ईश्वर से सम्पर्क करने का नम्बर - प्रेरक कहानी
एक पुजारी और नाई दोनों मित्र थे। एक बार नाई पुजारी से कहता है - ईश्वर ऐसा क्यों करता है? वैसा क्यों करता है? | ईश्वर से सम्पर्क करने का नम्बर, Number To Contact GOD
Prerak Kahani
शुद्ध भावनाओं से ईश्वर और सुंदर भविष्य पक्का है - प्रेरक कहानी
एक मन्दिर था, उसमें सभी लोग पगार पर थे। आरती वाला, पूजा कराने वाला आदमी, घण्टा बजाने वाला भी पगार पर था...
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मन को शांत रखने के उपाय - प्रेरक कहानी
सेठ उस साधु के पास के पास जाकर बोला, महाराज मेरे पास बहुत पैसा है, लेकिन मन की शांति नहीं है। साधु ने कहा कि, बेटा जैसा मैं करूं उसे चुपचाप देखते रहना...
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एक बार वे ऋषि प्रियमेध से मिलने गए जो उनके सामान ही विद्वान और सभी शास्त्रों के ज्ञाता थे। दोनों सहपाठी भी थे और जब भी वे दोनों मिलते तो दोनों के बीच एक लम्बा शास्त्रात होता था
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सिय राम मय सब जग जानी - प्रेरक कहानी
अरे महात्मा जी, इस रास्ते से मत जाइये आगे एक बैल गुस्से में लोगों को मारता हुआ घूम रहा है। और आपने तो लाल वस्त्र भी पहन रखे हैं...
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जिसका भी मनोबल जागा - प्रेरक कहानी
बचपन से ही उसे इस प्रकार से तैयार किया गया था कि युद्ध में शत्रु सैनिको को देखकर वो उनपर इस तरह टूट पड़ता कि देखते ही देखते शत्रु के पाँव उखड जाते।...
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हमारे भी पास सात दिन ही हैं - प्रेरक कहानी
रवि, सोम, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि, आठवां दिन तो बना ही नहीं है। परिवर्तन आज से आरम्भ करें।
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भगवान पर विश्वास को डिगने न दें - प्रेरक कहानी
एक आदमी जब भी दफ्तर से वापस आता, तो कुत्ते के प्यारे से पिल्ले रोज उसके पास आकर उसे घेर लेते थे क्योंकि वो रोज उन्हें बिस्कुट देता था।
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राम से बड़ा राम का नाम क्यों - प्रेरक कहानी
श्री राम दरबार में हनुमानजी महाराज श्री रामजी की सेवा में इतने तन्मय हो गये कि गुरू वशिष्ठ के आने का उनको ध्यान ही नहीं रहा!...
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पिता और पुत्र की रोचक कहानी - प्रेरक कहानी
एक बार पिता और पुत्र जलमार्ग से यात्रा कर रहे थे, और दोनों रास्ता भटक गये। फिर उनकी बोट भी उन्हें ऐसी जगह ले गई...
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तुलसीदास जी द्वारा विप्रचंद ब्राह्मण पर कृपा - सत्य कथा
एक बार एक विप्रचंद नामक ब्राह्मण से हत्या हो गयी और उस हत्या के प्रायश्चित के लिये वह अनेक तीर्थों में घूमता हुआ काशी आया।
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ज्ञान का सार्थक प्रयोग - प्रेरक कहानी
किसी ब्राह्मण के चार पुत्र थे। उनमें परस्पर गहरी मित्रता थी। चारों में से तीन शास्त्रों में पारंगत थे, लेकिन उनमें बुद्धि का अभाव था।
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कौवे एवं हंस की प्रवृति - प्रेरक कहानी
पुराने जमाने में एक शहर में दो ब्राह्मण पुत्र रहते थे, एक गरीब था तो दूसरा अमीर दोनों पड़ोसी थे। गरीब ब्राम्हण की क्षपत्नी, उसे प्रतिदिन ताने देती, झगड़ती।..
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मैं मरूंगा ही नहीं तो चूड़ियां फोड़ेगी कैसे - सत्य कथा
शारदा उनकी पत्नी रोने लगी तो रामकृष्ण ने आंखें खोलीं और कहा कि चुप, किसलिए रोती है? मैं न कहीं गया, न कहीं आया, मैं जहां हूं वहीं रहूंगा। तो शारदा ने पूछा, तुम्हारी देह के चले जाने के बाद मेरी चूड़ियों का क्या करना?
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सभी के कर्म एक समान नहीं हैं - प्रेरक कहानी
समाज में कभी एकरूपता नहीं आ सकती, क्योंकि हमारे कर्म कभी भी एक समान नहीं हो सकते। और जिस दिन ऐसा हो गया उस दिन समाज-संसार की सारी विषमतायें समाप्त हो जायेंगी।...
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