Shri Krishna Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

मेरे पास भगवान का विज़िटिंग कार्ड है - प्रेरक कहानी (Mere Pas Usaka Pata Hai)


Add To Favorites Change Font Size
रात के एक बजा था, एक सेठ को नींद नहीं आ रही थी, वह घर में चक्कर पर चक्कर लगाये जा रहा था, पर चैन नहीं पड़ रहा था।
आखिर मैं थक कर नीचे उतर आया और कार निकाली, शहर की सड़कों पर निकल गया। रास्ते में एक मंदिर दिखा सोचा थोड़ी देर इस मंदिर में जाकर भगवान के पास बैठता हूँ। प्रार्थना करता हूँ तो शायद शांति मिल जाये।

वह सेठ मंदिर के अंदर गया तो देखा, एक दूसरा आदमी पहले से ही भगवान की मूर्ति के सामने बैठा था, मगर उसका उदास चेहरा, आंखों में करूणा दर्शा रही थी।

सेठ ने पूछा: क्यों भाई इतनी रात को मन्दिर में क्या कर रहे हो ?

आदमी ने कहा: मेरी पत्नी अस्पताल में है, सुबह यदि उसका आपरेशन नहीं हुआ तो वह मर जायेगी और मेरे पास आपरेशन के लिए पैसा नहीं है।

उसकी बात सुनकर सेठ ने जेब में जितने रूपए थे, वह उस आदमी को दे दिए। अब गरीब आदमी के चहरे पर चमक आ गईं थी। सेठ ने अपना कार्ड दिया और कहा इसमें फोन नम्बर और पता भी है और जरूरत हो तो निसंकोच बताना।

उस गरीब आदमी ने कार्ड वापिस दे दिया और कहा: मेरे पास उसका पता है, इस पते की जरूरत नहीं है सेठजी!

आश्चर्य से सेठ ने कहा: किसका पता है भाई?
उस गरीब आदमी ने कहा: मुझे उसी भगवान का विज़िटिंग कार्ड मिल गया है, जिसने रात को ढाई बजे आपको यहाँ भेज दिया।
यह भी जानें

Prerak-kahani Bhagwan Ki Mahima Prerak-kahaniMandir Prerak-kahaniSeth Prerak-kahaniRich Man Prerak-kahaniGareeb Prerak-kahaniHospital Prerak-kahaniVisiting Card Prerak-kahani

अगर आपको यह prerak-kahani पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस prerak-kahani को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

Latest Prerak-kahani ›

हे कन्हैया! क्या बिगाड़ा था मैंने तुम्हारा - प्रेरक कहानी

एक औरत रोटी बनाते बनाते ॐ भगवते वासूदेवाय नम: का जाप कर रही थी, अलग से पूजा का समय कहाँ निकाल पाती थी बेचारी, तो बस काम करते करते ही..

धन का सम्मान या दान का सम्मान - प्रेरक कहानी

एक समय की बात है। एक नगर में एक कंजूस राजेश नामक व्यक्ति रहता था। उसकी कंजूसी सर्वप्रसिद्ध थी। वह खाने, पहनने तक में भी कंजूस था..

जिसका मन मस्त, उसके पास समस्त - प्रेरक कहानी

एक राजा बहुत दिनों बाद अपने बगीचे में सैर करने गया, पर वहां पहुँच उसने देखा कि सारे पेड़-पौधे मुरझाए हुए हैं।

इन सब के लिए भगवान तेरा धन्यवाद

एक पक्षी था जो रेगिस्तान में रहता था, बहुत बीमार, कोई पंख नहीं, खाने-पीने के लिए कुछ नहीं, रहने के लिए कोई आश्रय नहीं था।

सफल लाइफ में ऐसा कोई भी शॉर्टकट नहीं - प्रेरक कहानी

एक बार एक चिड़िया जंगल मे अपने मीठे सुर मे गाना गा रही थी। तभी, उसके पास से एक किसान कीड़ों से भरा एक संदूक ले करके गुजरा।

सत्संग के महत्व - प्रेरक कहानी

मैं काफी दिनों से आपके सत्संग सुन रहा हूं, किंतु यहां से जाने के बाद मैं अपने गृहस्थ जीवन में वैसा सदाचरण नहीं कर पाता, जैसा यहां से सुनकर जाता हूं।

मन को कभी भी निराश न होने दें - प्रेरक कहानी

मन को कभी भी निराश न होने दें, बड़ी से बड़ी हानि में भी प्रसन्न रहें। मन उदास हो गया तो आपके कार्य करने की गति धीमी हो जाएगी। इसलिए मन को हमेशा प्रसन्न रखने का प्रयास।

Sawan 2026 - Sawan 2026
Sawan 2026 - Sawan 2026
Bhakti Bharat APP