांसारिक जीवन का त्याग कर दिया।
❀ उन्होंने गहन तपस्या और ध्यान किया।
❀ एक पवित्र वृक्ष के नीचे केवल ज्ञान प्राप्त किया।
❀ उन्होंने अपना जीवन अहिंसा, सत्य और पवित्रता का संदेश फैलाने में व्यतीत किया।
❀ अंत में सम्मेद शिखरजी में मोक्ष प्राप्त किया।
भगवान विमलनाथ की आध्यात्मिक शिक्षाएँ
❀ विचारों, शब्दों और कर्मों की पवित्रता
❀ भौतिक सुखों से वैराग्य
❀ आत्म-अनुशासन और ध्यान का महत्व
❀ सही आस्था, ज्ञान और आचरण के माध्यम से मुक्ति का मार्ग
❀ उनका नाम "विमल" ही आत्मा की पूर्ण पवित्रता का प्रतीक है।
भगवान विमलनाथ जी के रोचक तथ्य
❀ सूअर का चिन्ह आध्यात्मिक साधना में शक्ति और निर्भीकता का प्रतीक है।
❀ उनकी शिक्षाएँ बाहरी अनुष्ठानों के बजाय आंतरिक शुद्धि पर बल देती हैं।
❀ उनकी पूजा दिगंबर और श्वेतांबर जैन दोनों समुदायों द्वारा की जाती है।