janmashtami 2026
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

जगन्नाथ लक्ष्मी नारायण भेश या थियाकिया भेश (Jagannath Laxmi Narayan Bhesh or Thiakia Bhesh)

कार्तिक शुक्ल एकादशी को महाप्रभु का लक्ष्मी नारायण भेश या थियाकिया भेश होता है। अबकाश अनुष्ठान के बाद कार्तिक शुक्ल एकादशी में महाप्रभु को ठियाकिया भेश पहनाया जाता है। यह भेस भोगमंडप अनुष्ठान के अंत तक जारी रहता है।
भेश धारण करने की रस्में:
इस भेश में महाप्रभु जगन्नाथ और बलभद्र को स्वर्ण भुजाएँ, पैर, कदंब माली, किरीति, हरिदा माली, बहादा माली, तबीज़ा माली, बगनाखी माली, सेबती माली, आदि से विभूषित किया जाता है।

श्री बलभद्र के पास हल मुशाला और श्री जगन्नाथ के पास शंख चक्र पकड़ते हैं। वे दोनों एक-एक त्रिशाखा पोशाक और एक-एक तिलक पहनते हैं। वे श्रीमुख पद्म भी पहनते हैं। मां सुभद्रा को किरीती, कर्णकुंडल, विभिन्न प्रकार की मालाएं, ओडियानी, चंद्र सूर्य और तदगी से विभूषित किया जाता है।

चेहरे पर श्रीमुख बाला के साथ तीन देवताओं की पूजा की जाती है। जगन्नाथ और बलभद्र के सिरों पर दो शंक्वाकार त्रिमुंडी चूला चढ़ाया जाता है जिसमें किया के फूलों के समान सोने की छड़ें जुड़ी होती हैं। ये दोनों कर्ण कुंडल धारण करते हैं।

अतीत में, रामानुज संप्रदाय मठ के महंत भेश को देखते थे और भगवान के सामने श्रीमन नारायण स्तोत्र गाते थे। हर साल कार्तिक शुक्ल एकादशी को महाप्रभु का लक्ष्मी नारायण भेश या थियाकिया भेश होता है।

Jagannath Laxmi Narayan Bhesh or Thiakia Bhesh in English

The laxmi narayan bhesh or thiakia bhesh of mahaprabhu takes place on kartika shukla ekadashi.
यह भी जानें

Blogs Lakshmi Narayan BlogsJagganath Puri Blogs

अगर आपको यह ब्लॉग पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस ब्लॉग को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

ब्लॉग ›

संकष्टी चतुर्थी और विनायक चतुर्थी में क्या अंतर है?

शास्त्रों के अनुसार अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी जो पूर्णिमा के बाद आती है उसे संकष्टी चतुर्थी कहते हैं।

ISKCON एकादशी कैलेंडर 2026

यह एकादशी तिथियाँ केवल वैष्णव सम्प्रदाय इस्कॉन के अनुयायियों के लिए मान्य है | ISKCON एकादशी कैलेंडर 2026

जन्माष्टमी विशेषांक 2026

आइए जानें! श्री कृष्ण जन्माष्टमी से जुड़ी कुछ जानकारियाँ, प्रसिद्ध भजन एवं सम्वन्धित अन्य प्रेरक तथ्य..

ISKCON

ISKCON संप्रदाय के भक्त भगवान श्री कृष्ण को अपना आराध्य मानते हैं। इनके द्वारा गाये जाने वाले भजन, मंत्र एवं गीतों का कुछ संग्रह यहाँ सूचीबद्ध किया गया है, सभी सनातनी परम्परा के भक्त इसका आनंद लें।

ऑस्ट्रेलिया में कैसे मनाई जाती है जन्माष्टमी?

ऑस्ट्रेलिया में, श्री कृष्ण जन्माष्टमी, कृष्ण भक्तो के लिए वर्ष के सबसे शुभ और उत्सव मुखर दिन है।

कनाडा में जन्माष्टमी समारोह

जन्माष्टमी कनाडा भर में हिंदू समुदाय द्वारा बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है ।

द्वारका धाम ध्वज समारोह

द्वारकाधीश मंदिर, द्वारका: जगत मंदिर में प्रतिदिन पांच ध्वजारोहण होता है। भक्त ध्वजाजी के आध्यात्मिक रूप का सम्मान करते हैं और भक्ति, सम्मान, शुद्ध प्रेम और विश्वास के प्रतीक के रूप में उन्हें नमन करते हैं। इस ध्वज को लेकर भक्तों में इतनी श्रद्धा और भक्ति है कि कभी-कभी इसे चढ़ाने के लिए भक्तों को दो साल तक इंतजार करना पड़ता है।

Janmashtami - Janmashtami
Shri Krishna Bhajan - Shri Krishna Bhajan
Bhakti Bharat APP