🐚वैकुण्ठ चतुर्दशी - Vaikuntha Chaturdashi

Vaikuntha Chaturdashi Date: 17 November 2021
वैकुण्ठ चतुर्दशी को हरिहर का मिलन कहा जाता हैं अर्थात भगवान शिव और विष्णु का मिलन...

वैकुण्ठ चतुर्दशी को हरिहर का मिलन कहा जाता हैं अर्थात भगवान शिव और विष्णु का मिलन। विष्णु एवं शिव के उपासक इस दिन को बहुत उत्साह से मनाते हैं। दिवाली त्यौहार की तरह भगवान शिव और विष्णु का मिलन का उत्साह से मनाया जाता हैं। खासतौर पर यह उज्जैन, वाराणसी में मनाई जाती हैं। इस दिन उज्जैन में भव्य आयोजन किया जाता हैं। शहर के बीच से भगवान की सवारी निकलती हैं, जो महाकालेश्वर मंदिर तक जाती हैं। इस दिन उज्जैन में उत्सव का माहौल चारो और रहता हैं।

वैकुण्ठ चतुर्दशी कार्तिक पूर्णिमा के एक दिन पहले मनाया जाता है। एक ऐसा त्यौहार है जहाँ भक्त भगवान शिव एवं विष्णु दोनों को उसी दिन एक साथ पूजा करते है। यही वह दिन है जब भगवान विष्णु को वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर में विशेष सम्मान दिया जाता है, तथा मंदिर वैकुण्ठ धाम की तरह सजाया जाता है। भगवान विष्णु, भगवान शिव को तुलसी पत्तियां प्रदान करते हैं और भगवान शिव बदले में भगवान विष्णु को बेलपत्र देते हैं।

वैकुण्ठ चतुर्दशी महाराष्ट्र में मराठियों द्वारा भी बड़ी धूम धाम से मनाते है. महाराष्ट्र में वैकुण्ठ चतुर्दशी की शुरुवात शिवाजी महाराज और उनकी माता जिजाबाई ने की थी।

Vaikuntha Chaturdashi in English

Vaikuntha Chaturdashi is called the Milan of Harihar i.e. the Milan of Bhagwan Shiva and Vishnu

संबंधित जानकारियाँ

भविष्य के त्यौहार
6 November 2022
आवृत्ति
वार्षिक
समय
1 दिन
सुरुआत तिथि
कार्तिक शुक्ला चतुर्दशी
समाप्ति तिथि
कार्तिक शुक्ला चतुर्दशी
महीना
नवंबर / दिसंबर
उत्सव विधि
विष्णु सहस्रनाम, भजन कीर्तन, नदियों में दीप दान, नदियों में पवित्र स्नान, व्रत
महत्वपूर्ण जगह
शिव ज्योतिर्लिंग, शिव मंदिर, श्री हरि मंदिर
पिछले त्यौहार
28 November 2020, 10 November 2019, 21 November 2018
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मंदिर

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