मंदिर (English: Mandir, Gujarati: મંદિર, Bengali: মন্দির, Telugu: మందిరం, Malayalam: ക്ഷേത്രം, Kannada: ದೇವಸ್ಥಾನ) and gurudwara is the Hindu, Buddhist and Jain name for a place of worship or prayer. A space and structure designed to bring human beings and Gods together, infused with symbolism to express the ideas and beliefs. Bhakti Bharat Celebrating 600+ Temples.
मोती डूंगरी गणेश जी मंदिर @Jaipur Rajasthan
मोती डूंगरी गणेश जी मंदिर, मोती डोंगरी पहाड़ी की चोटी, मोती डूंगरी महल, जयपुर, राजस्थान में स्थित है। यह मंदिर भगवान गणेश को समर्पित है और मूर्ति सिन्दूर से ढकी हुई है।
| ◉ भगवान गणेश की प्रतिमा पांच सौ साल से भी अधिक पुरानी है। |
| ◉ भगवान गणेश की मूर्ति बैठी हुई मुद्रा में है और सूंड बाईं ओर है जो बहुत ही महत्वपूर्ण और शुभ मानी जाती है। |
| ◉ पौष बड़ा त्योहार में भगवान गणेश को मूंग दाल के लड्डू का भोग लगाया जाता है। |
भोरमदेव मंदिर @Kawardha Chhattisgarh
भोरमदेव मंदिर भारत के छत्तीसगढ़ राज्य में कवर्धा (कबीरधाम) के पास स्थित एक प्रसिद्ध प्राचीन हिंदू मंदिर है।
| ◉ भोरमदेव मंदिर को छत्तीसगढ़ का खजुराहो कहा जाता है। |
| ◉ इस मंदिर परिसर में मडवा महल, चेरकी महल और इस्तालिक मंदिर जैसे अन्य महत्वपूर्ण मंदिर भी शामिल हैं। |
| ◉ यह मंदिर शैव धर्म का एक प्रमुख केंद्र है और भक्तों, इतिहासकारों, कला प्रेमियों और पर्यटकों को आकर्षित करता है। |
नमक्कल अंजनेयार मंदिर @Thillaipuram Tamil Nadu
नमक्कल अंजनेयार मंदिर भारत के तमिलनाडु में नामक्कल जिले के एक शहर नामक्कल में स्थित है। यह मंदिर हिंदू भगवान हनुमान को समर्पित है।
| ◉ अंजनेयार मंदिर 1500 वर्ष से अधिक पुराना है। |
| ◉ भगवान अंजनेयार की मूर्ति 18 फीट (5.5 मीटर) लंबी है, जो इसे भारत में हनुमान की सबसे ऊंची मूर्तियों में से एक बनाती है। |
| ◉ मंदिर की शीर्ष पर कोई आवरण नहीं है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि भगवान अंजनेय की ऊंचाई हर दिन बढ़ रही है। |
| ◉ भगवान को अक्सर वड़े की माला से सजाया जाता है। |
जगन्नाथ धाम @Puri Odisha
भारत के पूर्व दिशा में स्थित जगन्नाथ धाम को चार वैष्णव धामों में से एक माना जाता है। भारत के चार धाम आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा परिभाषित चार वैष्णव तीर्थ हैं।
| ◉ गुरु शंकराचार्य द्वारा परिभाषित चार धामों में से एक। |
| ◉ विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा। |
तपोवन नासिक @Nashik Maharashtra
नासिक शहर में तपोवन, कपिला एवं गोदावरी नदी के संगम स्थल के आस-पास का वह क्षेत्र है जहाँ भगवान राम, माता सीता और भाई लक्ष्मण ने चौदह वर्ष के वनवास का अधिकतम समय यहाँ विचरण किया था।
| ◉ चौदह वर्षों के वनवास काल खंड में भगवान राम की तपो स्थली। |
| ◉ कपिला एवं गोदावरी नदी का संगम स्थल प्रमुख केंद्र। |
द्वारका धाम @Dwarka Gujarat
द्वारका धाम सात मोक्ष पुरी में से एक माना जाता है। इन चार तीर्थों मे से एक भारत की पश्चिम दिशा मे द्वारका का यह श्री द्वारकाधीश मंदिर (ગુજરાતી: શ્રી દ્વારકાધીશ મન્દિર) है।
| ◉ आदि गुरु शंकराचार्य जी द्वारा परिभाषित चार धामों में से एक। |
| ◉ सनातन सप्त मोक्ष पुरी में से एक। |
| ◉ मंदिर का निर्माण भगवान कृष्ण के पोते द्वारा किया गया था। |
प्राचीन शिव शनि मंदिर @Noida Uttar Pradesh
नोएडा के सबसे पुराने शनि मंदिरों में से एक है यह प्राचीन शिव शनि मंदिर है। कुछ वर्षों के पश्चात मंदिर मे शिवलिंग की भी स्थापना की गई।
| ◉ नोएडा का सबसे पुराना प्रसिद्ध श्री शनि मंदिर। |
| ◉ लगभग 7 फीट ऊँचाई श्री शनि देव की प्रतिमा। |
रतनगढ़ माता मंदिर @Pali Madhya Pradesh
रतनगढ़ माता मंदिर सुंदर विंध्याचल पर्वत में सिंध नदी के तट के पास स्थित है। यह स्थान भारत के केंद्र में श्री रतन गढ़ धाम में सर्प दंश से चमत्कारिक रूप से मुक्ति वाली माता रतन गढ़ मंदिर के रूप में भी जाना जाता है।
| ◉ 1935 किलोग्राम, भारत का सबसे वजनी मंदिर घंटा है। |
| ◉ मंदिर निर्माण छत्रपति शिवाजी द्वारा करवाया गया। |
गुह्येश्वरी शक्ति पीठ @Kathmandu Nepal
गुह्येश्वरी मंदिर में माता के दोनों घुटने गिरे होने के कारण यह श्री गुह्येश्वरी शक्तिपीठ कहलाया जाता है। यह मंदिर गुह्येश्वरी (गुप्त ईश्वरी) को समर्पित है, देवी को गुह्यकाली भी कहा जाता है।
| ◉ शक्तिपीठ में माता के दोनों घुटने स्थित हैं। |
| ◉ गुह्येश्वरी शक्तिपीठ के भैरव कपाली हैं। |
हाटू माता मंदिर @Narkanda Himachal Pradesh
हाटू माता को नारकंडा क्षेत्र की देवी एवं नारकंड जनजाति की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार प्रसिद्ध हाटू माता मंदिर लंकापति रावण की पत्नी मंदोदरी का मंदिर है।
| ◉ मंदिर मंदोदरी को समर्पित। |
| ◉ ज्येष्ठ मास में वार्षिक मेला का आयोजन। |
| ◉ आस-पास पांडवों के अज्ञातवास का स्थान है। |
त्रिलोकनाथ मंदिर, टुंडे, हिमाचल प्रदेश @Tunda Vihar Himachal Pradesh
त्रिलोकनाथ मंदिर, हिमाचल प्रदेश के लाहौल इलाके के टुंडे गाँव में स्थित एक बहुत पुराना और पवित्र मंदिर है। यह मंदिर हिंदुओं और बौद्धों, दोनों के लिए बहुत आध्यात्मिक महत्व रखता है, जिससे यह हिमालयी क्षेत्र में साझा आस्था का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया है।
| ◉ लाहौल के बौद्ध धार्मिक परिवेश में त्रिलोकनाथ का एक महत्वपूर्ण स्थान है। |
| ◉ यह हिमालय के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक इतिहास के जीवंत प्रतीक के रूप में खड़ा है। |
| ◉ मूल रूप से टुंडा विहार के नाम से जाने जाने वाले इस स्थान की स्थापना गुरु पद्मसंभव ने किया था। |