पितृ पक्ष जिसे श्राद्ध या कानागत भी कहा जाता है, श्राद्ध पूर्णिमा के साथ शुरू होकर सोलह दिनों के बाद सर्व पितृ अमावस्या के दिन समाप्त होता है। हिंदू अपने पूर्वजों (अर्थात पितरों) को विशेष रूप से भोजन प्रसाद के माध्यम से सम्मान, धन्यवाद व श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
ऐसा माना जाता है कि श्राद्ध के समय, पूर्वजों को अपने रिश्तेदारों को आशीर्वाद देने के लिए पृथ्वी पर आते हैं। श्राद्ध कर्म की व्यख्या रामायण और महाभारत दोनों ही महाकाव्य में मिलती है।
संबंधित अन्य नाम | shraaddh paksha, kanagat, mahalaya paksha, sarvapitri amavasya, mahalaya amavasya, apara paksha, pitru amavasya, peddala amavasya, pitar paksha |
शुरुआत तिथि | भाद्रपद शुक्ला पूर्णिमा |
Updated: Aug 25, 2025 17:25 PM
Festival | Date |
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पितृ पक्ष (पूर्णिमा श्राद्ध) | 7 September 2025 |
पितृ पक्ष (प्रतिपदा श्राद्ध) | 8 September 2025 |
पितृ पक्ष (द्वितीय श्राद्ध) | 9 September 2025 |
पितृ पक्ष (चतुर्थी श्राद्ध) | 10 September 2025 |
पितृ पक्ष (पंचमी श्राद्ध) | 11 September 2025 |
पितृ पक्ष (षष्ठी श्राद्ध) | 12 September 2025 |
पितृ पक्ष (सप्तमी श्राद्ध) | 13 September 2025 |
पितृ पक्ष (अष्टमी श्राद्ध) | 14 September 2025 |
पितृ पक्ष (नवमी श्राद्ध) | 15 September 2025 |
पितृ पक्ष (दशमी श्राद्ध) | 16 September 2025 |
पितृ पक्ष (एकादशी श्राद्ध) | 17 September 2025 |
पितृ पक्ष (द्वादशी श्राद्ध) | 18 September 2025 |
पितृ पक्ष (त्रियोदशी श्राद्ध) | 19 September 2025 |
पितृ पक्ष (चतुर्दशी श्राद्ध) | 20 September 2025 |
सर्व पितृ अमावस्या | 21 September 2025 |