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Top Mandirs

  • Raja-Rani Temple


    Raja-Rani Temple

    राजा-रानी मंदिर (Raja-Rani Temple) constructed with red and golden-yellow sand stones which is locally known as Raja Rani therefore named as Rajarani temple.

  • Shri Varshney Mandir

    The highest peak temple of Aligarh, श्री वार्ष्णेय मंदिर (Shri Varshney Mandir) was initiated on chaitra shukla Shri Ram Navmi 12 April 2000, with the worship of Shri Ganesh and Kalash Pooja.

  • Teerthdham Mangalayatan

    तीर्थधाम मंगलायतन (Teerthdham Mangalayatan) dedicated to Second Tirthankara Bhagwan Bahubali(one with strong arms) of Jainism. Mang+al+Ayatan - `mang` means `happiness`, and the one who brings happiness in our lives (Al-Layati) is called `mangal`.

  • Sri Sri Krishna Balaram Mandir

    A holy place श्री श्री कृष्ण बलराम मंदिर (Sri Sri Krishna Balaram Mandir) having 24 hour kirtana and center of cultural and vedic education, also known as ISKCON Vrindavan.

  • Shri Ananta Basudev Temple

    श्री अनंत वासुदेव मंदिर (Shri Ananta Basudev Temple) is architecturally replica of the Jagannath Dham 200 feet far from Lingaraj Temple built on the east side of Bindu Sagar.

  • Shri Rameswara Temple

    श्री रामेश्वर मंदिर (Shri Rameswara Temple) is the group of six temples with the name of all Shri Dashrath sons and both Shri Ram sons.

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी, तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥

आरती: ॐ जय जगदीश हरे

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

॥श्रीमहालक्ष्मीस्तोत्रम् विष्णुपुराणान्तर्गतम्॥

सिंहासनगतः शक्रस्सम्प्राप्य त्रिदिवं पुनः। देवराज्ये स्थितो देवीं तुष्टावाब्जकरां ततः॥

॥दारिद्र्य दहन शिवस्तोत्रं॥

विश्वेश्वराय नरकार्णव तारणाय कणामृताय शशिशेखरधारणाय। कर्पूरकान्तिधवलाय जटाधराय दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय॥

भजन: तुने मुझे बुलाया शेरा वालिये!

साँची ज्योतो वाली माता, तेरी जय जय कार। तुने मुझे बुलाया शेरा वालिये, मैं आया मैं आया शेरा वालिये।

भजन: चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है।

चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है। ऊँचे पर्वत पर रानी माँ ने दरबार लगाया है।

भजन: मैं तो आरती उतारूँ रे संतोषी माता की।

मैं तो आरती उतारूँ रे संतोषी माता की। जय जय संतोषी माता जय जय माँ॥

भजन: हरी नाम सुमिर सुखधाम, जगत में...

हरी नाम सुमिर सुखधाम, हरी नाम सुमिर सुखधाम, जगत में जीवन दो दिन का...

भारत के चार धाम
भारत के चार धाम

आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा परिभाषित चार वैष्णव तीर्थ हैं। बद्रीनाथ धाम, रामेश्वरम धाम, जगन्नाथ धाम, द्वारका धाम...

सप्त मोक्ष पुरी!
सप्त मोक्ष पुरी!

अयोध्या-मथुरामायाकाशीकांचीत्वन्तिका, पुरी द्वारावतीचैव सप्तैते मोक्षदायिकाः

दिल्ली के प्रसिद्ध हनुमान बालाजी मंदिर!
दिल्ली के प्रसिद्ध हनुमान बालाजी मंदिर!

List of leading Lord Hanuman temples of New Delhi, Noida, Ghaziabad. Hanuman Ji is great devotee of Shri Rama.

प्रार्थना: वह शक्ति हमें दो दया निधे!

उत्तर प्रदेश के साथ अधिकतर उत्तर भारत के सरकारी स्कूल में 1961 से ही गाई जाने वाली सबसे प्रसिद्ध प्रार्थना। वह शक्ति हमें दो दया निधे...

भगवान श्री चित्रगुप्त जी स्तुति - जय चित्रगुप्त यमेश तव!

जय चित्रगुप्त यमेश तव, शरणागतम् शरणागतम्। जय पूज्यपद पद्मेश तव, शरणागतम् शरणागतम्॥

श्री बजरंग बाण पाठ।

निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥

संकट मोचन हनुमानाष्टक

लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर।
वज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर ॥

चालीसा: श्री बगलामुखी माता

सिर नवाइ बगलामुखी, लिखूं चालीसा आज॥ कृपा करहु मोपर सदा, पूरन हो मम काज॥

श्री सूर्य देव

जय सविता जय जयति दिवाकर!, सहस्त्रांशु! सप्ताश्व तिमिरहर॥ भानु! पतंग! मरीची! भास्कर!...

श्री चित्रगुप्त चालीसा

सुमिर चित्रगुप्त ईश को, सतत नवाऊ शीश। ब्रह्मा विष्णु महेश सह, रिनिहा भए जगदीश॥

चालीसा: श्री हनुमान जी

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि॥

श्री सत्यनारायण कथा - द्वितीय अध्याय
श्री सत्यनारायण कथा - द्वितीय अध्याय

सूत जी बोले: हे ऋषियों ! जिसने पहले समय में इस व्रत को किया था उसका इतिहास कहता हूँ, ध्यान से सुनो!...

श्री सत्यनारायण कथा - तृतीय अध्याय
श्री सत्यनारायण कथा - तृतीय अध्याय

सूतजी बोले: हे श्रेष्ठ मुनियों, अब आगे की कथा कहता हूँ। पहले समय में उल्कामुख नाम का एक बुद्धिमान राजा था।...

श्री सत्यनारायण कथा - चतुर्थ अध्याय
श्री सत्यनारायण कथा - चतुर्थ अध्याय

सूतजी बोले: वैश्य ने मंगलाचार कर अपनी यात्रा आरंभ की और अपने नगर की ओर चल दिए। उनके थोड़ी दूर जाने पर एक दण्डी वेशधारी...

किसका पुण्य बड़ा?

मिथलावती नाम की एक नगरी थी। उसमें गुणधिप नाम का राजा राज करता था। उसकी सेवा करने के लिए दूर देश से एक राजकुमार आया।

कर्ण की युद्ध में धर्म-नीति निष्ठा!

वह बाण बनकर कर्ण के तरकस में जा घुसा, ताकि जब उसे धनुष पर रखकर अर्जुन तक पहुँचाया जाए, तो अर्जुन को काटकर प्राण हर ले।

माँ बगलामुखी अष्टोत्तर-शतनाम-स्तोत्रम्

ओम् ब्रह्मास्त्र-रुपिणी देवी, माता श्रीबगलामुखी। चिच्छिक्तिर्ज्ञान-रुपा च, ब्रह्मानन्द-प्रदायिनी॥

श्री कृष्णाष्टकम्

वसुदॆव सुतं दॆवं कंस चाणूर मर्दनम्। दॆवकी परमानन्दं कृष्णं वन्दॆ जगद्गुरुम्...

श्री कृष्णाष्टकम् - आदि शंकराचार्य

भजे व्रजैक मण्डनम्, समस्त पाप खण्डनम्, स्वभक्त चित्त रञ्जनम्, सदैव नन्द नन्दनम्...

श्री दुर्गा माँ के 108 नाम

अग्नि में जल कर भी जीवित होने वाली, आशावादी, भगवान् शिव पर प्रीति रखने वाली, ब्रह्मांड की निवास, संसार बंधनों से मुक्त करने वाली...

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