भक्तमाल: मुनिसुव्रत स्वामी जी
अन्य नाम - मुनिसुव्रत प्रभु, मुनिसुव्रत स्वामी भगवान, श्री मुनिसुव्रत स्वामी
शिष्य - साधु मल्ली स्वामी
आराध्य - जैन धर्म
आयु: 30,000 वर्ष
जन्म स्थान - राजगीर (बिहार)
निर्वाण: सम्मेद शिखर पर प्राप्त हुआ
वैवाहिक स्थिति - आजीवन ब्रह्मचारी
पिता - राजा सुमित्र
माता - रानी पद्मावती
प्रसिद्ध - जैन धर्म के 20वें तीर्थंकर
वंश: हरिवंश
प्रतीक (लंछन): कछुआ
यक्ष: वरुण
यक्षिणी: नारददत्त
जैन धर्म के 20वें तीर्थंकर मुनिसुव्रत स्वामी जी कठोर व्रतों, करुणा और आंतरिक अनुशासन के प्रतीक हैं। राजसी सुख-सुविधाओं का त्याग करके और कठोर तपस्या का अभ्यास करके उन्होंने केवल ज्ञान प्राप्त किया और आत्माओं को अहिंसा, आत्म-संयम और मुक्ति के मार्ग पर मार्गदर्शन दिया। उनका जीवन साधकों को इच्छाओं पर विजय प्राप्त करने और सही आस्था, ज्ञान और आचरण के माध्यम से मोक्ष प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है।
मुनिसुव्रत स्वामी जी मंत्र
सरल जैन मंत्र (दैनिक जप के लिए):
ॐ ह्रीं श्रीं मुनिसुव्रतनाथाय नमः॥
मंत्र का भक्ति विश्वास:
❀ आत्म-अनुशासन और मानसिक शुद्धता बढ़ाता है
❀ क्रोध और आसक्ति को कम करता है
❀ आध्यात्मिक मार्ग पर प्रगति में सहायक है
त्योहार और पूजा विवरण
❀ जन्म कल्याणक: अभिषेक, शांति धारा और भाव यात्रा के साथ मनाया जाता है
❀ दीक्षा कल्याणक और मोक्ष कल्याणक: व्रत, प्रवचन और ध्यान के साथ मनाया जाता है
❀ सम्मेद शिखरजी (पारसनाथ हिल): पवित्र स्थान जहां मुनिसुव्रत स्वामी जी ने मोक्ष प्राप्त किया था
मुनिसुव्रत स्वामी जी के प्रमुख मंदिर
श्री मुनिसुव्रत स्वामी जैन मंदिर, राजस्थान
मुनिसुव्रत भगवान जैन मंदिर, गुजरात
सम्मेद शिखरजी तीर्थ, झारखण्ड (मोक्ष भूमि)
भक्तिभारत के अनुसार मुनिसुव्रत स्वामी जी, भक्तों को आध्यात्मिक मुक्ति की ओर बढ़ते हुए एक अनुशासित और दयालु जीवन जीने के लिए प्रेरित किया जाता है।