Haanuman Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

शरद विषुव | सितंबर विषुव (Autumnal Equinox | September Equinox)

शरद विषुव | सितंबर विषुव
हर साल दो विषुव होते हैं: एक सितंबर में और एक मार्च में। सितंबर में, सूर्य भूमध्य रेखा को उत्तर से दक्षिण की ओर पार करता है। 22 सितंबर 2020 को, उत्तरी गोलार्ध में शरद ऋतु की शुरुआत को चिह्नित करने वाले अधिकांश स्थानों पर दिन और रात लगभग बराबर थे, जो शीतकालीन संक्रांति (21 या 22 दिसंबर) तक रहता है। इसी तरह, वसंत विषुव 21 मार्च के आसपास आता है, जो उत्तरी गोलार्ध में वसंत की शुरुआत को चिह्नित करता है। दक्षिणी गोलार्द्ध में ऋतुएं उलटी होती हैं (ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में क्रिसमस गर्मी के मौसम में मनाया जाता है)।
विषुव प्रत्येक वर्ष 20 मार्च या 21 और सितंबर 22 या 23 को होता है, और दोनों दिनों में दिन और रात की समान लंबाई होती है। किसी भी भ्रम से बचने के लिए विषुव को मार्च विषुव (उत्तरी विषुव) और सितंबर विषुव (दक्षिणी विषुव) कहा जाता है। मार्च विषुव वह क्षण है जब सूर्य आकाशीय भूमध्य रेखा को पार करता है - पृथ्वी के भूमध्य रेखा के ऊपर आकाश में एक काल्पनिक रेखा - दक्षिण से उत्तर की ओर। यह हर साल 19, 20 या 21 मार्च को होता है।

विषुव के बारे में मुख्य बातें:
❀ विषुव शब्द दो लैटिन शब्दों से बना है - aequus (बराबर) और nox (रात)।
❀ वर्ष में केवल दो बार ऐसा होता है जब पृथ्वी की धुरी न तो सूर्य की ओर झुकी होती है और न ही दूर, जिसके परिणामस्वरूप सभी अक्षांशों पर लगभग समान मात्रा में दिन का प्रकाश और अंधेरा होता है। इन घटनाओं को विषुव कहा जाता है।
❀ विषुव मार्च (लगभग 21 मार्च) और सितंबर (लगभग 23 सितंबर) में होता है। ये वे दिन होते हैं जब सूर्य भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर होता है, जिससे दिन और रात बराबर होते हैं।
❀ नॉर्दर्न लाइट्स के लिए विषुव प्रमुख समय हैं - गर्मियों या सर्दियों की तुलना में भू-चुंबकीय गतिविधियों के वसंत और पतझड़ के समय में होने की संभावना दोगुनी होती है।

हिंदू ज्योतिष में वसंत विषुव को शरद विषुव या शरद संपत के नाम से जाना जाता है। पूर्वसर्ग के कारण शरदकालीन विषुव के हिंदू समकक्ष को अलग किया गया और तुला संक्रांति पर मनाया गया।

Autumnal Equinox | September Equinox in English

The summer solstice occurs when the Earth's inclination towards the Sun is maximum. Therefore, on the day of the summer solstice, the Sun appears at its highest altitude with a midday position that changes very little for several days before and after the summer solstice.
यह भी जानें
खगोलीय विषुव (Equinox) और प्रत्यक्ष सम-दिवस (Equilux) की तारीखों में अंतर क्यों होता है?

प्रश्न: जब खगोलीय रूप से शरद संपात (Autumnal Equinox) 22, 23 सितम्बर को होता है, तो वास्तविक रूप से दिन और रात 27 सितम्बर के आसपास बराबर (12-12 घंटे) क्यों दिखाई देते हैं?

उत्तर:
यह एक बहुत ही सटीक और वैज्ञानिक जिज्ञासा है। खगोल विज्ञान (Astronomy) में शरद संपात (Autumnal Equinox) और किसी स्थान पर दिन-रात का वास्तव में बराबर होना (Equilux)-ये दोनों दो अलग-अलग स्थितियाँ हैं।

23 सितम्बर को संपात होने और आपके स्थान पर 27 सितम्बर के आसपास दिन-रात बराबर (12 घंटे) दिखने के पीछे मुख्य रूप से तीन खगोलीय व भौगोलिक कारण होते हैं:

1. संपात (Equinox) की परिभाषा ज्यामितीय है
खगोल विज्ञान के अनुसार, शरद संपात (22–23 सितम्बर) वह सटीक क्षण होता है जब सूर्य की किरणें पृथ्वी की भूमध्य रेखा (Equator) पर लंबवत (90°) पड़ती हैं।

❀ यह घटना पूरे आकाशीय गोले पर सूर्य के केंद्रबिंदु (Center of Sun) के आधार पर तय होती है।
❀ गणितीय रूप से भूमध्य रेखा पर इस दिन सूर्य का क्रांत्यंश (Declination) शून्य ($0^\circ$) हो जाता है।

2. सूर्य का आकार और सूर्योदय/सूर्यास्त की परिभाषा
पंचांग या वेधशालाओं में दिनमान की गणना सूर्योदय और सूर्यास्त के समय से की जाती है:

❀ सूर्योदय तब माना जाता है जब सूर्य के बिम्ब का ऊपरी किनारा (Upper Limb) क्षितिज पर दिखाई देता है, न कि उसका केंद्र।
❀ सूर्यास्त तब माना जाता है जब सूर्य का अंतिम सिरा (Upper Limb) क्षितिज के नीचे पूरी तरह डूब जाता है।
❀ चूँकि सूर्य एक बिंदु नहीं बल्कि लगभग 0.5 degree (32 आर्कमिनट) का एक बड़ा बिम्ब है, इसलिए केवल इस किनारे की परिभाषा की वजह से ही दिन के समय में लगभग 2 से 3 मिनट जुड़ जाते हैं।

3. वायुमंडलीय अपवर्तन (Atmospheric Refraction)
पृथ्वी का वायुमंडल एक लेंस की तरह काम करता है:

❀ जब सूर्य वास्तव में क्षितिज के नीचे होता है, तब भी वायुमंडलीय अपवर्तन (प्रकाश के मुड़ने) के कारण वह हमें क्षितिज से ऊपर उठा हुआ दिखाई देता है।
❀ इस अपवर्तन के कारण सूर्योदय लगभग 2 से 3 मिनट पहले दिखता है और सूर्यास्त लगभग 2 से 3 मिनट देर तक होता है।
❀ परिणामस्वरुप, 23 सितम्बर को जब सूर्य बिल्कुल बीच में होता है, तब भी अपवर्तन और सौर बिम्ब के आकार के कारण दिन, रात से लगभग 7–8 मिनट बड़ा दिखाई देता है।

4. अक्षांश (Latitude) का प्रभाव - 'इक्विनॉक्स' बनाम 'इक्विलक्स'
❀ इक्विनॉक्स (Equinox - 23 सितम्बर): सूर्य भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर होता है।
❀ इक्विलक्स (Equilux - 27 सितम्बर): वह दिन जब किसी स्थानीय अक्षांश पर प्रत्यक्ष रूप से दिनमान और रात्रिमान बराबर (12-12 घंटे) दिखाई देते हैं।
❀ जैसे-जैसे आप भूमध्य रेखा से उत्तर की ओर जाते हैं, दिन को वास्तविक रूप से 12 घंटे पर आने में संपात के बाद 3 से 4 दिन का अतिरिक्त समय लग जाता है।

23 सितम्बर को खगोलीय रूप से संपात ही होता है, लेकिन पृथ्वी के वायुमंडल (अपवर्तन), सौर बिम्ब के विस्तार और आपके स्थान के अक्षांश के कारण दृश्य दिनमान और रात्रिमान बिल्कुल बराबर 27 सितम्बर को आकर होते हैं।

Blogs Autumnal Equinox BlogsSeptember Equinox BlogsTula Sankranti BlogsSharad Sampat BlogsAutumnal Equinox BlogsHindu Astrology Blogs

अगर आपको यह ब्लॉग पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस ब्लॉग को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें।

ब्लॉग ›

पितृ पक्ष में मौली क्यों नहीं बाँधी जाती?

पितृ पक्ष की पूजा के दौरान मौली (पूजा के दौरान कलाई पर बाँधा जाने वाला पवित्र लाल-पीला धागा) नहीं बाँधी जाती क्योंकि इस अवधि में किए जाने वाले अनुष्ठान केवल पितरों (पूर्वजों) के लिए होते हैं, न कि देवताओं के लिए।

पितृ पक्ष में किन भोजनों से परहेज किया जाता है?

हिंदुओं का मानना ​​है कि पितृ पक्ष मैं श्राद्ध करने से पूर्बजों को मुक्ति मिलती है और प्रसन्न होते हैं। श्राद्ध की रस्में हिंदू परंपराओं के अनुसार बहुत सारे प्रतिबंधों के तहत की जाती हैं। इस दौरान कुछ भोजनों से परहेज किया जाता है।

हिंदू धर्म में विभिन्न धागों का महत्व

हिंदू धर्म में बुराइयों से छुटकारा पाने के कई उपाय हैं। हिन्दू धर्म में पवित्र सूत्रों का बड़ा महत्व होता है। लोग इन पवित्र धागों को अपने शरीर के विभिन्न अंगों में धारण करते हैं सकारात्मक परिणामके लिए। पवित्र धागों में लाल, नारंगी, सफेद, काला और पीला जैसे विभिन्न रंग मौजूद होते हैं। सभी धागों के अपने विशिष्ट कारण होते हैं।

गणेश विसर्जन कैसे करें

गणेश चतुर्थी उत्सव में गणेश विसर्जन एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, जो भगवान गणेश को समर्पित उत्सवों के समापन का प्रतीक है।

गणेशोत्सव 2026

आइए जानें! श्री गणेशोत्सव, श्री गणेश चतुर्थी, अनंत चतुर्दशी एवं गणपति विसर्जन से जुड़ी कुछ जानकारियाँ, प्रसिद्ध भजन एवं सम्वन्धित अन्य प्रेरक तथ्य..

बुढ़वा मंगल विशेष 2026

भादौं माह के अंतिम मंगलवार को माए जाने वाला त्यौहार बुढ़वा मंगल, मध्य उत्तर प्रदेश अर्थात व्रज मंडल में हनुमान जी का सबसे प्रसिद्ध उत्सव है।

ISKCON एकादशी कैलेंडर 2026

यह एकादशी तिथियाँ केवल वैष्णव सम्प्रदाय इस्कॉन के अनुयायियों के लिए मान्य है | ISKCON एकादशी कैलेंडर 2026

Navratri Specials 2026 - Navratri Specials 2026
Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Bhakti Bharat APP