बथुकम्मा तेलंगाना का नौ दिनों तक चलने वाला फूलों का एक त्योहार है, जिसे मुख्य रूप से नवरात्रि/दशहरा के दौरान महिलाएं मनाती हैं। यह तेलंगाना के सबसे खास सांस्कृतिक त्योहारों में से एक है और इसमें नारीत्व, प्रकृति, मौसमी फूलों, सामुदायिक भावना और देवी गौरी के प्रति भक्ति का जश्न मनाया जाता है। 'बथुकम्मा' शब्द का आम अर्थ है \"देवी माता, जीवित हो उठो\"। यह त्योहार माता गौरी/महा गौरी से जुड़ा है, जिन्हें देवी का जीवन देने वाला रूप माना जाता है।
बथुकम्मा त्योहार का इतिहास और महत्व
बथुकम्मा त्योहार तेलंगाना की सांस्कृतिक परंपराओं में गहराई से जुड़ी हैं। यह त्योहार महिलाओं और लड़कियों को एक साथ आने, पारंपरिक गीत गाने और मिलकर जश्न मनाने का एक अहम मौका भी देता है। बथुकम्मा पारंपरिक रूप से नौ दिनों तक मनाया जाता है; इसकी शुरुआत महालया अमावस्या के आसपास होती है और समापन 'सड्डुला बथुकम्मा' के साथ होता है, जो दशहरा से कुछ समय पहले आता है।
इस त्योहार का एक पर्यावरणीय पहलू भी है। बथुकम्मा उस समय मनाया जाता है जब मानसून के बाद मौसमी जंगली फूल खिलते हैं। तेलंगाना सांस्कृति के अनुसार, यह त्योहार धरती, पानी और लोगों के बीच के रिश्ते को दर्शाता है।
लोकप्रिय पारंपरिक कथा के अनुसार, एक राजा और रानी थे जिन्होंने एक युद्ध में अपने सौ बेटे खो दिए थे। उन्होंने देवी लक्ष्मी से उन्हें एक बेटी का आशीर्वाद देने की प्रार्थना की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर, देवी लक्ष्मी ने उनके यहाँ बेटी के रूप में जन्म लिया। उनका नाम बथुकम्मा रखा गया, जिसका अर्थ है \"जीओ, हे बच्चे\"। परंपरा के अनुसार, वे सुंदरता और फूलों से जुड़ी थीं, और घर की महिलाएं फूलों के साथ उनकी पूजा करने लगीं।
एक अन्य धार्मिक मान्यता बथुकम्मा को देवी गौरी/महा गौरी से जोड़ती है, जिन्हें देवी का जीवन देने वाला रूप और नारी शक्ति व शुभता का प्रतीक माना जाता है। ये परंपराएँ बताती हैं कि बथुकम्मा का जीवन, प्रजनन क्षमता, नारीत्व, समृद्धि और प्रकृति की सुंदरता से गहरा संबंध है।
बथुकम्मा महोत्सव के नौ दिन का नाम
1 एंगिली पुला बथुकम्मा
2 अटुकुला बथुकम्मा
3 मुद्दप्पु बथुकम्मा
4 नाने बिय्यम बथुकम्मा
5 अतला बथुकम्मा
6 अलीगिना बथुकम्मा
7 वेपकायला बथुकम्मा
8 वेन्ना मुद्दला बथुकम्मा
9 सद्दुला बथुकम्मा
बतुकम्मा उत्सव कैसे मनाया जाता है?
फूलों को एक के अंदर एक गोल परतों में सजाया जाता है, जिससे पिरामिड जैसी रंग-बिरंगी फूलों की संरचना बनती है। पारंपरिक रूप से, इसे एक तांबलम (पीतल की थाली) पर रखा जाता है। तैयार बथुकम्मा की शाम को पूजा की जाती है। महिलाएं पारंपरिक रूप से रंगीन साड़ियां और आभूषण पहनती हैं, जबकि लड़कियां लंगा-वोनी या पारंपरिक उत्सव पोशाक पहन सकती हैं। वे बथुकम्मा के चारों ओर इकट्ठा होते हैं, वृत्त बनाते हैं, लोक गीत गाते हैं और ताली बजाते हुए पुष्प व्यवस्था के चारों ओर लयबद्ध रूप से घूमते हैं।
महत्वपूर्ण फूल:
❀ तांगेडु पुव्वु - टान्नर का कैसिया
❀ गुनुगु पुव्वु - सेलोसिया
❀ बंटी पुव्वु - गेंदा
❀ चेमंती पुव्वु - गुलदाउदी
❀ नंदी-वर्धनम - आमतौर पर सफेद फूलों से जुड़ा हुआ है
❀ गुम्मडी पुव्वु - कद्दू के फूल
❀ अन्य स्थानीय रूप से उपलब्ध मौसमी फूल
दिनों के नाम त्योहार के दौरान तैयार किए जाने वाले विभिन्न नैवेद्यम (भोजन प्रसाद)।
1 एंगिली पुला बथुकम्मा - तिल के बीज और चावल की नैवेद्यम
2 अटुकुला बथुकम्मा - चपटा चावल (अटुकुला/पोहा) नैवेद्यम
3 मुद्दप्पु बथुकम्मा मुद्दप्पाप्पु, - दाल की एक नरम नैवेद्यम
4 नेने बियायम बथुकम्मा - चावल पानी में भिगोया हुआ नैवेद्यम
5 अटला बथुकम्मा अटलु - छोटे चावल आधारित पैनकेक/डोसा नैवेद्यम
6 अलीगिना बथुकम्मा - लड्डू नैवेद्यम
7 वेपाकायला बथुकम्मा वेपाकायालु - नीम के फल के आकार के पकौड़े नैवेद्यम
8 वेन्ना मुद्दला बथुकम्मा - मक्खन और चावल आधारित नैवेद्यम
9 सद्दुला बथुकम्मा - पांच किस्में चावल नैवेद्यम
❀ महिलाएं त्योहार के लिए पारंपरिक कपड़े पहनती हैं।
❀ 'सड्डुलु' नाम का खास नैवेद्य (भोग) तैयार किया जाता है।
❀ महिलाएं बथुकम्मा के चारों ओर इकट्ठा होती हैं और पारंपरिक गीत गाती हैं।
❀ बथुकम्मा को जुलूस के रूप में पास के जलाशयों तक ले जाया जाता है।
❀ फूलों की सजावट को पारंपरिक रूप से तालाबों, झीलों या अन्य जलाशयों में विसर्जित किया जाता है, जिससे त्योहार का समापन होता है।
❀ पूजा के बाद ये चीज़ें परिवार के सदस्यों और इसमें शामिल होने वाले लोगों में बांटी जाती हैं।
❀ उत्सव का समापन भव्य अंतिम दिन सद्दुला बथुकम्मा के साथ होता है। सजाए गए बथुकम्मा को जुलूस में ले जाया जाता है और पारंपरिक रूप से पास के तालाबों, झीलों या अन्य जल निकायों में विसर्जित किया जाता है।
बथुकम्मा महोत्सव का सांस्कृतिक महत्व
बथुकम्मा सिर्फ़ फूलों का त्योहार नहीं है। यह तेलंगाना की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है और एक ऐसा मंच देता है जहां अलग-अलग पीढ़ियां पारंपरिक गीतों, भोजन, पहनावे और रीति-रिवाजों में एक साथ हिस्सा लेती हैं।
बथुकम्मा भक्ति, महिलाओं की परंपराओं, मौसमी फूलों, भोजन, संगीत, खेती और पर्यावरण को खूबसूरती से एक साथ लाता है। 'एंगीली पुला बथुकम्मा' के पहले दिन से लेकर भव्य 'सड्डुला बथुकम्मा' तक, नौ दिनों का यह उत्सव प्रकृति के साथ तेलंगाना के गहरे जुड़ाव और उसकी जीवंत सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है।
| शुरुआत तिथि | महालया |
| कारण | माता पार्वती |
| उत्सव विधि | मंदिर में प्रार्थना, व्रत, घर में पूजा |
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