करवा चौथ | अहोई अष्टमी | आज का भजन!

प्रेरक कहानी

प्रेरक कहानियाँ - Prerak Kahaniya are stories, quotes or katha full of spiritual, inspirational and moral values in its content. These Prerak Kahaniya are real time stories connecting with other live instance and inspires these live activities. Bhakti Bharat tells you 141+ prerak kahaniyan.

गाय माता! और दिव्य मिठास वाला गुड़

कुछ ही देर में गाय अधिकांश गुड़ खाकर चली गई,इसके बाद जो हुआ वो वो वाक्या हैं जिसे मैं ज़िन्दगी भर नहीं भुला सकता...

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प्रेरक कहानी: अपना मान भले टल जाए, भक्त का मान ना टलने देना।

भक्त के अश्रु से प्रभु के सम्पूर्ण मुखारविंद का मानो अभिषेक हो गया। अद्भुत दशा हुई होगी... ज़रा सोचो! रंगनाथ जी भक्त की इसी दशा का तो आनंद ले रहे थे।

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प्रेरक कहानी: बस! अपने मां बाप की सेवा करो

एक छोटा सा बोर्ड रेहड़ी की छत से लटक रहा था, उस पर मोटे मारकर से लिखा हुआ था...
घर मे कोई नही है, मेरी बूढ़ी माँ बीमार है, मुझे थोड़ी थोड़ी देर में उन्हें खाना, दवा और टायलट कराने के लिए घर जाना पड़ता है, अगर आपको जल्दी है तो अपनी मर्ज़ी से फल तौल ले...

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प्रेरक कहानी: गुरू की बात को गिरिधारी भी नही टाल सकते

उन्होंने मेरे शब्दो का मान रखते हुए मेरे शिष्य पर अपनी सारी कृपा उडेल दी। इसलिए कहते है गुरू की बात को गिरिधारी भी नही टाल सकते।

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श्री राधा नाम की कीमत

एक बार एक व्यक्ति था। वह एक संत जी के पास गया। और कहता है कि संत जी, मेरा एक बेटा है। वो न तो पूजा पाठ करता है और न ही भगवान का नाम लेता है।

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प्रेरक कहानी: तीन गुरु चोर, कुत्ता और छोटा बच्चा

एक दिन एक शिष्य ने महंत से सवाल किया, स्वामीजी आपके गुरु कौन है? मेरे हजारो गुरु हैं! लेकिन फिर भी मै अपने तीन गुरुओ के बारे मे तुम्हे जरुर बताऊंगा...

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प्रेरक कहानी: भक्ति का प्रथम मार्ग है, सरलता!

प्रभु बोले भक्त की इच्छा है पूरी तो करनी पड़ेगी। चलो लग जाओ काम से। लक्ष्मण जी ने लकड़ी उठाई, माता सीता आटा सानने लगीं। आज एकादशी है...

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प्रेरक कहानी: कुछ अच्छाइयां.. ऐसी भी.. जिनका कोई और साक्षी ना हो!

मैं पैदल घर आ रहा था। रास्ते में एक बिजली के खंभे पर एक कागज लगा हुआ था। पास जाकर देखा, लिखा था: कृपया पढ़ें...

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महाभारत के युद्ध में भोजन प्रबंधन

आर्यावर्त के समस्त राजा या तो कौरव अथवा पांडव के पक्ष में खड़े दिख रहे थे। श्रीबलराम और रुक्मी ये दो ही व्यक्ति ऐसे थे जिन्होंने इस युद्ध में भाग नहीं लिया।

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