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Mantra

मंत्र - Mantras are sounds, syllables, vibrations or group of words in Sanskrit language to obtain psychological and spiritual powers. Man means mind, and tra means vehicle or instrument: a tool to transport/transform the mind from one state to silence state. Mantras now exist in Hinduism, Buddhism, Jainism, and Sikhism, and sounds as per its existence.

ॐ (Om) is shortest and simplest one word mantra, also known as bija (seed) mantra. Like Om, Shanti Mantra and Gayatri Mantra are common and fundamental mantra for daily uses.

॥श्रीमहालक्ष्मीस्तोत्रम् विष्णुपुराणान्तर्गतम्॥

सिंहासनगतः शक्रस्सम्प्राप्य त्रिदिवं पुनः। देवराज्ये स्थितो देवीं तुष्टावाब्जकरां ततः॥

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॥दारिद्र्य दहन शिवस्तोत्रं॥

विश्वेश्वराय नरकार्णव तारणाय कणामृताय शशिशेखरधारणाय। कर्पूरकान्तिधवलाय जटाधराय दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय॥

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मंत्र: णमोकार महामंत्र

णमो अरिहंताणं, णमो सिद्धाणं, णमो आयरियाणं, णमो उवज्झायाणं, णमो लोए सव्व साहूणं।

Mantra | by: Sankalp Jain

मंत्र: प्रातः स्मरण - दैनिक उपासना

कराग्रे वसते लक्ष्मी:, करमध्ये सरस्वती। कर मूले तु गोविन्द:, प्रभाते करदर्शनम॥

Mantra | by: BhaktiBharat

मंत्र: श्री विष्णुसहस्रनाम पाठ

भगवान श्री विष्णु के 1000 नाम! विष्णुसहस्रनाम का पाठ करने वाले व्यक्ति को यश, सुख, ऐश्वर्य, संपन्नता, सफलता, आरोग्य एवं सौभाग्य प्राप्त होता है।

Mantra | by: BhaktiBharat

मंत्र: माँ गायत्री

इस मंत्र का हिंदी में मतलब है - हे प्रभु, कृपा करके हमारी बुद्धि को उजाला प्रदान कीजिये और हमें धर्म का सही रास्ता दिखाईये। यह मंत्र सूर्य देवता के लिये प्रार्थना रूप से भी माना जाता है।

Mantra | by: BhaktiBharat

तत्त्वमसि महावाक्य

तत्त्वमसि (तत् त्वम् असि) भारत के शास्त्रों व उपनिषदों में वर्णित महावाक्यों में से एक है, जिसका शाब्दिक अर्थ है...

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प्रज्ञानं ब्रह्म महावाक्य

प्रज्ञानं ब्रह्म जिसका शाब्दिक अर्थ है ज्ञान ही ब्रह्म है। यह भारत के पुरातन हिंदू शास्त्र 'ऋग्वेद' का 'महावाक्य' है...

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अयमात्मा ब्रह्म महावाक्य

अयमात्मा ब्रह्म भारत के पुरातन हिंदू शास्त्रों व उपनिषदों में वर्णित महावाक्य है, जिसका शाब्दिक अर्थ है यह आत्मा ब्रह्म है

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अहं ब्रह्मास्मि महावाक्य

अहं ब्रह्मास्मि महावाक्य का शाब्दिक अर्थ है मैं ब्रह्म हूँ, यहाँ 'अस्मि' शब्द से ब्रह्म और जीव की एकता का बोध होता है।

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