आप कर्मयोगी पुरुष, और मैनेजर भगवान
बुद्ध का प्रवचन सुनने के लिए गांव के सभी लोग उपस्थित थे, लेकिन वह भक्त ही कहीं दिखाई नहीं दे रहा था।.
Prerak Kahani
कर्म फल भोगते हुए भी दुःखी नहीं हों - प्रेरक कहानी
कर्मफल का भोग टलता नहीं: राजकुमार का सिर कट गया और वह मर गया। राजकन्या पति के मरने का बहुत शोक करने लगी...
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हार से क्रोध का कनेक्शन - प्रेरक कहानी
बहुत समय पहले की बात है नवनीत। आदि शंकराचार्य और मंडन मिश्र के बीच सोलह दिन तक लगातार शास्त्रार्थ चला। शास्त्रार्थ की निर्णायक थीं मंडन मिश्र की धर्म पत्नी देवी भारती। ...
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महाभारत के युद्ध में भोजन प्रबंधन
आर्यावर्त के समस्त राजा या तो कौरव अथवा पांडव के पक्ष में खड़े दिख रहे थे। श्रीबलराम और रुक्मी ये दो ही व्यक्ति ऐसे थे जिन्होंने इस युद्ध में भाग नहीं लिया।
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एक इल्ली और घुन था। इल्ली बोली आओ घुन कार्तिक स्नान करे, घुन बोला तू ही कार्तिक स्नान कर ले।..
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व्यर्थ - व्यर्थ की चिंतायें - प्रेरक कहानी
एक व्यक्ति बहुत दिनों से तनावग्रस्त चल रहा था जिसके कारण वह काफी चिड़चिड़ा तथा क्रोध में रहने लगा था। वह सदैव इस बात से परेशान रहता था कि घर के सारे खर्चे उसे ही उठाने पड़ते हैं
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बुराई का अंत हर हाल में होता है - प्रेरक कहानी
एक साँप को एक बाज अपने पंजों में दबाकर आसमान में उड़ाकर ले जा रहा था। अचानक साँप बाज के पंजों से छूट गया और एक कुएँ में जा गिरा।
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कोयल- अपनी वाणी को मधुर बना लेना - प्रेरक कहानी
एक बार वसंत ऋतु में एक कोयल वृक्ष पर बैठी कूक रही थी। कुछ देर बैठो, बातें करते हैं.. कौआ- वह जरा जल्दी में है और देश को छोड़कर परदेस जा रहा है..
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जब मुँह खोलोगे ही नहीं तो फँसोगे कैसे? - प्रेरक कहानी
एक मछलीमार कांटा डाले तालाब के किनारे बैठा था। काफी समय बाद भी कोई मछली कांटे में नहीं फँसी, ना ही कोई हलचल हुई तो वह सोचने लगा...
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निस्वार्थ भाव से दान पुण्य करें - प्रेरक कहानी
ठाकुर का एक बेटा था, जो इस जगत को देख नहीं सकता था पर ठाकुर को उस परमात्मा पर विश्वास था..
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जब काम न रहे तो - प्रेरक कहानी
एक आदमी ने एक भूत पकड़ लिया और उसे बेचने शहर गया, बस पाँच सौ रुपए है। मगर भूत तो भूत ही था। अपना मन ही वह भूत है..
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मन की शांति कैसे प्राप्त करें? - प्रेरक कहानी
सेठ अमीरचंद के पास अपार धन दौलत थी। उसे हर तरह का आराम था, लेकिन उसके मन को शांति नहीं मिल पाती थी। हर पल उसे कोई न कोई चिंता परेशान किये रहती थी...
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सच्चे देशभक्त की निष्ठा - प्रेरक कहानी
गुलजारीलाल नंदा को मकान मालिक ने किराया न दे पाने पर किराए के मकान से निकाल दिया। बूढ़े के पास एक पुराना बिस्तर, कुछ एल्युमीनियम के बर्तन, एक प्लास्टिक की बाल्टी और एक मग आदि के अलावा शायद ही कोई सामान था।
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डमरू बजा, बारिश शुरू हो गई - प्रेरक कहानी
सहज विनोद भाव में बोलीं: प्रभु,आप भी अगर बारह वर्षों के बाद डमरू बजाना भूल गये तो?..
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मैं सावंरे की कुदरत से हैरान हूँ - प्रेरक कहानी
वृंदावन शहर में एक वैघ थे, जिनका मकान भी बहुत पुराना था। वैघ साहब अपनी पत्नी को कहते कि जो तुम्हें चाहिए एक चिठ्ठी में लिख दो दुकान पर आकर पहले वह चिठ्ठी खोलते।
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