Updated: Nov 13, 2025 13:57 PM |
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Ashok Sasthi Date: Monday, 12 April 2027
अशोक षष्ठी एक पारंपरिक हिंदू त्योहार है जो मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम और बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में मनाया जाता है। यह त्योहार देवी षष्ठी को समर्पित है, जो बच्चों की दिव्य रक्षक और प्रजनन क्षमता एवं मातृ आशीर्वाद प्रदान करने वाली माता हैं। अशोक षष्ठी चैत्र माह (मार्च-अप्रैल) के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है।
| शुरुआत तिथि | चैत्र शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि |
| कारण | देवी षष्ठी |
| उत्सव विधि | व्रत, पूजा, व्रत कथा, भजन-कीर्तन |
Ashok Sasthi is a traditional Hindu festival, is dedicated to Devi Shashthi (Ṣaṣṭhī Devi), the divine protector of children and bestower of fertility and maternal blessings.
अशोक षष्ठी का महत्व
❀ यह दिन बच्चों के कल्याण, दीर्घायु और सुख के लिए देवी षष्ठी की पूजा का प्रतीक है।
❀ भक्ति भारत के मुताबिक माताएँ अपने पुत्रों और पुत्रियों के लिए आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु व्रत और अनुष्ठान करती हैं।
❀ \"अशोक\" शब्द का अर्थ है \"दुःख रहित\", जो बच्चों के लिए दुःख-मुक्त जीवन की कामना का प्रतीक है।
अशोक षष्ठी के अनुष्ठान और पालन
❀ विवाहित महिलाएँ, विशेषकर माताएँ, सुबह जल्दी उठती हैं, स्नान करती हैं और अशोक वृक्ष (सारका अशोक) के नीचे देवी षष्ठी की पूजा करती हैं, जो इस दिन पवित्र माना जाता है।
❀ देवी को फल, मिठाई, चावल, हल्दी और फूल चढ़ाती हैं और भक्ति के प्रतीक के रूप में अशोक वृक्ष के चारों ओर लाल धागे बाँधती हैं।
❀ भक्त इनदिनों मैं चावल परहेज करते हैं, कुट्टू आटा या साबू दाना का सेवन करते हैं।
❀ इस अनुष्ठान में अशोक के पत्तों का भी उपयोग किया जाता है, ऐसा माना जाता है कि ये दुःख दूर भगाते हैं (अशोक = \"कोई दुःख नहीं\")।
❀ कुछ क्षेत्रों में षष्ठी ब्रत कथा सुनाने के लिए कथावाचन सत्र आयोजित किए जाते हैं, जिसमें देवी की सुरक्षात्मक शक्तियों पर ज़ोर दिया जाता है।
संबंधित जानकारियाँ
भविष्य के त्यौहार
1 April 202820 April 20299 April 2030
शुरुआत तिथि
चैत्र शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि
उत्सव विधि
व्रत, पूजा, व्रत कथा, भजन-कीर्तन
महत्वपूर्ण जगह
Odisha, West Bengal, Assam, Bangladesh
पिछले त्यौहार
24 March 2026
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