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गणेशोत्सव 2026 (Ganeshotsav 2026)

गणेशोत्सव 2026
गणेश-उत्सव महाराष्ट्र, गुजरात एवं मध्य प्रदेश के कुछ जगहों का सबसे उत्साहित करने वाला प्रसिद्ध त्यौहार है। अब नये भारत मे गणेशोत्सव धीरे-धीरे उत्तर के राज्यों मे भी मनाया जाने लगा है। आइए जानें! श्री गणेशोत्सव, श्री गणेश चतुर्थी, अनंत चतुर्दशी एवं गणपति विसर्जन से जुड़ी कुछ जानकारियाँ, प्रसिद्ध भजन एवं सम्वन्धित अन्य प्रेरक तथ्य..
गणेशोत्सव क्यों कब, कहाँ और कैसे?
श्री गणेश चतुर्थी
अनंत चतुर्दशी / गणपति विसर्जन

गणेशोत्सव आरती:
जय गणेश जय गणेश
शेंदुर लाल चढ़ायो
श्री सिद्धिविनायक मंदिर, मुंबई: जय देव जय देव
तुकाराम आरती

श्री गणेश चालीसा:
गणेश चालीसा

गणेशोत्सव मेसेज:
गणेशोत्सव शुभकामना मेसेज

गणेश मंत्र:
वक्रतुण्ड महाकाय! श्री गणेश मंत्र
गणेश शुभ लाभ मंत्र
गणेश अंग पूजा मंत्र
गजाननं भूत गणादि सेवितं
गणनायकाय गणदेवताय गणाध्यक्षाय धीमहि।
श्री गणेशपञ्चरत्नम् - मुदाकरात्तमोदकं
नामावली: श्री गणेश अष्टोत्तर नामावलि
ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र
हरिद्रा गणेश कवचम्
संकटनाशन गणेश स्तोत्र - प्रणम्यं शिरसा देव गौरीपुत्रं विनायकम

गणेशोत्सव भजन:
घर में पधारो गजानन जी
गणपति आज पधारो, श्री रामजी की धुन में
मेरे लाडले गणेश प्यारे प्यारे
गाइये गणपति जगवंदन
गौरी के नंदा गजानन, गौरी के नन्दा

श्री गणेश कथा:
अनंत चतुर्दशी की पौराणिक कथा

प्रेरक कहानी:
दद्दा की डेढ़ टिकट
गणेश विनायक जी की कथा
तुलसीदास जी द्वारा श्री रामचरितमानस की रचना

श्री गणेश मंदिर:
पुणे शहर के प्रसिद्ध मंदिर
दिल्ली के प्रसिद्ध श्री गणेश मंदिर
श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर, मुंबई
श्री कसबा गणपति मंदिर, पुणे
दगडूशेठ गणपति मंदिर, पुणे
सारसबाग गणपती मंदिर, पुणे
बंगाली बाबा श्री गणेश मंदिर, जयपुर
श्री सिद्धी गणेश मंदिर, गुरुग्राम
गणेश टेकरी, नाथद्वारा

भोग प्रसाद:
पारंपरिक मोदक बनाने की विधि
बेसन के लड्‍डू बनाने की विधि
मावा के मोदक बनाने की विधि
केसर मोदक बनाने की विधि

ब्लॉग:
संकष्टी चतुर्थी और विनायक चतुर्थी में क्या अंतर है?
बटगणेश मंदिर, पुरी जगन्नाथ मंदिर में गणेश चतुर्थी

Ganeshotsav 2026 in English

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संकष्टी चतुर्थी और विनायक चतुर्थी में क्या अंतर है?

शास्त्रों के अनुसार अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी जो पूर्णिमा के बाद आती है उसे संकष्टी चतुर्थी कहते हैं।

जगन्नाथ मंदिर प्रसाद को 'महाप्रसाद' क्यों कहा जाता है?

जगन्नाथ मंदिर में सदियों से पाया जाने वाला महाप्रसाद लगभग 600-700 रसोइयों द्वारा बनाया जाता है, जो लगभग 50 हजार भक्तों के बीच वितरित किया जाता है।

भगवान जगन्नाथ के नील माधव के रूप में होने के पीछे क्या कहानी है?

नील माधव (या नीला माधव) के रूप में भगवान जगन्नाथ की कहानी प्राचीन हिंदू परंपराओं, विशेष रूप से ओडिशा की परंपराओं में निहित एक गहरी आध्यात्मिक और प्रतीकात्मक कहानी है।

भगवान जगन्नाथ का नीलाद्रि बीजे अनुष्ठान क्या है?

नीलाद्रि बीजे, वार्षिक रथ यात्रा उत्सव के अंत और भगवान जगन्नाथ की गर्भगृह में वापसी को चिह्नित करता है या फिर आप भगवान जगन्नाथ और उनकी प्यारी पत्नी माँ महालक्ष्मी के बीच एक प्यारी सी कहानी बता सकते हैं।

रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ का मुकुट टाहिया

रथयात्रा के समय पहण्डी बिजे के दौरान भगवन टाहिया धारण करते हैं। टाहिया एकमात्र आभूषण है जिसे रथयात्रा अनुष्ठान के दौरान भगवान पहनते हैं।

हवन में आम की लकड़ी ही क्यों?

सनातन धर्म में हवन के बिना पूजा का कोई विधान नहीं है। हवन को 10 से 15 मिनट में भी किया जा सकता है। हवन कहीं भी साफ-शुद्ध जगह किया जा सकता है,हवन को सीमित साधनों से भी किया जा सकता है।

मृत्यु के बाद तेरहवी क्यों की जाती है?

हिन्दू धर्म में मृत्यु के 13 दिनों तक शोक मनाया जाता है और फिर तेरहवें दिन ब्राह्मण भोज का आयोजन किया जाता है ताकि मृतक की आत्मा को शांति मिले और ईश्वर के धाम में स्थान मिले। तेरह दिनों की इस अवधि को तेरहवी के नाम से जाना जाता है। गरुड़ पुराण के अनुसार यदि मृतक की तेरहवीं न हो तो उसकी आत्मा पिशाच योनि में भटकती रहती है।

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