श्री रामचरितमानस: सुन्दर काण्ड (Shri Ramcharitmanas Sundar Kand)


श्री रामचरितमानस: सुन्दर काण्ड
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मंगलाचरण - Mangalacharan
❀ श्री हनुमान्‌ का समुद्र लाँघना - Sri Hanuman to jump across ocean
❀ श्री हनुमान्‌ का लंका में प्रवेश - Entry of Sri Hanuman in Lanka
❀ श्री हनुमान्‌ और विभीषण जी का संवाद - Dialogue of Sri Hanuman and Vibhishana
❀ श्री हनुमान्‌ का सीता जी को देखना - Sri Hanuman to See Sita
❀ श्री सीता-त्रिजटा संवाद - Dialogue of Sri Sita and Trijata
❀ श्री सीता और हनुमान्‌ जी का संवाद - Dialogue of Sri Sita and Sri Hanuman
❀ हनुमान्‌ जी द्वारा अशोक वाटिका उजाड़ना - Sri Hanuman to Destory Ashoka Garden
❀ श्री हनुमान्‌ रावण संवाद - Dialogue of Sri Hanuman and Ravana
❀ लंका-दहन - Burning of Lanka
❀ सीता जी से विदा लेना - Take leave of Sri Sita
❀ श्री राम-हनुमान्‌ संवाद - Dialogue of Sri Rama and Sri Hanuman
❀ श्री रामजी का समुद्र तट पर पहुँचना - Sri Rama to reach Sea Shore
❀ मंदोदरी-रावण संवाद - Dialogue of Mandodari and Ravana
❀ रावण द्वारा विभीषण जी का अपमान - Insult of Sri Vibhishan by Ravana
❀ विभीषण जी का श्री राम की शरण लेना - Vibhishana to Take Refuge in Sri Rama
❀ लक्ष्मण जी का रावण के लिए सन्देश देना - Sri Lakshmana to give message for Ravana
❀ शुक का रावण को लक्ष्मण जी का पत्र देना - Shuka to give Lakshmana's letter to Ravana
❀ समुद्र पर श्री राम जी का क्रोध - Sri Rama's anger on Ocean

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विनय पत्रिका

गोस्वामी तुलसीदास कृत विनयपत्रिका ब्रज भाषा में रचित है। विनय पत्रिका में विनय के पद है। विनयपत्रिका का एक नाम राम विनयावली भी है।

श्री रामचरितमानस: सुन्दर काण्ड: पद 41

बुध पुरान श्रुति संमत बानी । कही बिभीषन नीति बखानी ॥ सुनत दसानन उठा रिसाई ।..

श्री रामचरितमानस: सुन्दर काण्ड: पद 44

कोटि बिप्र बध लागहिं जाहू । आएँ सरन तजउँ नहिं ताहू ॥ सनमुख होइ जीव मोहि जबहीं ।..

मंदिर

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