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पद्मनाभस्वामी मंदिर @Thiruvananthapuram, Kerala

महादेव मंदिर तांबडी सुरला @Sanguem, Goa
कालभैरव मंदिर उज्जैन @Ujjain, Madhya Pradesh
भारतवर्ष में एक राजा राज्य करता था वह बड़ा प्रतापी और दानी था। वह नित्य गरीबों और ब्राह्मणों...
अब आप मुझे श्रावण शुक्ल एकादशी का क्या नाम है? व्रत करने की विधि तथा इसका माहात्म्य कृपा करके कहिए। मधुसूदन कहने लगे कि इस एकादशी का नाम पुत्रदा एकादशी है।
भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली यह पवित्र व्रत सोलह सोमवार व्रत कथा भक्ति भारत के द्वारा आप तक पहुंचाई जा रही है। एक समय की बात है देवों के देव भगवान महादेवजी, पार्वती के साथ भ्रमण करते हुए मृत्युलोक में अमरावती नगरी में आए।
भगवान श्री विष्णु के 1000 नाम! विष्णुसहस्रनाम का पाठ करने वाले व्यक्ति को यश, सुख, ऐश्वर्य, संपन्नता...
नमामि यमुनामहं सकल सिद्धि हेतुं मुदा, मुरारि पद पंकज स्फ़ुरदमन्द रेणुत्कटाम । तटस्थ नव कानन प्रकटमोद पुष्पाम्बुना..
ॐ महाज्वालाय विद्महे अग्नि मध्याय धीमहि।

शिव चालीसा - जय गिरिजा पति दीन दयाला । सदा करत सन्तन प्रतिपाला.. शिव चालीसा लिरिक्स के सरल शब्दों से भगवान शिव को आसानी से प्रसन्न होते हैं

जय जय नीब करोली बाबा । कृपा करहु आवै सद्भावा ॥ कैसे मैं तव स्तुति बखानू ।..

हीं श्रीं, क्लीं, मेधा, प्रभा, जीवन ज्योति प्रचण्ड। शांति, क्रांति, जागृति, प्रगति, रचना शक्ति अखण्ड॥
श्री नारायण गुरु भारत में एक दार्शनिक, आध्यात्मिक नेता और समाज सुधारक थे।
भक्तमाल | गोस्वामी तुलसीदास | असली नाम - रामबोला दुबे | गुरु - नरहरिदास | आराध्य - श्री रामचंद्र, भगवान शिव
संत रामदास जी महाराज का जन्म भिंड जिले के मदरोली गांव में एक धार्मिक चचोर सनाढ्य ब्राह्मण परिवार में हुआ था। बचपन से ही उनमें सादगी, भक्ति और ईश्वर के प्रति अगाध प्रेम की गहरी भावना थी।
महात्मा लटूरी सिंह हिन्दू, योगी, सन्यासी थे। वो जीवन भर स्कूल बनवाते रहे। उन्होंने सरकार को नही कोसा बल्कि वो उठे और उन्होंने अपनी संपत्ति से भिक्षा से दान से स्कूल बनवाये।

दिल्ली और आस-पास के शहर नोएडा, गाजियाबाद और फरीदाबाद के प्रसिद्ध श्री गणेश मंदिर।

उड़ीसा राज्य की राजधानी भुवनेश्वर, अपनी प्राचीन शिल्प कला को सजोए रखने के लिए प्रसिद्ध है। आइए जानें अन्य मंदिरों के वारे में...

* चेन्नई यात्रा में जरूर शामिल करें ये सबसे प्रसिद्ध मंदिर
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एक ब्राह्मण था, वह घरों पर जाकर पूजा पाठ कर अपना जीवन यापन किया करता था। एक बार उस ब्राह्मण को नगर के राजा के महल से पूजा के लिये बुलावा आया।
एक बार नारद जी ने भगवान से प्रश्न किया कि प्रभु आपके भक्त गरीब क्यों होते हैं?
क्या आप प्रभु हनुमान की शक्ति में विश्वास करते हैं? Bhaktibharat के साथ अपने विचार साझा करें।...
पितृ पक्ष की पूजा के दौरान मौली (पूजा के दौरान कलाई पर बाँधा जाने वाला पवित्र लाल-पीला धागा) नहीं बाँधी जाती क्योंकि इस अवधि में किए जाने वाले अनुष्ठान केवल पितरों (पूर्वजों) के लिए होते हैं, न कि देवताओं के लिए।
सनातन परंपरा के मुख्य केंद्र मंदिर, इस अभूतपूर्व घटना का साक्षी बनाने से अपने को कैसे रोक पता? आइए जानते हैं किस-किस मंदिर का भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में योगदान रहा।
मासिक शिवरात्रि और महाशिवरात्रि दोनों में ही भगवान शिव की पूजा का विधान है, लेकिन फिर भी दोनों को एक दूसरे से अलग माना जाता है।