Shri Yogmaya Mandir


Updated: Apr 01, 2017 16:17 PM About | Timing | History | Photo Gallery | Comments | Map


श्री योगमाया मंदिर (Shri Yogmaya Mandir) - Mehraul Badarpur Road >> Anuvrat Marg / Khasra No 1806, Mehrauli New Delhi - 110030

Siddhapeeth, Shaktipeeth, Gyanpeeth and Jyotipeeth श्री योगमाया मंदिर (Shri Yogmaya Mandir) is taken care by 16th generation of same family of vatsh gotra. Temple is dedicated to Shri Yogmaya sister of Lord Krishna, Near by Qutub Minar. Phool Walon Ki Sair (फूल वालों की सैर) or Sair-e-Gul Faroshan (सैर-ए-गुल फ़रोशां).

Key Highlights

  • Combination of Siddhapeeth, Shaktipeeth, Gyanpeeth, Jyotipeeth.
  • First Temple of Maa Yogmaya.

Information

Timing
4:30 AM - 8:30 PM
Arti
5:30 AM, 8:00 PM
Popular Name
Yogmaya Mandir
Mantra
ॐ श्री योगमाये महालक्ष्मी नारायणी नमस्तुते।
Event / Festival
Navratri, Shivaratri, Janmashtami, Phool Walon Ki Sair | Read Also: दिवाली - Diwali
Dham
L-R: Shri GaneshMaa YogmayaLord Shiv FamilyShivling with GanShri Laxmi NarayanShri Radha KrishnaShri Ram FamilyShri Hanuman JiShri Kalki JiBaba Bairav NathLord Hanuman
Basic Services
Drinking Water, Nearby Parking, Shoe Store, Washrooms
Founded
Mahabharata Period
Organized By
Shri Yogmaya Mandir Welfare Management Society
Address
Mehraul Badarpur Road >> Anuvrat Marg / Khasra No 1806, Mehrauli New Delhi - 110030
Facebook
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Photography
Yes (It's not ethical to capture photograph inside the temple when someone engaged in worship! Please also follow temple`s Rules and Tips.)
Coordinates
28.525261°N, 77.182657°E

Timeline

At Beginning

Brahma Ji had done tapsya at Yogni Pura place. Temple area is previously called as Yogni Pura.

Mahabharata Period

When Lord Krishna established the Pindi, then this beej mantra was pronounced for the triune prameshwari.
ॐ श्री योगमाये महालक्ष्मी नारायणी नमस्तुते।

10th Century

The remnants of the time that come out in the Khandars, there are clear indications that these Khandars will have been the palace of Prithviraj Chauhan ever. The pilgrims bathing in Anangpal pond used to do Yogamaya ji. When there was no water in that pond, difficulties were encountered for the devotees, so the well was built with the temple.

1812

during the Quit India Movement, Britishers was stopped this festival Phoolwalon Ki Sair.

1942

during the Quit India Movement, Britishers was stopped this festival Phoolwalon Ki Sair.

1962

First Prime Minister of India revived and inaugurated this festival Phoolwalon Ki Sair in 1962 to promote Hindus-Muslims harmony.

Photo Gallery

Photo in Full View
Shri Yogmaya Mandir

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History

» ब्रह्मा जी ने यौगनी पुरा स्थान पर तपस्या की थी।
» सिद्ध पीठ वही माना गया है, जहाँ भगवान ने स्वयं उस पीठ को अपने कर-कमलों से स्थापित किया हो। शेष अन्य सिद्ध पीठ की परिभाषा में नहीं आते हैं।
» ज्योतिष पीठ का प्रादुर्भाव पांडव काल में हुआ। योगानी पूरा स्थान पुराणों के अनुसार बोदद्ध ज्ञान प्राप्त करने का स्थान है। अर्थात वह स्थान जहाँ ज्ञान उपासना, तपस्या हेतु उपयुक्त हो और वाह्य किसी शक्ति का दुसप्रभाव उस क्षेत्र में न पड़े और उपासना-साधना पूर्ण हो, यह ऐसा ही गुप्त स्थान माना गया है।
» यह शक्ति पीठ कभी किन्हीं कारणों से तंत्र विद्या का केंद्र था। इस पीठ को योगपीठ भी कहा गया है। क्यों की आदि कल में इस स्थान को पुराणों उपनिषदों में "निगम बोध" क्षेत्र कहा गया है अर्थात जहाँ ज्ञान का बोध तप-योग साधना का क्षेत्र है।
» भगवान श्री कृष्ण ने जब इस स्थान पर पिण्डी की स्थापना की तो इसी बीज मंत्र का उस त्रिगुणमयी प्रमेश्वरी के लिए उच्चारण किया।
» उस समय के अवशेष जो खंडरों मे निकलते हैं, इससे स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि ये खंडारों मे कभी प्रथ्वीराज चौहान का महल रहा होगा। अनंगपाल तालाब में श्रद्धालु स्नान करके योगमाया जी के करते थे। जब उस तालाब में पानी नही होता था, तो श्रद्धालुओं को कठिनाइयाँ होने लगी तो मंदिर के साथ कुएँ को बनवाया गया।

How To Reach Shri Yogmaya Mandir

http://www.bhaktibharat.com/mandir/yogmaya-mandir

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आरती: श्री हनुमान जी

मनोजवं मारुत तुल्यवेगं, जितेन्द्रियं,बुद्धिमतां वरिष्ठम् ॥
वातात्मजं वानरयुथ मुख्यं, श्रीरामदुतं शरणम प्रपद्धे ॥

आरती: माँ लक्ष्मीजी

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥

आरती: माँ महाकाली

जय काली माता, मा जय महा काली माँ।
रतबीजा वध कारिणी माता।
सुरनर मुनि ध्याता, माँ जय महा काली माँ॥...

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