भक्तमाल: शांतिनाथ
अन्य नाम - शांति
शिष्य - चक्रायुध स्वामी, 36 गणधर
आराध्य - जैन धर्म
आयु: 100,000 वर्ष
ऊंचाई - 45 धनुष
रंग - सुनहरा
जन्म स्थान - हस्तिनापुर
जन्म दिवस - ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी
निर्वाण स्थान: सम्मेद शिखर
वैवाहिक स्थिति - विवाहित
पिता - राजा विश्वसेन
माता - रानी असीरा
जीवनसाथी - यशोमती
प्रसिद्ध - जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर
वंश: इक्ष्वाकु
प्रतीक (लंछना): हिरण या मृग
वृक्ष - नंदी
भगवान शांतिनाथ जैन धर्म में 15वें तीर्थंकर
भगवान धर्मनाथ जी के बाद 16वें तीर्थंकर हैं, जो एक आध्यात्मिक शिक्षक थे जिन्होंने मुक्ति (मोक्ष) का मार्ग दिखाया।
भगवान शांतिनाथ का जीवन वृत्तांत
शांतिनाथ का जन्म राजपरिवार में हुआ और वे एक महान राजा बने। उनका शासनकाल शांतिपूर्ण और समृद्ध था, जो उनके नाम "शांति" (शांति) के अनुरूप था।
सांसारिक जीवन की क्षणभंगुरता को जानने के बाद, उन्होंने राज्य त्याग दिया और संन्यासी बन गए। गहन ध्यान और तपस्या के माध्यम से उन्होंने केवल ज्ञान प्राप्त किया।
इसके बाद उन्होंने निम्नलिखित मार्ग का उपदेश दिया:
❀ अहिंसा
❀ सत्य
❀ अपरिग्रह
भगवान शांतिनाथ का आध्यात्मिक महत्व
❀ शांति, स्थिरता और आंतरिक सामंजस्य का प्रतीक
❀ उनका प्रतीक (हिरण) सौम्यता और अहिंसा का प्रतीक है
❀ भारत भर के जैन मंदिरों में उनकी व्यापक रूप से पूजा की जाती है
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