मकर संक्रांति के पावन अवसर पर आयोजित होने वाला खिचड़ी मेला उत्तर भारत की आस्था और लोक परंपरा का अनुपम उत्सव है। इस दिन सूर्य के उत्तरायण होने पर खिचड़ी दान का विशेष महत्व माना जाता है।
गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के अनेक क्षेत्रों में श्रद्धालु भगवान व गुरुओं को खिचड़ी अर्पित कर पुण्य, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करते हैं। भजन-कीर्तन, साधु-संतों का सान्निध्य और लोक-संस्कृति की रंगत इस मेले को विशेष बनाती है।
खिचड़ी मेला क्या है?
खिचड़ी मेला केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि भक्ति, सेवा और सामाजिक एकता का जीवंत प्रतीक है। खिचड़ी मेला मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित होता है। इस दिन खिचड़ी (चावल, दाल, तिल, घी) का दान करना और प्रसाद रूप में ग्रहण करना शुभ माना जाता है।
प्रमुख खिचड़ी मेले
❀ गोरखपुर (गोरखनाथ मंदिर) – सबसे प्रसिद्ध खिचड़ी मेला
❀ प्रयागराज – माघ मेला/स्नान के साथ खिचड़ी दान
❀ वाराणसी, अयोध्या, बलिया, देवरिया आदि क्षेत्रों में भी आयोजन
खिचड़ी मेला के धार्मिक मान्यता
❀ मकर संक्रांति से सूर्य के उत्तरायण होने की शुरुआत
❀ खिचड़ी दान से पुण्य, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति
❀ गोरखनाथ मंदिर में गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी अर्पित की जाती है
खिचड़ी मेले की विशेषताएँ
❀ विशाल जनसमूह और श्रद्धालुओं की भागीदारी
❀ भजन–कीर्तन, साधु-संतों का संगम
❀ सांस्कृतिक कार्यक्रम, झूले, लोकव्यंजन
❀ दान-पुण्य और प्रसाद वितरण
खिचड़ी मेले की सांस्कृतिक महत्व
खिचड़ी मेला केवल धार्मिक नहीं, बल्कि लोक संस्कृति, आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक है।
| शुरुआत तिथि | मकर संक्रांति |
| कारण | Makar Sankranti |
| उत्सव विधि | व्रत, पूजा, व्रत कथा, भजन-कीर्तन, गौरी-शंकर मंदिर में पूजा, रुद्राभिषेक |
Updated: Jan 16, 2026 16:22 PM