भक्तमाल: अरनाथ जी
अन्य नाम - भगवान अरनाथ जी, अरनाथ
शिष्य- कुम्भ, 32 गणधर
आराध्य - जैन धर्म
आयु: 84,000 वर्ष
ऊंचाई - 30 धनुष
रंग - सुनहरा
जन्म स्थान - हस्तिनापुर
जन्म दिवस - मार्गशीर्ष कृष्ण मास की दशमी तिथि
निर्वाण स्थान: सम्मेद शिखर
वैवाहिक स्थिति - विवाहित
पिता - राजा सुदर्शन
माता - रानी देवी मित्रा
प्रसिद्ध - जैन धर्म के 18वें तीर्थंकर
वंश: इक्ष्वाकु
प्रतीक (लंछना): मछली
भगवान अरनाथ जी जैन धर्म में 17वें तीर्थंकर
भगवान कुंथुनाथ जी के बाद 18वें तीर्थंकर हैं। उन्हें आध्यात्मिक गुरु के रूप में पूजा जाता है जिन्होंने मुक्ति का मार्ग दिखाया।
भगवान अरनाथ जी की जीवन गाथा
भगवान अरनाथ जी का जन्म राजपरिवार में हुआ था और उन्होंने अपने प्रारंभिक वर्षों में विलासितापूर्ण जीवन व्यतीत किया। यद्यपि, अन्य तीर्थंकरों की तरह, उन्होंने सांसारिक सुखों की क्षणभंगुरता को जान लिया था।
उन्होंने अपना राज्य त्याग दिया और आध्यात्मिक सत्य की खोज में एक संन्यासी बन गए। गहन ध्यान और तपस्या के माध्यम से उन्होंने केवल ज्ञान (सर्वज्ञता) प्राप्त की और निम्न मार्ग का प्रचार करना शुरू किया:
❀ अहिंसा
❀ सत्य
❀ अपरिग्रह
भगवान अरनाथ जी का आध्यात्मिक महत्व
❀ भौतिक जीवन से वैराग्य
❀ आत्म-अनुशासन का महत्व
❀ धर्म और करुणा का मार्ग
भगवान अरनाथ जी की पूजा आत्माओं को मोक्ष की ओर मार्गदर्शन करने और आंतरिक पवित्रता और वैराग्य पर जोर देने के लिए की जाती है।
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