भक्तमाल: भगवान अरिष्टनेमि जी
वास्तविक नाम - नेमिनाथ
अन्य नाम - नेमी
शिष्य - वरदत्त स्वामी के साथ 11 गांधार
आराध्य - जैन धर्म
ऊंचाई - 10 धनुष - 98 फीट
उम्र - 1000
जन्म स्थान - सौरिपुरा (द्वारका)
निर्वाण: गिरनार पर्वत
वैवाहिक स्थिति - आजीवन ब्रह्मचारी
पिता - राजा समुद्रविजय
माता - रानी शिवदेवी
प्रसिद्ध - जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर
वंश: यदुवंश
प्रतीक: शंख
रंग: नीला (श्यामा)
अरिष्टनेमि जी को नेमिनाथ या नेमिनाथ के नाम से भी जाना जाता है, वह जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर और जैन परंपरा में सबसे प्रतिष्ठित आध्यात्मिक शख्सियतों में से एक हैं। जैन परंपरा के अनुसार, वह नौवें और अंतिम वासुदेव कृष्ण के समकालीन थे।
भगवान अरिष्टनेमि के मूल उपदेश
अरिष्टनेमि भगवान कृष्ण के चचेरे भाई थे। राजकुमारी राजुल (राजीमती) से उनके विवाह की पूर्व संध्या पर, उन्होंने विवाह भोज के लिए एकत्रित पशुओं की आवाजें सुनीं। करुणा (अहिंसा) से प्रेरित होकर, उन्होंने तुरंत सांसारिक जीवन का त्याग कर वैराग्य का मार्ग अपनाया।
ज्ञानोदय एवं निर्वाण
❀ केवल ज्ञान (सर्वज्ञता): गहन तपस्या के बाद प्राप्त
❀ निर्वाण (मुक्ति): गिरनार पर्वत (गुजरात)
❀ गिरनार पर्वत जैन धर्म के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है, जो नेमिनाथ भगवान से घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है।
आध्यात्मिक महत्व: अरिष्टनेमी में निम्नलिखित गुण समाहित थे
❀ सभी जीवों के प्रति परम करुणा
❀ जैन धर्म का आसक्ति पर त्याग का आदर्श
❀ अहिंसा और वैराग्य की शक्ति
महावीर, पार्श्वनाथ और ऋषभनाथ के साथ, नेमिनाथ उन चौबीस तीर्थंकरों में से एक हैं जो जैनियों के बीच सबसे अधिक भक्तिपूर्ण पूजा करते हैं।
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