मंदिर (English: Mandir, Gujarati: મંદિર, Bengali: মন্দির, Telugu: మందిరం, Malayalam: ക്ഷേത്രം, Kannada: ದೇವಸ್ಥಾನ) and gurudwara is the Hindu, Buddhist and Jain name for a place of worship or prayer. A space and structure designed to bring human beings and Gods together, infused with symbolism to express the ideas and beliefs. Bhakti Bharat Celebrating 600+ Temples.
अंजनी माता मंदिर करौली @Bada Pachana Rajasthan
अंजनी माता मंदिर राजस्थान के करौली में पंचना नदी से घिरा हुआ है और त्रिकूट पर्वत की पहाड़ी पर स्थित है। माता का मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ एक पर्यटन स्थल भी है।
| ◉ मंदिर में माता अंजनी बाल हनुमान को गोद में लेकर बैठी हैं और हनुमान जी को दूध पिला रही हैं। |
| ◉ ऐसा माना जाता है कि देवी का नाम लेने से कान के रोग ठीक हो जाते हैं। |
श्री नीलम माता वैष्णो मंदिर @Delhi New Delhi
यह पूर्वी दिल्ली का सबसे बड़ा, वही माँ वैष्णो का पवित्र धाम श्री नीलम माता वैष्णो मंदिर है।
| ◉ पूर्वी दिल्ली का सबसे बड़ा माता मंदिर। |
| ◉ शाम को माता वैष्णो गुफा के दर्शन होते हैं। |
| ◉ मंगलवार को माता की चौकी और भंडारे का आयोजन होता है। |
चौंसठ योगिनी मंदिर @Morena Madhya Pradesh
चौंसठ योगिनी मितावली मंदिर प्राचीन भारतीय वास्तुकला का वृत्ताकार योजना वाला एक बहुत ही अनोखा और शानदार मंदिर है। भारत की संसद भवन इसी योगिनी मंदिर की वास्तुकला से प्रेरित है...
| ◉ भारत की संसद भवन इसी की वास्तुकला से प्रेरित है। |
| ◉ आंतरिक भाग में कुल 5 परिक्रमा पथ हैं। |
| ◉ मंदिर का निर्माण महाराज देवपाल द्वारा 1323 ई. में। |
| ◉ यह मंदिर राष्ट्रीय संरक्षित स्मारक के अंतर्गत आता है। |
पहुआ वाली माता @Gwalior Madhya Pradesh
पहुआ-पहुआ अर्थात पैदल-पैदल जाते हुए भक्त यहाँ अल्प-विश्राम हेतु रुकते थे। आज यही कैला मैया को समर्पित मंदिर जनमानस के बीच पहुआ वाली माता के मंदिर के नाम से ही प्रसिद्द है।
| ◉ कैला मैया को समर्पित मंदिर। |
| ◉ बाबा भैरवनाथ तथा भगवन शिव का धाम स्थापित। |
जायमई माता मंदिर @Sirsaganj Uttar Pradesh
माता की कला के रूप में स्थापित जायमई वाली माता का प्रसिद्ध मंदिर, दिलीप महाराज द्वारा 1000 साल पुरानी सिद्ध माता को जाग्रत करने का शुभ कार्य किया।
| ◉ मंदिर में माँ भगवती कला रूप में विराजमान हैं। |
| ◉ गाँव की रक्षक देवी के रूप में विराजमान। |
श्री गुंडिचा मंदिर @Puri Odisha
श्री गुंडिचा मंदिर (Odia: ଗୁଣ୍ଡିଚା ମନ୍ଦିର) वार्षिक होने वाले श्री जगन्नाथ रथ यात्रा का अंतिम गंतव्य है। जबकि, श्री जगन्नाथ मंदिर प्रारंभिक स्थान है, इन दोनों मंदिरों को जोड़ती हुई तीन किलोमीटर लम्बी ग्रांड रोड है।
| ◉ जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान महत्वपूर्ण गंतव्य। |
| ◉ भगवान जगन्नाथ 9 दिनों तक यहाँ रहते हैं। |
धौलीनाग मंदिर @Chhana Uttarakhand
धौलीनाग मंदिर उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र में पूजित भगवान धौलीनाग (नाग देवता) को समर्पित एक प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर बागेश्वर–मुनस्यारी मार्ग पर छाना गांव (खंतोली के निकट) में स्थित है।
| ◉ भगवान धौलीनाग (नाग देवता) को समर्पित प्रसिद्ध मंदिर। |
| ◉ घने जंगलों और हिमालय की मनोरम पर्वत श्रृंखलाओं से घिरा शांत धार्मिक स्थल। |
| ◉ पारंपरिक कुमाऊँनी पर्वतीय वास्तुकला में निर्मित मंदिर। |
| ◉ नाग पंचमी यहाँ का सबसे बड़ा और प्रमुख उत्सव है, जिसे धौलीनाग उत्सव के रूप में मनाया जाता है। |
बद्रीनाथ धाम @Badrinath Uttarakhand
बद्रीनाथ धाम मंदिर चार धामों में से एक है और भारत के प्रमुख तीर्थ स्थलों में शामिल है। यहां पर भगवान विष्णु के एक रूप बद्रीनारायण की पूजा होती है।
| ◉ आदि गुरु शंकराचार्य जी द्वारा परिभाषित चार धामों में से एक। |
| ◉ हिमालय में, अलकनंदा नदी के तट पर भगवान विष्णु का प्राचीनतम धाम। |
टेकरी सरकार मंदिर @Ganeshpura Madhya Pradesh
टेकरी सरकार मंदिर मध्य प्रदेश के गुना ज़िले में हनुमान जी के सबसे पवित्र मंदिरों में से एक है। गुना शहर से लगभग 5 किलोमीटर दूर एक पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर भगवान हनुमान (बालाजी) को समर्पित है और एक प्रमुख तीर्थ स्थल है।
| ◉ पहाड़ी पर स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर है। |
| ◉ माना जाता है कि यह 1,200 साल से भी ज़्यादा पुराना है। |
| ◉ भगवान हनुमान की दक्षिण-मुखी मूर्ति की पूजा की जाती है। |
बंगाली बाबा श्री गणेश मंदिर @Jaipur Rajasthan
श्री गणेश मंदिर जयपुर के सबसे पुराने मंदिरों में से एक माना गया है। श्री गणेश भगवान की मूर्ति पहाड़ों में ही पाई गई थी।
| ◉ भगवान गणेश का सिंदूरी विग्रह। |
| ◉ 50-60 गौ माताओं के साथ गौशाला। |
पुष्टिपति गणेश मंदिर @Borivali East Maharashtra
श्री पुष्टिपति गणेश मंदिर मुंबई, महाराष्ट्र के बोरीवली पूर्व, नेन्सी कॉलोनी, ओधव नगर में स्थित एक प्रसिद्ध गणेश मंदिर है।
| ◉ पुष्टिपति विनायक दिव्य ज्ञान, समृद्धि और आध्यात्मिक पोषण के प्रतीक माने जाते हैं। |
| ◉ यह मंदिर गणेश जी के उस रूप को समर्पित है जिन्होंने अपने टूटे हुए दांत से राक्षस दुर्मती को पराजित किया था। |
| ◉ यहां का सबसे बड़ा त्योहार पुष्टिपति विनायक जयंती है। |