🚩बुढ़वा मंगल - Budhwa Mangal

Budhwa Mangal Date: 6 September 2022
बुढ़वा मंगल उत्सव हनुमान जी के वृद्ध रूप को समर्पित है। यह उत्सव भाद्रपद माह के अंतिम मंगलवार को आयोजित किया जाता है, जिसे प्रचलित भाषा में बूढ़े मंगल के नाम से भी जाना जाता है।

बुढ़वा मंगल उत्सव हनुमान जी के वृद्ध / बूढ़े रूप को समर्पित है। यह उत्सव भाद्रपद / भादौं माह के अंतिम मंगलवार को आयोजित किया जाता है, जिसे प्रचलित भाषा में बूढ़े मंगल के नाम से भी जाना जाता है। नगला खुशहाली में 300 साल पुराने हनुमान बरी परिसर में यह त्यौहार बड़ी ही धूम-धाम से मनाया जाता है।

बुढ़वा मंगल दक्षिण भारत की अपेक्षा उत्तर भारत मे ज्यादा प्रमुखता से मनाया जाता है। परंतु, उत्तर भारत में ही कहीं-कहीं यह त्यौहार ज्येष्ठ माह के प्रथम मंगलवार को मनाया जाता है, जिनमे कानपुर एवं वाराणसी प्रमुख हैं।

संबंधित अन्य नाम
बूढ़े मंगल, बड़ा मंगल

Budhwa Mangal in English

Budhwa Mangal Utsav is dedicated to the old age form of Hanuman ji. The festival is held on the last Tuesday of the month of Bhadrapada, which is also known as Budhe Mangal in popular language.

बुढ़वा मंगल का इतिहास

प्रथम मत:
महाभारत काल में हजारों हाथियों के बल को धारण किए भीम को अपने शक्तिशाली होने पर बड़ा अभिमान और घमंड हो गया था। भीम के घमंड को तोड़ने के लिए रूद्र अवतार भगवान हनुमान ने एक बूढ़े बंदर का भेष धारण कर उनका घमंड चूर-चूर कियाआगे यही दिन आगे चलकर बुढ़वा मंगल कहलाने लगा।

द्वितीय मत:
एक अन्य मत के अनुसार रामायण काल में भाद्रपद महीने के आखिरी मंगलवार को माता सीता की खोज में लंका पहुंचे हनुमान जी की पूंछ में रावण ने आग लगा दी थी। हनुमान जी ने अपने विराट स्वरूप को धारण कर लंका को जलाकर रावण का घमंड चूर किया।

संबंधित जानकारियाँ

भविष्य के त्यौहार
26 September 202317 September 20242 September 2025
आवृत्ति
वार्षिक
समय
1 दिन
सुरुआत तिथि
भाद्रपद शुक्ला का अंतिम मंगल
समाप्ति तिथि
भाद्रपद शुक्ला का अंतिम मंगल
महीना
अगस्त / सितंबर
उत्सव विधि
व्रत, पूजा, व्रत कथा, भजन-कीर्तन, हनुमान जी का चोला।
महत्वपूर्ण जगह
उत्तर भारत, हनुमान मंदिर।
पिछले त्यौहार
14 September 2021, 1 September 2020, Few Areas: 12 May 2020, 10 September 2019
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मंदिर

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