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Daslakshan Parva 2018


Updated: Sep 14, 2018 06:29 AM About | Dates | Hindi | Sugandh Dashain


Upcoming Event: 14 September 2018 - 23 September 2018
Paryushana is the main festival of Jainism. The festival is celebrated on 8 days in Shwetambar Jain and 10 days in Digambar Jain. Which is also known as the दशलक्षण पर्व (Daslakshan Parva).

Paryushana is the main festival of Jainism. The festival is celebrated on 8 days in Shwetambar Jain and 10 days in Digambar Jain. Which is also known as the दशलक्षण पर्व (Daslakshan Parva). The ten characteristics of Daslakshan are as follows:

1) Uttam Chama, 2) Uttam Mardav, 3) Uttam Aarjav, 4) Uttam Shauch, 5) Uttam Satya, 6) Uttam Sanyam, 7) Uttam Tap,8) Uttam Tyaag, 9) Uttam Akinchanya, 10) Uttam Brahamacharya.
The basic purpose of the Paryushana festival is to purify of our soul, focus on the necessary disciplines, refine the environment, and follow the teach of Jain saints and scholars.


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Related Name
पर्यूषण - Paryushana, सुगंध दशमी - Sugandh Dashmi, धूप दशमी - Dhoop Dashami, सुगंध दशै - Sugandh Dashain, धूप दशै - Dhoop Dashain

हिन्दी में जानें दशलक्षण पर्व

पर्यूषण जैन धर्म का मुख्य पर्व है। जैन धर्म के श्वेतांबर इस पर्व को 8 दिन और दिगंबर संप्रदाय में 10 दिन तक मनाया जाता है। जिन्हें प्रचलित भाषा में दसलक्षण पर्व के नाम से भी संबोधित किया जाता है। जैन धर्म के दस लक्षण निम्न प्रकार हैं:
१) उत्तम क्षमा, २) उत्तम मार्दव, ३) उत्तम आर्जव, ४) उत्तम शौच, ५) उत्तम सत्य, ६) उत्तम संयम, ७) उत्तम तप,८) उत्तम त्याग, ९) उत्तम अकिंचन्य, १०) उत्तम ब्रहमचर्य
पर्यूषण पर्व का मूल उद्देश्य आत्मा को शुद्ध करके आवश्यक विधाओं पर ध्यान केंद्रित करना, पर्यावरण का शोधन करना तथा संत और विद्वानों की वाणी का अनुसरण करना है।

सुगंध दशै (Sugandh Dashain)

19 September 2018
पर्व सुगंध दशै दिन जिनवर पूजै अति हरषाई,
सुगंध देह तीर्थंकर पद की पावै शिव सुखदाई॥
दिगंबर जैन धर्म में सुगंध दशमी का बहुत महत्‍व है। दसलक्षण पर्व के अंतर्गत भाद्रपद शुक्ल पक्ष में आने वाली दशमी के दिन जैन समाज के सभी लोग सुगंध दशमी पर्व मनाते है। इस व्रत को विधिपूर्वक करने से हमारे अशुभ कर्मों का क्षय होकर हमें पुण्‍यबंध, मोक्ष तथा उत्‍तम शरीर प्राप्ति होगी। सुगंध दशमी के दिन पांच पापों यानी हिंसा, झूठ, चोरी, कुशील और परिग्रह का त्‍याग करें।

सुगंध दशमी के दिन जैन समाज के भक्त जैन मंदिरों में जाकर चौबीस तीर्थंकरों को धूप अर्पित करते हैं और भगवान से प्रार्थना करते हैं, हे भगवान! मैं आपके नाम का ध्यान धरकर मोक्ष प्राप्ति की कामना करता हूं। इससे वायुमंडल अत्यधिक सुगंधमय व स्‍वच्‍छ हो जाता है।

दशमी के दिन खास तौर पर सभी मंदिरों में विशेष साज सज्जा के साथ आकर्षक मंडल विधान सजाएं जाते हैं तथा धर्म के बारे में समझाते हुए झांकियों का निर्माण किया जाता है। रात्रि को मदिरों में सुगंध दशमी कथा का वाचन भी किया जाता है। सुगंध दशै को सुगंध दशमी, धूप दशमी तथा धूप दशै के नाम से भी जाना जाता है।
सुगंध दशमी का अर्घ्य
सुगंध दशमी को पर्व भादवा शुक्ल में,
सब इन्द्रादिक देव आय मधि लोक में।
जिन अकृत्रिम धाम धूप खेवै तहां,
हम भी पूजत आह्वान करिकै यहां॥

Information

Futures Dates
2 September 2019 - 12 September 201923 August 2020 - 1 September 2020
Frequency
Yearly / Annual
Duration
10
Begins (Tithi)
Bhadrapada Shukla Panchami
Ends (Tithi)
Bhadrapada Shukla Chaturdashi
Celebrations
Fast, Bhajan, Keertan, Daan, Jhakiyan, Sobha Yatra, Pravachan
Imp Places
Jain Mandir.
Past Dates
Dhoop Dashain: 19 September 2018, 26 August 2017 - 5 September 2017

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