अपने शिल्पकार को पहचाने - प्रेरक कहानी
शिल्पकार ने थैले से छेनी-हथौड़ी निकालकर उसे तराशने के लिए जैसे ही पहली चोट की.. पत्थर जोर से चिल्ला पड़ा: उफ मुझे मत मारो।
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सुकर्म का फल सूद सहित मिलता है - प्रेरक कहानी
इंसान यदि सुकर्म करे तो उसका फल सूद सहित मिलता है, और दुष्कर्म करे तो सूद सहित भोगना पड़ता है।
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चौधरी पहलवान का पूरा जीवन जरूरतमंदों की सहायता के लिए समर्पित हुआ था। जब उनका अंतिम समय नजदीक आया तो उन्होंने अपने बेटे को पास बुलाया।
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बच्चे की राजा को 4 शर्तें - प्रेरक कहानी
एक बार एक राजा नगर भ्रमण को गया तो रास्ते में क्या देखता है कि, एक छोटा बच्चा माटी के खिलौनो को कान में कुछ कहता फिर तोड कर माटी में मिला रहा है..
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जब चंद देव ने लगाया गुरु रामदास को गले - सत्य कथा
जब गुरु नानक देव जी के वृद्ध पुत्र एवं 'उदासी' संप्रदाय के संस्थापक बाबा श्री चंद जी सिख संप्रदाय के चतुर्थ गुरु रामदास जी से मिलने आए ...
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मृत्यु से भय कैसा? - प्रेरक कहानी
राजा परीक्षित को श्रीमद्भागवत पुराण सुनातें हुए जब शुकदेव जी महाराज को छह दिन बीत गए और तक्षक (सर्प) के काटने से मृत्यु होने का एक दिन शेष रह गया..
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श्रमरहित पराश्रित जीवन विकास के द्वार बंद करता है!
महर्षि वेदव्यास ने एक कीड़े को तेजी से भागते हुए देखा। उन्होंने उससे पूछा: हे क्षुद्र जंतु, तुम इतनी तेजी से कहाँ जा रहे हो?
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सच्चे देशभक्त की निष्ठा - प्रेरक कहानी
गुलजारीलाल नंदा को मकान मालिक ने किराया न दे पाने पर किराए के मकान से निकाल दिया। बूढ़े के पास एक पुराना बिस्तर, कुछ एल्युमीनियम के बर्तन, एक प्लास्टिक की बाल्टी और एक मग आदि के अलावा शायद ही कोई सामान था।
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अनजाने कर्म का फल - प्रेरक कहानी
एक राजा ब्राह्मणों को भोज में महल के आँगन में भोजन करा रहा था। उसी समय एक चील अपने पंजे में एक जिंदा साँप को लेकर राजा के महल के उपर से गुजरी।...
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एक दिन का पुण्य ही क्यूँ? - प्रेरक कहानी
तुम्हारे बाप के नौकर बैठे हैं क्या हम यहां, पहले पैसे, अब पानी, थोड़ी देर में रोटी मांगेगा, चल भाग यहाँ से।
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समर्पित भक्त का वास वैकुन्ठ में - प्रेरक कहानी
एक ब्राह्मण था तथा महान भक्त था, वह मंदिर की पूजा में बहुत शानदार सेवा पेश करना चाहता था, लेकिन उसके पास धन नहीं था।...
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दो पैसे के काम के लिए तीस साल की बलि - प्रेरक कहानी
स्वामी विवेकानंद एक बार कहीं जा रहे थे। रास्ते में नदी पड़ी तो वे वहीं रुक गए क्योंकि नदी पार कराने वाली नाव कहीं गई हुई थी।...
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बुढ़िया माई को मुक्ति दी - तुलसी माता की कहानी
कार्तिक महीने में एक बुढ़िया माई तुलसीजी को सींचती और कहती कि: हे तुलसी माता! सत की दाता मैं तेरा बिडला सीचती हूँ..
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आप कर्मयोगी पुरुष, और मैनेजर भगवान
बुद्ध का प्रवचन सुनने के लिए गांव के सभी लोग उपस्थित थे, लेकिन वह भक्त ही कहीं दिखाई नहीं दे रहा था।.
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...हम माँग नही पाते प्रभु से - प्रेरक कहानी
एक बार किसी देश का राजा अपनी प्रजा का हाल-चाल पूछने के लिए गांवो में घूम रहा था। घूमते-घूमते उसके कुर्ते का बटन टूट गया...
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