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एचएच स्वामी सदानंद सरस्वती (HH Swami Sadanand Saraswati)


एचएच स्वामी सदानंद सरस्वती
भक्तमाल | एचएच स्वामी सदानंद सरस्वती
असली नाम - रमेश अवस्थी
गुरु - शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती
आराध्या - भगवान शिव
जन्म – 1958
जन्म स्थान - ग्राम बरगी, नरसिंहपुर
वैवाहिक स्थिति - अविवाहित
भाषा - अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत, गुजराती
पिता - पंडित विद्याधर अवस्थी
माता - मनकुवांरबाई
एचएच स्वामी सदानंद सरस्वती द्वारका शारदा पीठम मठ के शंकराचार्य हैं। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निधन के बाद स्वामी सदानंद सरस्वती को द्वारका शारदा मठ का शंकराचार्य बनाया गया।

बहुत कम लोग जानते होंगे कि 12 साल की उम्र में स्वामी सदानंद जी ने आठवीं कक्षा की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी और 1970 में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का सानिध्य प्राप्त किया था। 62 वर्ष की आयु में गुरु सानिध्य में जप, तप और शास्त्रों का अध्ययन कर उन्होंने सनातन धर्म के परम गुरु शंकराचार्य का पद प्राप्त किया। सदानंद सरस्वती ने अब तक हिंदी, संस्कृत, गुजराती और अंग्रेजी भाषाओं में लगभग एक दर्जन पुस्तकों का लेखन और अनुवाद किया है, जिनका संग्रह परमहंसी गंगा आश्रम में है।

भारत के चार धाम

HH Swami Sadanand Saraswati in English

HH Swami Sadanand Saraswati is the Shankaracharya of Dwarka Sharada Peetham Math.
यह भी जानें

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हनुमान प्रसाद पोद्दार

हनुमान प्रसाद पोद्दार एक हिंदी लेखक, पत्रकार और समाज सुधारक थे। उन्हें हिंदू संतों की जीवनियों के संग्रह भक्तमाल पर उनके काम के लिए जाना जाता है।

कृपालु महाराज

भक्तमाल | जगद्गुरू श्री कृपालु जी महाराज | असली नाम - श्री राम कृपालु त्रिपाठी | आराध्य - श्री राधा कृष्ण | जन्म - शरद पूर्णिमा, 5 अक्टूबर 1922

शबरी

हिंदू महाकाव्य रामायण में सबरी एक बुजुर्ग महिला तपस्वी हैं। उनकी भक्ति के कारण उन्हें भगवान राम के दर्शन का आशीर्वाद मिला। वह भील समुदाय की शाबर जाति से संबंधित थी इसी कारण से बाद में उसका नाम शबरी रखा गया।

दादा देव महाराज

दादा देव महाराज राजस्थान के टोंक में टोडारायसिंह के सोलंकी वंश के एक प्रसिद्ध संत थे। उन्होंने 717 AD (VS 774) में 120 वर्ष की आयु में समाधि ली थी।

श्री नारायण गुरु

श्री नारायण गुरु भारत में एक दार्शनिक, आध्यात्मिक नेता और समाज सुधारक थे।

तुलसीदास जी

भक्तमाल | गोस्वामी तुलसीदास | असली नाम - रामबोला दुबे | गुरु - नरहरिदास | आराध्य - श्री रामचंद्र, भगवान शिव

संत रामदास दंदरौआ धाम

संत रामदास जी महाराज का जन्म भिंड जिले के मदरोली गांव में एक धार्मिक चचोर सनाढ्य ब्राह्मण परिवार में हुआ था। बचपन से ही उनमें सादगी, भक्ति और ईश्वर के प्रति अगाध प्रेम की गहरी भावना थी।

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