Shri Ram Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

पाखंडी को परमात्मा नहीं मिलते - प्रेरक कहानी (Pakhandi Ko Bhagwan Nahi Milate)


Add To Favorites Change Font Size
श्री कृष्ण के प्रति गोपियों का प्रेम इतना अधिक बढ़ गया था कि वह उनका वियोग एक क्षण भी नहीं सह सकती थी। श्री कृष्ण के वियोग में मूर्छित होने लगी।
श्री कृष्ण ने अपने बाल मित्रों से कह दिया था कि किसी गोपी को मूर्छा आए तो मुझे बुलाना। मैं मूर्छा उतारने का मंत्र जानता हूं।

किसी गोपी को मूर्छा आती तो शीघ्र ही कृष्ण को बुलाया जाता। श्री कृष्ण जानते थे कि इस गोपी के प्राण अब मुझ में ही अटके हैं। इसे कोई वासना नहीं है। यह जीव अत्यंत शुद्ध हो गया है एवं मुझसे मिलने के लिए आतुर है। अतः श्री कृष्ण उसके सिर पर हाथ फेरते और कान में कहते, शरद पूर्णिमा की रात्रि को तुझसे मिलूंगा। तब तक धीरज रख और मेरा ध्यान कर। यह सुनकर गोपी की मूर्छा दूर हो जाती।

वृंदावन में एक वृद्धा महिला, जोकि एक गोपी की सास थी, उसे लगा कि इसमें कुछ गड़बड़ अवश्य है। इन छोकरियों को मूर्छा आती है तो कन्हैया इनके कान में कुछ मंत्र पढता है। मैं भी यह मंत्र जानना चाहती हूं।

वृद्धा ने मूर्छित होने का ढोंग करके मंत्र जानने का निश्चय किया। काम करते-करते वह एकदम गिर गई। उसकी बहू को बहुत दुख हुआ। वह कन्हैया को बुलाने दौड़ी।

श्री कृष्ण ने कहा - सफेद बाल वाले पर मेरा मंत्र नहीं चलता है। बाल सफेद होने पर भी दिल सफेद न हो, प्रभु के नाम की माला न जपे, तो ऐसा जीव मरे या जिए, इसमें कोई फर्क नहीं पड़ता। मैं नहीं जाऊंगा। तू किसी दूसरे को बुला ले।

किंतु गोपी ने बहुत आग्रह किया। गोपी का शुद्ध प्रेम था, अतः उसके आग्रह को मानकर श्री कृष्ण घर आए और वृद्धा को देखकर बोले, इसको मूर्छा नहीं आई है। इसे तो भूत लगा है। किंतु घबराओ मत नवनीत। भूत उतारने का मंत्र भी मुझे आता है। एक लकड़ी ले आओ।

वृद्धा घबराई कि अब तो मार पड़ेगी। यह ढोंग तो मुझे ही भारी पड़ जाएगा।

कृष्ण ने लकड़ी के दो चार हाथ मारे कि वृद्धा बोल उठी, मुझे मत मारो, मत मारो, मुझे न मूर्छा आई है, न भूत लगा है। मैंने तो ढोंग किया था।

पाखंड भूत है। अभिमान भी भूत है। पाखंडी को परमात्मा नहीं मिलते।
यह भी जानें

Prerak-kahani Shri Krishna Prerak-kahaniPakhand Prerak-kahaniGopi Prerak-kahaniGopi Prem Prerak-kahani

अगर आपको यह prerak-kahani पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस prerak-kahani को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

Latest Prerak-kahani ›

ठाकुर जी सेवा में अहंकार नहीं विनम्रता रखें - प्रेरक कहानी

कमल किशोर सोने एवं हीरे-जवाहरात बनाने एवं बेचने का काम करता था। उसकी दुकान से बने हुए गहने दूर-दूर तक मशहूर थे।...

कुछ लोग ही कृष्ण की ओर बढ़ते हैं - प्रेरक कहानी

भोजन की गंध पाने पर तालाब से पांच छह बतखें उनके पास आकर पुकारने लगी क्वेक, क्वेक प्रभुपाद ने बड़े स्नेह से उन बतखों को भोजन दिया...

विद्वत्ता पर कभी घमंड न करें - प्रेरक कहानी

महाकवि कालिदास रास्ते में थे। प्यास लगी। वहां एक पनिहारिन पानी भर रही थी।
कालिदास बोले: माते! पानी पिला दीजिए बङा पुण्य होगा।

मृत्यु से भय कैसा? - प्रेरक कहानी

राजा परीक्षित को श्रीमद्भागवत पुराण सुनातें हुए जब शुकदेव जी महाराज को छह दिन बीत गए और तक्षक (सर्प) के काटने से मृत्यु होने का एक दिन शेष रह गया..

बुरे विचारों से बचने के उपाय - प्रेरक कहानी

एक दिन आचानक किसी संत से उसका सम्पर्क हुआ। वह संत से उक्त अशुभ विचारों से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना करने लगा...

ऐसे ही होने चाहिए गुरु - प्रेरक कहानी

वह उनके चरण स्पर्श कर अपना परिचय देता है। वे बड़े प्यार से पुछती है, अरे वाह, आप मेरे विद्यार्थी रहे है, अभी क्या करते हो, क्या बन गए हो?

शुभचिन्तक की अज्ञानवस भी उपेक्षा न करें - प्रेरक कहानी

सच्चे शुभचिन्तक की अज्ञानवस भी उपेक्षा न करें - एक कुम्हार को मिट्टी खोदते हुए अचानक एक हीरा मिल गया, उसने उसे अपने गधे के गले में बांध दिया...

Ram Bhajan - Ram Bhajan
Ram Bhajan - Ram Bhajan
Bhakti Bharat APP