Shri Krishna Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

✨धनु मुअन संक्रांति - Dhanu Muan Sankranti

Dhanu Muan Sankranti Date: Wednesday, 16 December 2026
धनु मुअन संक्रांति

धनु संक्रांति सूर्य के धनु राशि में प्रवेश का प्रतीक है। ओडिशा में, यह जगन्नाथ संस्कृति और गीता जयंती परंपरा से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। यह आमतौर पर हर साल 15-16 दिसंबर के आसपास पड़ता है। यह सूर्य के धनु राशि या 'धनु राशि' में प्रवेश और पौष मास के आरंभ का प्रतीक है, जिसे पारंपरिक रूप से अच्छी फसल का समय माना जाता है।

शुरुआत तिथिधनु संक्रांति
कारणSurya Dev, Bhagwan Jagannath
उत्सव विधिमंदिर में प्रार्थना, व्रत, घर में पूजा

Dhanu Muan Sankranti in English

Dhanu Sankranti marks the transition of the Sun into Dhanu Rashi (Sagittarius). In Odisha, it is deeply connected with Jagannath culture and the Gita Jayanti tradition as well.

पुरी जगन्नाथ मंदिर में धनु संक्रांति

पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर में, यह त्योहार विशेष अनुष्ठानों के साथ मनाया जाता है:

धनु मुअन भोग दिन का मुख्य प्रसाद धनु मुअन है, जो खई (फूला हुआ चावल) गुड़ और घी से बनी एक पारंपरिक मिठाई है। भक्तिभारत के अनुसार, यह विशेष भोग भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा को समर्पित है।

गीता पारायण चूंकि धनु संक्रांति अक्सर गीता जयंती के साथ मेल खाती है, इसलिए भगवद गीता पाठ होता है। मंदिर के सेवकों द्वारा विशेष जप और प्रार्थनाएँ।

विशेष पूजा अनुष्ठान जैसे मंगला अलाती, मैलम, अबकाश अनुष्ठान
❀ सूर्य के धनु राशि में प्रवेश पर विशेष सूर्य पूजा
❀ धनु मुआन के साथ मध्याह्न धूप और राजभोग शामिल हैं
❀ उत्सव प्रसाद के साथ शाम की संध्या आरती

अन्नकारा/अन्नभोग परंपरा
❀ भक्त विभिन्न प्रकार के पीठा (स्थानीय केक) और मुआन तैयार करते हैं और वितरित करते हैं।
❀ ओडिशा में कई परिवार घर पर धनु मुअन की पेशकश करते हैं और फिर जगन्नाथ मंदिर जाते हैं।

ओडिशा में धनु संक्रांति का सांस्कृतिक महत्व

विशेष रूप से कृषि समुदायों में, यह पर्व प्रचुरता, समृद्धि और अच्छी फसल का प्रतीक है। पश्चिमी ओडिशा में, धनु संक्रांति एक महीने तक मनाई जाने वाली पौष यात्रा की शुरुआत है।

धनु संक्रांति में धनु यात्रा
ओडिशा के बरगढ़ में मुख्य रूप से मनाया जाने वाला एक विशाल मुक्ताकाश नाट्य उत्सव। इसे दुनिया के सबसे बड़े मुक्ताकाश नाट्य समारोह के रूप में मान्यता प्राप्त है। पूरा शहर कृष्ण-कंस युद्ध की कथा का मंच बन जाता है।

इस उत्सव में निम्नलिखित घटनाओं का पुनः मंचन होता है:
❀ मथुरा नगरी (बरगढ़)
❀ गोपपुर (अम्बपाली गाँव)
❀ राजा कंश का दरबार, उनका अत्याचार और उनका विनाश करने के लिए कृष्ण का आगमन।

यह आमतौर पर धनु संक्रांति के तुरंत बाद शुरू होता है। यह 11 दिनों तक चलता है। यह प्रतीकात्मक रूप से धनु संक्रांति की घटनाओं (जैसे कंस का धनुष तोड़ना) के बाद कृष्ण के मथुरा आगमन का समय दर्शाता है।

संबंधित जानकारियाँ

आवृत्ति
वार्षिक
समय
1 दिन
शुरुआत तिथि
धनु संक्रांति
महीना
नवंबर / दिसंबर
कारण
Surya Dev, Bhagwan Jagannath
उत्सव विधि
मंदिर में प्रार्थना, व्रत, घर में पूजा
महत्वपूर्ण जगह
पुरी ओडिशा
पिछले त्यौहार
16 December 2025
अगर आपको यह त्योहार पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस त्योहार को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

Shiv Bhajan - Shiv Bhajan
Ram Bhajan - Ram Bhajan
Bhakti Bharat APP