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✨दशलक्षण पर्व - Daslakshan Parva

Daslakshan Parva Date: Friday, 30 August 2024
दशलक्षण पर्व

पर्यूषण जैन धर्म का मुख्य पर्व है। जैन धर्म के श्वेतांबर इस पर्व को 8 दिन और दिगंबर संप्रदाय में 10 दिन तक मनाया जाता है। जिन्हें प्रचलित भाषा में दसलक्षण पर्व के नाम से भी संबोधित किया जाता है। जैन धर्म के दस लक्षण निम्न प्रकार हैं:
१) उत्तम क्षमा, २) उत्तम मार्दव, ३) उत्तम आर्जव, ४) उत्तम शौच, ५) उत्तम सत्य, ६) उत्तम संयम, ७) उत्तम तप,८) उत्तम त्याग, ९) उत्तम अकिंचन्य, १०) उत्तम ब्रहमचर्य

पर्यूषण पर्व का मूल उद्देश्य आत्मा को शुद्ध करके आवश्यक विधाओं पर ध्यान केंद्रित करना, पर्यावरण का शोधन करना तथा संत और विद्वानों की वाणी का अनुसरण करना है।

* इस पेज पर दशलक्षण पर्व की तिथियाँ दिगंबर संप्रदाय के अनुसार दी गई हैं, श्वेतांबर संप्रदाय की तिथियाँ पेज पर दी गई तिथियों से भिन्न होंगीं।

पर्यूषण (श्वेतांबर) : 11 सितंबर 2023- 18 सितम्बर 2023

संबंधित अन्य नामपर्यूषण, सुगंध दशमी, धूप दशमी, सुगंध दशै, धूप दशै
सुरुआत तिथिभाद्रपद शुक्ला पञ्चमी
उत्सव विधिव्रत, भजन, कीर्तन, दान, झाकियां, सोभा यात्रा, प्रवचन

Daslakshan Parva in English

Paryushan is the main festival of Jainism. Shvetambara of Jainism is celebrated for 8 days and 10 days in Digambara community.

सुगंध दशै - Sugandh Dashain

पर्व सुगंध दशै दिन जिनवर पूजै अति हरषाई,
सुगंध देह तीर्थंकर पद की पावै शिव सुखदाई ॥

दिगंबर जैन धर्म में सुगंध दशमी का बहुत महत्‍व है। दसलक्षण पर्व के अंतर्गत भाद्रपद शुक्ल पक्ष में आने वाली दशमी के दिन जैन समाज के सभी लोग सुगंध दशमी पर्व मनाते है। इस व्रत को विधिपूर्वक करने से हमारे अशुभ कर्मों का क्षय होकर हमें पुण्‍यबंध, मोक्ष तथा उत्‍तम शरीर प्राप्ति होगी। सुगंध दशमी के दिन पांच पापों यानी हिंसा, झूठ, चोरी, कुशील और परिग्रह का त्‍याग करें।

सुगंध दशमी के दिन जैन समाज के भक्त जैन मंदिरों में जाकर चौबीस तीर्थंकरों को धूप अर्पित करते हैं और भगवान से प्रार्थना करते हैं, हे भगवान! मैं आपके नाम का ध्यान धरकर मोक्ष प्राप्ति की कामना करता हूं। इससे वायुमंडल अत्यधिक सुगंधमय व स्‍वच्‍छ हो जाता है।

दशमी के दिन खास तौर पर सभी मंदिरों में विशेष साज सज्जा के साथ आकर्षक मंडल विधान सजाएं जाते हैं तथा धर्म के बारे में समझाते हुए झांकियों का निर्माण किया जाता है। रात्रि को मदिरों में सुगंध दशमी कथा का वाचन भी किया जाता है। सुगंध दशै को सुगंध दशमी, धूप दशमी तथा धूप दशै के नाम से भी जाना जाता है।

सुगंध दशमी का अर्घ्य
सुगंध दशमी को पर्व भादवा शुक्ल में,
सब इन्द्रादिक देव आय मधि लोक में ।
जिन अकृत्रिम धाम धूप खेवै तहां,
हम भी पूजत आह्वान करिकै यहां ॥

क्षमा वाणी दिवस - Kshama Vani Diwas

पर्युषण के अंतिम दिन अनंत चतुर्दशी का त्यौहार मनाया जाता है। और उसके अगले दिन सभी व्यक्ति एक दूसरे से क्षमा माँगते हैं, यह दिन क्षमा दिवस के नाम से जाना जाता हैं। इसमें सभी जाने अनजाने होने वाली गलतियों के लिए सभी मनुष्य, जीव-जन्तुओ, पशु-पक्षियों से क्षमा मांगता हैं। क्षमा मांगना एवम करना यह दोनों ही धर्मो में श्रेष्ठ माने जाते हैं।

क्षमावाणी सन्देश:
करबद्ध हैं नमन
मित्र सखा सभी जीवंत
हो अगर भूल कोई मुझसे
तो क्षमाप्रार्थी हूँ मैं सबसे
यह अनमोल भेंट देकर मुझे
कृतज्ञ करे इस जीवन मैं
उत्तम क्षमा

दसलक्षण पर्व का महत्व और उसका आचरण

यह दस दिन जैन धर्म के अनुयायियों के लिए बेहद ही पावन होते हैं, इसलिए लोग इन दिनों में व्रत रखते हैं। वह एक टाइम भोजन करते हैं या जो लोग व्रत नहीं भी रखते हैं, वह भी सूर्यास्त से पहले भोजन अवश्य करते हैं।

दसलक्षण पर्व का पहला दिन है उत्तम क्षमा
यह जैन ग्रन्थ के तत्त्वार्थ सूत्र में वर्णित 10 धर्मों में पहला है। जिसमें हम उन लोगों से क्षमा मांगते हैं जिनके साथ हमने जाने-अनजाने में बुरा व्यवहार किया हो या फिर जिनका हमने दिल दुखाया हो। हम उन्हें क्षमा करते हैं जिन्होंने हमारे साथ बुरा व्यवहार किया हो। जब आप दूसरों से क्षमा मांगते हैं या फिर दूसरों को क्षमा करते हैं तो इससे व्यक्ति की आत्मा को सही राह खोजने में मदद मिलती है, जिससे सम्यक दर्शन प्राप्त होता है। सम्यक दर्शन वास्तव में परम आनंद मोक्ष को पाने का प्रथम मार्ग है।

दसलक्षण पर्व का दूसरा दिन है उत्तम मार्दव
दसलक्षण पर्व के दूसरे दिन को उत्तम मार्दव के रूप में मनाया जाता है। यह व्यक्ति के अभिमान को दूर करके उसे व्यवहार में मृदुता लाने के लिए प्रेरित करता है। कई बार व्यक्ति धन, दौलत व पद पाकर अहंकारी और अभिमानी बन जाता है। वह खुद को सर्वोपरि व दूसरों को छोटा समझता है। लेकिन वास्तव में यह सभी चीजें नश्वर हैं और एक दिन आप इन चीजों से दूर हो जाएंगे। ऐसे में इन नश्वर चीजों के पीछे भागने या फिर उनका अहंकार करने के स्थान पर हर किसी से विनम्र भाव से पेश आएं और सब जीवों के प्रति मैत्री भाव रखें।

दसलक्षण पर्व का तीसरा दिन है उत्तम आर्जव
दसलक्षण पर्व का तीसरा दिन उत्तम आर्जव है, जो व्यक्ति की भाव शुद्धता पर जोर देता है। यह हमें बताता है कि छल-कपट से जीवन जीने से व्यक्ति को हमेशा दुख भोगना पड़ता है, इसलिए जितना हो सके सरल स्वभाव रखें। साथ ही, मोह-माया व बूरे कर्म सब छोड़कर सरल स्वभाव के साथ परम आनंद मोक्ष की प्राप्ति की जा सकती है।

दसलक्षण पर्व का चौथा दिन है उत्तम शौच
दसलक्षण पर्व का चौथा दिन उत्तम शौच हमें यह सिखाता है कि हमें किसी भी चीज की आसक्ति नहीं करनी चाहिए। जब व्यक्ति का किसी चीज में मोह होता है तो वह इस संसार से मुक्ति नहीं पा सकता है। व्यक्ति को शुद्ध मन से जितना मिला है, उसी में खुश रहने के साथ-साथ परमात्मा का शुक्रिया करना चाहिए। जीवन में संतोष होना ही वास्तवित सुख है। अगर आप भौतिक संसाधनों और धन दौलत में खुशी प्राप्त करने की कोशिश करते हैं तो वास्तव में आप खुद को भ्रमित कर रहे हैं।

दसलक्षण पर्व का पांचवां दिन है उत्तम सत्य
दसलक्षण पर्व का पांचवां दिन उत्तम सत्य है, जो व्यक्ति को सिखाता है कि आत्मा की प्रकृति जानने के लिए सत्य आवश्यक है। जब व्यक्ति अपने मन आत्मा को सरल और शुद्ध बना लेता है, तो सत्य ही उसका जीवन बन जाता है। ध्यान रखें कि झूठ बोलना आपके बुरे कर्मों में बढोतरी करता है, जिसके कारण व्यक्ति के लिए सांसारिक माया से मुक्ति पाना काफी कठिन हो जाता है।

दसलक्षण पर्व का छठा दिन है उत्तम संयम
दसलक्षण पर्व का छठा दिन होता है उत्तम संयम, जिसे धूप दशमी के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन व्यक्ति अपने मन, वचन और शरीर पर संयम रखने के महत्व को समझते हैं। उत्तम संयम के दिन व्यक्ति अपनी-अपनी आत्मा को तरह-तरह के प्रलोभनों से मुक्त करके अपने मन पर संयम रखने का प्रयास करता है।

दसलक्षण पर्व का सातवां दिन है उत्तम तप
दसलक्षण पर्व का सातवां दिन उत्तम तप है। जैन धर्म के तीर्थंकरों जैसी तप साधना करना आज के समय में शायद व्यक्ति के लिए मुमकिन ना हो, लेकिन फिर भी व्यक्ति इसी भाव के साथ दसलक्षण पर्व के दौरान उपवास करते हैं या फिर एक समय भोजन करते हैं। हालांकि, यहां यह समझना चाहिए कि तप का मतलब सिर्फ उपवास करना नहीं, बल्कि अपनी इच्छाओं और ख्वाहिशों को वश में रखना तप है, जो व्यक्ति के अच्छे कर्मों में वृद्धि करते हैं।

दसलक्षण पर्व का आठवां दिन है उत्तम त्याग
दसलक्षण पर्व का आठवां दिन उत्तम त्याग होता है। त्याग का अर्थ है इच्छाओं और भावनाओं का त्याग करना और संतोष की भावना विकसित करना। जब व्यक्ति त्याग की भावना को खुद में विकसित कर पाता है, तो वह अपनी आत्मा को शुद्ध बनाता है। इच्छाओं का त्याग करने से व्यक्ति कई तरह के बुरे कर्मों को करने से बच जाता है और उसके कई बुरे कर्मों का नाश भी होता है। जैन धर्म में त्याग का विशेष महत्व है। जैन मुनि सिर्फ अपना घर या सांसारिक मोह-माया ही नहीं, बल्कि अपने कपड़ों तक का भी त्याग कर देते हैं और पूरा जीवन दिगंबर मुद्रा धारण करके व्यतीत करता है।

दसलक्षण पर्व का नौवां दिन है उत्तम आकिंचन्य
दसलक्षण पर्व का नौवां दिन उत्तम आकिंचन्य होता है। उत्तम आकिंचन्य हमें मोह-माया का त्याग करना सिखाता है। हमें किसी भी चीज में ममता नहीं रखनी चाहिए। सभी तरह की मोह-माया व प्रलोभनों का त्याग करके ही परम आनंद मोक्ष को प्राप्त करना मुमकिन है। जब आप मोह का त्याग कर देते हैं तो इससे आत्मा को शुद्ध बनाया जा सकता है। अक्सर लोग उन चीजों के प्रति आसक्ति रखते हैं , जिसके वह बाहरी रूप में मालिक हैं – जैसे-घर, जमीन, धन, चांदी, सोना, कपड़े और संसाधन। यह आसक्ति ही व्यक्ति की आत्मा के भीतर मोह, गुस्सा, घमंड, कपट, लालच, डर, शोक, और वासना जैसी भावनाओं को जन्म देती है। लेकिन अगर व्यक्ति इन सब मोह का त्याग करता है, तो उसके लिए आत्मा को शुद्ध बनाने का रास्ता प्रशस्त होता है।

दसलक्षण पर्व का दसवां दिन है उत्तम ब्रह्मचर्य
दसलक्षण पर्व का दसवां दिन उत्तम ब्रह्मचर्य है। इस दिन को अनंत चतुर्दशी कहते हैं और इस दिन लोग परमात्मा के समक्ष अखंड दिया जलाते हैं। इस दिन लोग खुद में सदभावों व सद्गुणों का पालन करने का संकल्प लेते हैं। ऐसा माना जाता है कि ब्रह्मचर्य का पालन करने से व्यक्ति को ब्रह्मांड का ज्ञान और शक्ति प्राप्त होती है।

दसलक्षण पर्व का इस तरह होता है समापन

अनंत चतुर्दशी के दिन दसलक्षण पर्व का समापन होता है और इस दिन शाम को मंदिर में सभी भक्त जन एक साथ प्रतिक्रमण करते हुए पूरे साल में किये गए पाप और कटू वचन के लिए क्षमा याचना करते हैं। वह हर किसी से दिल से क्षमा मांगते हैं और एक-दूसरे से हाथ जोड कर व गले मिलकर मिच्छामी दूक्कडम कहते हैं, जिसका अर्थ है सबको क्षमा सबसे क्षमा। यहां तक कि उस समय जो लोग उपस्थित नहीं थे, उनसे भी वह दूसरे दिन क्षमा याचना करते हैं। इस तरह दसलक्षण पर्व की समाप्ति होती है।

संबंधित जानकारियाँ

आवृत्ति
वार्षिक
समय
10 दिन
सुरुआत तिथि
भाद्रपद शुक्ला पञ्चमी
समाप्ति तिथि
भाद्रपद शुक्ला चतुर्दशी
महीना
अगस्त / सितंबर
उत्सव विधि
व्रत, भजन, कीर्तन, दान, झाकियां, सोभा यात्रा, प्रवचन
महत्वपूर्ण जगह
जैन मंदिर
पिछले त्यौहार
11 September 2023, End: 9 September 2022, Begins: 1 September 2022, 11 September 2021 - 19 September 2021
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