भक्तमाल: ऋषि कश्यप
अन्य नाम - सप्तऋषि कश्यप, प्रजापति
आराध्य - विष्णु
जन्म स्थान - हिमालय क्षेत्र
जन्मदिन - भाद्रपद के शुक्ल पक्ष का पंचम
वैवाहिक स्थिति - विवाहित
पिता - मरीचि
माता - काला
प्रसिद्धि - सप्तऋषि
ऋषि कश्यप हिंदू परंपरा में सबसे पूजनीय ऋषियों में से एक हैं और प्राचीन ग्रंथों में उन्हें प्रजापति (सृष्टिकर्ता) माना जाता है। संस्कृत में कश्यप का अर्थ "कछुआ" होता है।
वे एक महान वैदिक ऋषि और सप्तऋषियों (सात महान ऋषियों) में से एक थे। वे मरीचि के पुत्र थे, जो स्वयं ब्रह्मा के मन से उत्पन्न पुत्र थे। उन्हें दक्ष की तेरह पुत्रियों के माध्यम से "समग्र मानव जाति" (देवताओं, असुरों और सभी जीवित प्राणियों) के पिता के रूप में जाना जाता है।
ऋषि कश्यप का वर्णन निम्नलिखित ग्रंथों में मिलता है:
❀ ऋग्वेद
❀ महाभारत
❀ रामायण
❀ विभिन्न पुराण
ऋषि कश्यप का महत्व और प्रतीकवाद
❀ सृष्टि, संतुलन और जीवन की विविधता का प्रतीक
❀ यह दर्शाता है कि अच्छाई और बुराई एक ही स्रोत से उत्पन्न होती हैं
❀ देवताओं, राक्षसों, मनुष्यों और पशुओं के सार्वभौमिक पूर्वज के रूप में देखे जाते हैं
ऋषि कश्यप के बारे में रोचक तथ्य
❀ माना जाता है कि कश्मीर क्षेत्र का नाम कश्यप के नाम पर रखा गया है (कश्यप + मीरा जिसका अर्थ है झील)।
❀ भारत भर में प्राचीन आश्रमों और आध्यात्मिक शिक्षाओं से जुड़े हुए हैं।
❀ देवताओं और राक्षसों से जुड़ी कई पौराणिक कथाओं में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।