Updated: Jun 29, 2026 16:44 PM |
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Chaturmasya Vrat Date: Saturday, 21 November 2026
चातुर्मास्य व्रत 4 पवित्र महीनों की अवधि के लिए मनाया जाता है और यह आषाढ़ महीने (जून-जुलाई) में देव शयन एकादशी के अगले दिन से शुरू होता है और कार्तिक महीने (अक्टूबर-नवंबर) में उत्थान एकादशी पर समाप्त होता है। चातुर्मास व्रत ज्ञानी, योगी और भक्त सभी अपनी-अपनी इच्छाओं की प्राप्ति के लिए करते हैं। मौन व्रत रखना और भगवान विष्णु की पूजा में समय व्यतीत करना फलदायी होता है।
चातुर्मास्य व्रत के पीछे की पौराणिक कथा
गरुड़ पुराण के अनुसार धार्मिक मान्यता है कि चातुर्मास्य व्रत के दौरान भगवान विष्णु क्षीर सागर (दूध का सागर) में शेष नाग (अनंत शेष) पर सो जाते हैं। इसलिए उस दिन को सायन एकादशी कहा जाता है। वह चार पवित्र महीनों के बाद कार्तिक माह में आने वाली उत्थान एकादशी पर अपनी गहरी नींद से जागते हैं।
चातुर्मास्य व्रत के विधान
चातुर्मास व्रत बहुत कठिन नहीं है लेकिन कट्टर भक्त इस व्रत का पालन बहुत सख्ती से करते हैं। भक्त सूर्योदय से पहले उठता है, पवित्र स्नान करता है और भगवान विष्णु की पूजा करता है। चातुर्मास व्रत में दूध, गुड़, दही, तेल, बैंगन, पत्तेदार सब्जियां, नमकीन, मसालेदार भोजन, मीठे व्यंजन, मांस और शराब जैसे किसी भी खाद्य पदार्थ का सेवन नहीं किया जाता है।
कुछ भक्त इस व्रत को महीने के हिसाब से रखते हैं:
❀श्रावण मास - पत्तेदार सब्जियों से परहेज करें।
❀भाद्रपद मास - दही का परहेज किया जाता है।
❀आश्विन मास - दूध से परहेज किया जाता है।
❀कार्तिक मास - प्याज, लहसुन, उड़द दाल का परहेज रखा जाता है।
| शुरुआत तिथि | देव शयन एकादशी के अगले दिन |
| कारण | भगवान विष्णु |
| उत्सव विधि | मंदिर में प्रार्थना, व्रत, घर में पूजा |
Chaturmasya Vrat is observed for a period of 4 holy months and it starts from the next day of Dev Shayan Ekadashi in the month of Ashadha (June–July) and ends on Utthan Ekadashi in the month of Kartik (October–November). Chaturmasya Vrat is observed by all the gyani, yogis and devotees for the attainment of their respective desires. Keeping a silent fast (Maun Vrat) and spending time in worship of Bhagwan Vishnu is fruitful.
चातुर्मास्य व्रत में क्या करें?
❀ सूर्यो उदय से पहले स्नानदि करें। विष्णु सहस्रनाम और स्तोत्र आदि का जाप करके भगवान विष्णु की मूर्ति को पवित्र स्नान (अभिषेक) करवाएं।
❀ ऐसा माना जाता है कि चातुर्मास भगवान विष्णु की रात्रि है, इसलिए, विष्णु भक्त उनकी कहानियाँ सुनते हैं, उन्हें कहानियों या भजनों के माध्यम से दूसरों को भी सुनाते हैं।
❀ इन चार महीनों में पड़ने वाली आठ एकादशियों का सख्ती से पालन करना चाहिए।
❀ व्यक्ति को स्वयं को वैष्णव सेवा में संलग्न करना चाहिए (उन्हें प्रसाद के लिए आमंत्रित करें, उनके साथ जप करें और उनके साथ अन्य आध्यात्मिक गतिविधियाँ करें) कई भक्त महाकाव्य महाभारत, रामायण, भगवद गीता और भगवद पुराण पढ़ते हैं। कुछ भक्त ऐसे भी हैं जो प्रतिदिन मंदिर में धार्मिक गतिविधियों में भाग लेते हैं। भक्त गरीबों की मदद करने और विष्णु मंदिरों के रखरखाव में समय बिताते हैं।
❀ भगवान को तुलसी के पत्ते अर्पित करने चाहिए। तुलसी माता की पूजा और परिक्रमा करनी चाहिए।
❀ चातुर्मास व्रत (उत्थान एकादसी या कार्तिक शुक्ल एकादशी) के अंतिम दिन, भक्त एक ब्राह्मण को दक्षिणा (भोजन, कपड़े और अन्य दैनिक सामान शामिल) प्रदान करता है और उसका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
❀ चार महीने तक ब्रह्मचर्य का पालन करें।
❀ इस दौरान जमीन पर सोना बेहद शुभ माना जाता है।
चातुर्मास्य व्रत में क्या नहीं करना चाहिए?
यह देखा जाता है कि विवाह, जनेऊ समारोह, गृह प्रवेश, मंदिर की स्थापना या अन्य शुभ गतिविधियों जैसे किसी भी शुभ समारोह का आयोजन नहीं किया जाता है। समारोह चातुर्मास के अंत के बाद कार्तिक माह के 11 वें दिन से शुरू किए जा सकते हैं।
संबंधित जानकारियाँ
भविष्य के त्यौहार
15 July 202710 November 2027
शुरुआत तिथि
देव शयन एकादशी के अगले दिन
समाप्ति तिथि
उत्थान एकादशी
महीना
जून-जुलाई से अक्टूबर-नवंबर
उत्सव विधि
मंदिर में प्रार्थना, व्रत, घर में पूजा
पिछले त्यौहार
26 July 2026, 1 November 2025, 6 July 2025
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