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काल भैरव अष्टमी २०१९


Updated: Dec 04, 2018 11:30 AM About | Dates | Read Also


आने वाले त्यौहार: 19 November 2019
काल भैरव का जन्म मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष अष्टमी को प्रदोष काल में हुआ था, तब से इसे भैरव अष्टमी के नाम से जाना जाता है।

काल भैरव का जन्म मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष अष्टमी को प्रदोष काल में हुआ था, तब से इसे भैरव अष्टमी के नाम से जाना जाता है। इसीलिए काल भैरव की पूजा मध्याह्न व्यापिनी अष्टमी पर करनी चाहिए।

काशी नगरी की सुरक्षा का भार काल भैरव को सौंपा गया है इसीलिए वे काशी के कोतवाल कहलाते हैं। शिवपुराण के अनुसार मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की अष्टमी को उनका अवतार हुआ था। शास्त्रों के अनुसार भारत की उत्पत्ति भगवान शिव के रूद्र रूप से हुई थी। बाद में शिव के दो रूप उत्पन्न हुए प्रथम को बटुक भैरव और दूसरे को काल भैरव कहते हैं। एेसी भी मान्यता है कि बटुक भैरव भगवान का बाल रूप है और इन्हें आनंद भैरव भी कहते हैं। जबकि काल भैरव की उत्पत्ति एक श्राप के चलते हुर्इ इसी लिए इसे उनको शंकर का रौद्र अवतार माना जाता है। शिव के इस रूप की आराधना से भय आैर शत्रुओं से मुक्ति, आैर संकट एवम् मुकदमे आदि से छुटकारा मिलता है। काल भैरव भगवान शिव का अत्यंत भयानक और विकराल प्रचंड स्वरूप है।

शिव के अंश भैरव को दुष्टों को दण्ड देने वाला माना जाता है इसलिए इनका एक नाम दण्डपाणी भी है। मान्यता है कि शिव के रक्त से भैरव की उत्पत्ति हुई थी इसलिए उनको कालभैरव कहा जाता है। एक बार अंधकासुर ने भगवान शिव पर हमला कर दिया था तब महादेव ने उसके संहार के लिए अपने रक्त से भैरव की उत्पत्ति की थी। शिव और शक्ति दोनों की उपासना में पहले भैरव की आराधना करने के लिए कहा जाता है। कालिका पुराण में भैरव को महादेव का गण बताया गया है और नारद पुराण में कालभैरव और मां दुर्गा दोनों की पूजा इस दिन करने के लिए बताया गया है।

संबंधित अन्य नाम
काल भैरव जयंती
Available in English - Kaal Bhairav Ashtami
Kaal Bhairav ​​appeared in the Pradosha period, the Krishna Ashtami of Margashirsha month, since then it is known as Bhairav ​​Ashtami.

संबंधित जानकारियाँ

भविष्य के त्यौहार
7 December 202027 November 202116 November 2022
आवृत्ति
Yearly / Annual
समय
1 Days
सुरुआत तिथि
Margashirsha Krishna Ashtami
समाप्ति तिथि
Margashirsha Krishna Ashtami
महीना
November / December
कारण
Avatarn Day of Kaal Bhairav.
उत्सव विधि
Bhajan Kirtan, Rudrabhishek, Abhishek in Shiv Temple.
महत्वपूर्ण जगह
Kaal Bhairav Mandir Varanasi, Bhairav Mandir
पिछले त्यौहार
29 November 2018

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