🦁नृसिंह जयंती - Narasimha Jayanti

Narasimha Jayanti Date: 25 May 2021
नृसिंह चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु अपने भक्त प्रहलाद के रक्षण हेतु अर्ध सिंह व अर्ध मनुष्य रूप में प्रकट हुए, भगवान के इस रूप को नृसिंह कहा गया।

नृसिंह चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु अपने भक्त प्रहलाद के रक्षण हेतु अर्ध सिंह व अर्ध मनुष्य रूप में प्रकट हुए, भगवान के इस रूप को नृसिंह कहा गया। वैशाख शुक्ल चतुर्दशी त्यौहार अर्थात नरसिंह जयंती व्रत के नियम, दिशानिर्देश एवं प्रक्रिया श्रीहरी के एकादशी व्रत के समान ही होते हैं।

नरसिंह जयंती से एक दिन पहले भक्त केवल एक ही प्रहर भोजन ग्रहण करते हैं। नरसिंह जयंती के उपवास के दौरान सभी प्रकार के अनाज निषिद्ध हैं। इसलिए, यह सलाह दी जाती है कि रात को पूजा करें एवं अगले दिन सुबह विसर्जन पूजा तथा दान-दक्षिणा करने के उपरांत ही उपवास का समापन करें।

भगवान नृसिंह की विशेष पूजा संध्या के समय की जानी चाहिए। अर्थात दिन खत्म होने और रात शुरू होने से पहले, पुराणों के अनुसार इसी काल में भगवान नरसिंह प्रकट हुए थे।

भगवान नरसिंह की पूजा में खासतौर से चंदन चढ़ाया जाता है और अभिषेक किया जाता है। नृसिंह भगवान विष्णु के रौद्र रूप का अवतार है। इसलिए इनका गुस्सा शांत करने के लिए चंदन चढ़ाया जाता है। जो कि शीतलता देता है। दूध, पंचामृत और पानी से किया गया अभिषेक भी इस रौद्र रूप को शांत करने के लिए किया जाता है।

संबंधित अन्य नाम
नृसिंह चतुर्दशी

Narasimha Jayanti in English

On Narasimha Chaturdashi Lord Vishnu appeared as Lord Narasimha in the form of a half lion and half man, to save His Bhakt Prahlad.

भगवान नृसिंह अवतरण की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, हिरण्यकश्यप को ब्रह्माजी से वरदान प्राप्त था कि वह न तो किसी मनुष्य द्वारा मारा जा सके न ही किसी पशु द्वारा। न दिन में मारा जा सके, न रात में, न जमींन पर मारा जा सके, न आसमान में। इस वरदान के नशे में आकर उसके अंदर अहंकार आ गया। .... आइए जानें भगवान नृसिंह अवतार की पूरी कथा!

संबंधित जानकारियाँ

भविष्य के त्यौहार
14 May 20224 May 202321 May 202411 May 2025
आवृत्ति
वार्षिक
समय
1 दिन
सुरुआत तिथि
वैशाख शुक्ला चतुर्दशी
समाप्ति तिथि
वैशाख शुक्ला चतुर्दशी
महीना
अप्रैल / मई
कारण
भगवान श्री नरसिंह की अवतार अथवा जन्मदिन।
उत्सव विधि
व्रत, भजन / कीर्तन, दान-पुण्य
महत्वपूर्ण जगह
श्री विष्णु मंदिर, श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर, इस्कॉन।
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