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जैन धर्म विशेष (Jain Dharm Specials)

जैन धर्म विशेष
आइए जानें! जैन धर्म से जुड़ी कुछ जानकारियाँ, प्रसिद्ध भजन, जैन मंत्र, जैन मंदिर एवं जैन आरतियाँ तथा सम्वन्धित अन्य प्रेरक तथ्य। साथ ही साथ जानिए दशलक्षण पर्व के बारे में और महावीर जयंती उत्सव कहाँ और कैसे मनाये।
जैन व्रत एवं त्यौहार क्यों कब, कहाँ और कैसे?
महावीर जन्म कल्याणक - Mahavir Janma Kalyanak
दशलक्षण पर्व - Daslakshan Parva
श्रुत पंचमी - Shrut Panchami

आरती:
पंच परमेष्ठी आरती
आरती: ॐ जय महावीर प्रभु
आरती: श्री महावीर भगवान | जय सन्मति देवा
आरती: ॐ जय महावीर प्रभु
आरती: भगवान श्री शीतलनाथ जी

मंत्र:
णमोकार महामंत्र
भक्तामर स्तोत्र
सर्व भयानक रोग नाशक मंत्र

भजन:
मेरी भावना: जिसने राग-द्वेष कामादिक - जैन पाठ
तुम से लागी लगन.. पारस प्यारा
नाकोड़ा के भैरव तुमको आना होगा

भक्तमाल:
ज्ञानमती
आचार्य विद्यासागर

मंदिर:
प्रसिद्ध जैन मंदिर
श्री शौरीपुर बटेश्वर दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र
लाल मंदिर, दिल्ली
प्राचीन दिगम्बर जैन मंदिर, बड़ागाँव
जैन बड़ा मंदिर, हस्तिनापुर
जैन मंदिर, फिरोजाबाद
वसुंधरा जैन मंदिर

ब्लॉग:
जैन ध्वज क्या है?

Jain Dharm Specials in English

Lets know some related information, famous hymns and other inspiring facts related to Jainism..

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जगन्नाथ मंदिर प्रसाद को 'महाप्रसाद' क्यों कहा जाता है?

जगन्नाथ मंदिर में सदियों से पाया जाने वाला महाप्रसाद लगभग 600-700 रसोइयों द्वारा बनाया जाता है, जो लगभग 50 हजार भक्तों के बीच वितरित किया जाता है।

भगवान जगन्नाथ के नील माधव के रूप में होने के पीछे क्या कहानी है?

नील माधव (या नीला माधव) के रूप में भगवान जगन्नाथ की कहानी प्राचीन हिंदू परंपराओं, विशेष रूप से ओडिशा की परंपराओं में निहित एक गहरी आध्यात्मिक और प्रतीकात्मक कहानी है।

भगवान जगन्नाथ का नीलाद्रि बीजे अनुष्ठान क्या है?

नीलाद्रि बीजे, वार्षिक रथ यात्रा उत्सव के अंत और भगवान जगन्नाथ की गर्भगृह में वापसी को चिह्नित करता है या फिर आप भगवान जगन्नाथ और उनकी प्यारी पत्नी माँ महालक्ष्मी के बीच एक प्यारी सी कहानी बता सकते हैं।

रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ का मुकुट टाहिया

रथयात्रा के समय पहण्डी बिजे के दौरान भगवन टाहिया धारण करते हैं। टाहिया एकमात्र आभूषण है जिसे रथयात्रा अनुष्ठान के दौरान भगवान पहनते हैं।

हवन में आम की लकड़ी ही क्यों?

सनातन धर्म में हवन के बिना पूजा का कोई विधान नहीं है। हवन को 10 से 15 मिनट में भी किया जा सकता है। हवन कहीं भी साफ-शुद्ध जगह किया जा सकता है,हवन को सीमित साधनों से भी किया जा सकता है।

मृत्यु के बाद तेरहवी क्यों की जाती है?

हिन्दू धर्म में मृत्यु के 13 दिनों तक शोक मनाया जाता है और फिर तेरहवें दिन ब्राह्मण भोज का आयोजन किया जाता है ताकि मृतक की आत्मा को शांति मिले और ईश्वर के धाम में स्थान मिले। तेरह दिनों की इस अवधि को तेरहवी के नाम से जाना जाता है। गरुड़ पुराण के अनुसार यदि मृतक की तेरहवीं न हो तो उसकी आत्मा पिशाच योनि में भटकती रहती है।

स्नान यात्रा

स्नान यात्रा जो कि देवस्नान पूर्णिमा या स्नान पूर्णिमा नाम से भी जाना जाता है।

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