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दुर्गा चालीसा (Durga Chalisa)


दुर्गा चालीसा
◉ नवरात्रि, नवदुर्गा, दुर्गा पूजा, नवरात्रे, गुप्त नवरात्रि, माता की चौकी, देवी जागरण, जगराता, शुक्रवार तथा दुर्गा अष्टमी के शुभ अवसर पर गाये जाने वाला श्री दुर्गा चालीसा।
नमो नमो दुर्गे सुख करनी ।
नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी ॥
निरंकार है ज्योति तुम्हारी ।
तिहूँ लोक फैली उजियारी ॥
शशि ललाट मुख महाविशाला ।
नेत्र लाल भृकुटि विकराला ॥

रूप मातु को अधिक सुहावे ।
दरश करत जन अति सुख पावे ॥

तुम संसार शक्ति लै कीना ।
पालन हेतु अन्न धन दीना ॥

अन्नपूर्णा हुई जग पाला ।
तुम ही आदि सुन्दरी बाला ॥

प्रलयकाल सब नाशन हारी ।
तुम गौरी शिवशंकर प्यारी ॥

शिव योगी तुम्हरे गुण गावें ।
ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें ॥

रूप सरस्वती को तुम धारा ।
दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा ॥

धरयो रूप नरसिंह को अम्बा ।
परगट भई फाड़कर खम्बा ॥10॥

रक्षा करि प्रह्लाद बचायो ।
हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो ॥

लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं ।
श्री नारायण अंग समाहीं ॥

क्षीरसिन्धु में करत विलासा ।
दयासिन्धु दीजै मन आसा ॥

हिंगलाज में तुम्हीं भवानी ।
महिमा अमित न जात बखानी ॥

मातंगी अरु धूमावति माता ।
भुवनेश्वरी बगला सुख दाता ॥

श्री भैरव तारा जग तारिणी ।
छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी ॥

केहरि वाहन सोह भवानी ।
लांगुर वीर चलत अगवानी ॥

कर में खप्पर खड्ग विराजै ।
जाको देख काल डर भाजै ॥

सोहै अस्त्र और त्रिशूला ।
जाते उठत शत्रु हिय शूला ॥

नगरकोट में तुम्हीं विराजत ।
तिहुँलोक में डंका बाजत ॥20॥

शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे ।
रक्तबीज शंखन संहारे ॥

महिषासुर नृप अति अभिमानी ।
जेहि अघ भार मही अकुलानी ॥

रूप कराल कालिका धारा ।
सेन सहित तुम तिहि संहारा ॥

परी गाढ़ सन्तन पर जब जब ।
भई सहाय मातु तुम तब तब ॥

अमरपुरी अरु बासव लोका ।
तब महिमा सब रहें अशोका ॥

ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी ।
तुम्हें सदा पूजें नरनारी ॥

प्रेम भक्ति से जो यश गावें ।
दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें ॥

ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई ।
जन्ममरण ताकौ छुटि जाई ॥

जोगी सुर मुनि कहत पुकारी ।
योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी ॥

शंकर आचारज तप कीनो ।
काम अरु क्रोध जीति सब लीनो ॥30

निशिदिन ध्यान धरो शंकर को ।
काहु काल नहिं सुमिरो तुमको ॥

शक्ति रूप का मरम न पायो ।
शक्ति गई तब मन पछितायो ॥

शरणागत हुई कीर्ति बखानी ।
जय जय जय जगदम्ब भवानी ॥

भई प्रसन्न आदि जगदम्बा ।
दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा ॥

मोको मातु कष्ट अति घेरो ।
तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो ॥

आशा तृष्णा निपट सतावें ।
मोह मदादिक सब बिनशावें ॥

शत्रु नाश कीजै महारानी ।
सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी ॥

करो कृपा हे मातु दयाला ।
ऋद्धिसिद्धि दै करहु निहाला ॥

जब लगि जिऊँ दया फल पाऊँ ।
तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊँ ॥

श्री दुर्गा चालीसा जो कोई गावै ।
सब सुख भोग परमपद पावै ॥40

देवीदास शरण निज जानी ।
कहु कृपा जगदम्ब भवानी ॥

॥दोहा॥
शरणागत रक्षा करे,
भक्त रहे नि:शंक ।
मैं आया तेरी शरण में,
मातु लिजिये अंक ॥

॥ इति श्री दुर्गा चालीसा संपूर्ण ॥

श्री दुर्गा चालीसा के साथ-साथ माता की आरती आरती: जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी अथवा आरती: अम्बे तू है जगदम्बे काली अवश्य करें। तथा महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् एवं माता के भजन का गायन भी किया जा सकता है।
नवरात्रि 2026 की तारीखें
Navratri 2026 Dates
दिन तिथि देवी पूजा / उत्सव रँग
11 अक्टूबर प्रतिपदा घटस्थापना, माता शैलपुत्री पूजा, अग्रसेन जयंती नारंगी
12 अक्टूबर द्वितीया माँ ब्रह्मचारिणी पूजा सफ़ेद
13 अक्टूबर तृतीया माँ चंद्रघंटा पूजा, सिन्दूर तृतीया लाल
14 अक्टूबर चतुर्थी माँ कुष्मांडा पूजा गहरा नीला
15 अक्टूबर पंचमी माँ स्कंद माता पूजा, ललिता पञ्चमी पीला
16 अक्टूबर षष्ठी माँ कात्यायनी पूजा, सरस्वती आवाहन | दुर्गा पूजा (बिल्व निमन्त्रण, कल्पारम्भ, अकाल बोधन) हरा
17 अक्टूबर सप्तमी माँ कालरात्रि पूजा, सरस्वती पूजा | दुर्गा पूजा (नवपत्रिका पूजा, कलाबोऊ पूजा) स्लेटी
18 अक्टूबर सप्तमी दुर्गा पूजा बैंगनी
19 अक्टूबर अष्टमी माँ महागौरी पूजा, दुर्गा अष्टमी | दुर्गा पूजा (दुर्गा अष्टमी, कुमारी पूजा, सन्धि पूजा, महा नवमी) मोर हरा
20 अक्टूबर नवमी माँ सिद्धिदात्री पूजा, नवमी हवन, विजयदशमी, नवरात्रि पारण | दुर्गा पूजा (बंगाल महा नवमी, दुर्गा बलिदान, नवमी हवन, दुर्गा विसर्जन) -
21 अक्टूबर दशमी दुर्गा पूजा (बंगाल दुर्गा विसर्जन, बंगाल विजयादशमी, सिन्दूर उत्सव) -

Durga Chalisa in English

Shri Durga Chalisa used on the auspicious occasion of Navdurga, Durga Puja, Navratri, Navratri...
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