श्री गणेश एवं बुढ़िया माई की कहानी
एक बुढ़िया माई थी। मिट्टी के गणेश जी की पूजा करती थी। रोज बनाए रोज गल जाए। एक सेठ का मकान बन रहा था..
Prerak Kahani
अच्छे को अच्छे एवं बुरे को बुरे लोग मिलते हैं - प्रेरक कहानी
गुरु जी गंभीरता से बोले, शिष्यों आमतौर पर हम चीजों को वैसे नहीं दखते जैसी वे हैं, बल्कि उन्हें हम ऐसे देखते हैं जैसे कि हम खुद हैं।...
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धैर्य से काम लेने मे ही समझदारी है - प्रेरक कहानी
बात उस समय की है जब महात्मा बुद्ध विश्व भर में भ्रमण करते हुए बौद्ध धर्म का प्रचार कर रहे थे और लोगों को ज्ञान दे रहे थे। समस्या और बुराई केवल कुछ समय के लिए..
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गरीब विद्वान व राजा भोज, बने भाई-भाई - प्रेरक कहानी
राजन्, जब तक आपकी मौसी जीवित थीं, आपके दर्शन नहीं हुए थे। अब आपके दर्शन हुए तो आपकी मौसी स्वर्ग सिधार गईं। इस उत्तर से भोज को और भी प्रसन्नता हुई।
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भरे गिलास से, मंदिर की परिक्रमा - प्रेरक कहानी
मैं देखती हूं लोग मंदिर परिसर मे अपने फोन से अपने व्यापार की बात करते है कुछ ने तो मंदिर को ही गपसप करने का स्थान चुन रखा है, कुछ पूजा कम पाखंड ज्यादा करते है।
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बिना चिंतन के कीर्तन का कोई लाभ नहीं - प्रेरक कहानी
एक राजा था, उसने सुना कि राजा परीक्षित् ने भागवत की कथा सुनी तो उनका कल्याण हो गया। राजा के मन में आया कि..
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एक क्रिया, और सात्विक प्रतिक्रिया - प्रेरक कहानी
किसी गाँव में दो साधू रहते थे। वे दिन भर भीख मांगते और मंदिर में पूजा करते थे। एक दिन गाँव में आंधी आ गयी और बहुत जोरों की बारिश होने लगी।...
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तोटकाचार्य कैसे बने शंकराचार्य के प्रिय शिष्य - सत्य कथा
वहाँ अवाक् बैठे सभी शिष्य तब और ज्यादा अवाक् हो गए जब उन्होंने देखा कि गुरु शंकराचार्य ने गिरी को आदेश देते हुए कहा कि आज उनकी जगह पर गिरी ब्रह्मसूत्र पर शंकराचार्य के मन्तव्य को समझाएंगे।
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इन्द्रियों के भोग से कैसे जीव का नाश हो सकता है
परमात्मा द्वारा जीव को पांच ज्ञानेन्द्रियां प्रदान की गई हैं। श्रवण, त्वक,चक्षु, जिह्वा और घ्राणेन्द्रिय।इनके क्रमशः शब्द,स्पर्श, रूप, रस और गंध विषय हैं।
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लक्ष्मी जी कहाँ निवास करतीं हैं - प्रेरक कहानी
एक बार की बात है, राजा बलि समय बिताने के लिए एकान्त स्थान पर गधे के रूप में छिपे हुए थे।..
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हमे हर जीव मैं प्रभु नजर आते हैं - प्रेरक कहानी
जब बच्चे ने ईश्वर के साथ रोटी खाई! एक 6 साल का छोटा सा बच्चा, उसे भगवान् के बारे में कुछ भी पता नही था..
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अनजाने कर्म का फल - प्रेरक कहानी
एक राजा ब्राह्मणों को भोज में महल के आँगन में भोजन करा रहा था। उसी समय एक चील अपने पंजे में एक जिंदा साँप को लेकर राजा के महल के उपर से गुजरी।...
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आप कर्मयोगी पुरुष, और मैनेजर भगवान
बुद्ध का प्रवचन सुनने के लिए गांव के सभी लोग उपस्थित थे, लेकिन वह भक्त ही कहीं दिखाई नहीं दे रहा था।.
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कर्म फल भोगते हुए भी दुःखी नहीं हों - प्रेरक कहानी
कर्मफल का भोग टलता नहीं: राजकुमार का सिर कट गया और वह मर गया। राजकन्या पति के मरने का बहुत शोक करने लगी...
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हार से क्रोध का कनेक्शन - प्रेरक कहानी
बहुत समय पहले की बात है नवनीत। आदि शंकराचार्य और मंडन मिश्र के बीच सोलह दिन तक लगातार शास्त्रार्थ चला। शास्त्रार्थ की निर्णायक थीं मंडन मिश्र की धर्म पत्नी देवी भारती। ...
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