Haanuman Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

शांति कहाँ मिलेगी - प्रेरक कहानी (Shanti Kahan Milegi)


शांति कहाँ मिलेगी - प्रेरक कहानी
Add To Favorites Change Font Size
एक समय कि बात है, भगवान विष्णु सभी जीवों को कुछ न कुछ चीजें भेट कर रहे थे। सभी जीव भेंट स्वीकार करते और खुशी-खुशी अपने निवास स्थान के लिए प्रस्थान करते। जब सब चले गए तो उनकी चरण सेविका श्री लक्ष्मी जी ने भगवान से कहा- हे नाथ! मैंने देखा कि आपने सभी को कुछ न कुछ दिया, अपने पास कुछ नहीं रखा लेकिन एक चीज आपने अपने पैरों के नीचे छिपा लिया है। वो चीज क्या है?
श्री हरि मंद-मंद मुस्कुराते रहे, उन्होंने इसका कोई जवाब नहीं दिया।

लक्ष्मी जी ने फिर कहा- प्रभु हमसे न छुपाएं, मैंने स्वयं अपनी आंखों से देखा है आपने कोई एक चीज अपने पैरों के नीचे छिपा रखा है, निवेदन है कृपया इस रहस्य से पर्दा उठाइए

श्री हरि बोले- देवी मेरे पैरों के नीचे शांति है। शांति मैंने किसी को नहीं दिया, सुख सुविधा तो सभी के पास हो सकती हैं मगर शांति तो किसी दुर्लभ मनुष्य के पास ही होगी. मैं सब को नहीं दे सकता। जो मेरी प्राप्ति के लिए तत्पर्य होगा, जिसकी सारी चेष्टाएं मुझ तक पहुंचने की होगी, उसी को ये मिलेगा।

श्री हरि से आज्ञा लेकर शांति कहने लगी- हे जगत माता, श्री हरि ने मुझे अपने पैरों के नीचे नहीं छिपाया बल्कि मैं स्वयं उनके पैरों के नीचे छिप गई। शांति तो सिर्फ़ हरि चरणों के नीचे ही जीव को मिलेगा, अन्यथा कहीं नहीं।

कथा कहती है कि उसी दिन से श्री लक्ष्मी जी ने श्री हरि के चरणों की सेवा शुरू कर दी, क्योंकि व्यक्ति सारी सुख सम्पत्ति से सुसज्जित हो मगर उसके पास शांति ही न हो तो उसकी सारी सुख सम्पत्ति व्यर्थ हो जाता है।इसलिए स्वयं सुख समृद्धि की जननी माता लक्ष्मी भी शांति प्राप्ति हेतु और श्री हरि सेवा के लिए उनके चरणों की सेवा हमेशा करती रहती हैं।

इसलिए भगवान की चरण सेवा करें,अपनी संपत्ति का सदुपयोग करें। निस्वार्थ सबका भला करें और परमपिता परमेश्वर के अलावा किसी से कोई उम्मीद ना रखें।
यह भी जानें

Prerak-kahani Shanti Prerak-kahaniShri Hari Prerak-kahaniLakshmi Narayan Prerak-kahaniPeace Prerak-kahaniMann Ki Shanti Prerak-kahani

अगर आपको यह prerak-kahani पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस prerak-kahani को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

Latest Prerak-kahani ›

हमारी लालसाएँ और वृत्तियाँ नहीं बदलती - प्रेरक कहानी

एक पेड़ पर दो बाज रहते थे। दोनों अक्सर एक साथ शिकार की तलाश में निकलते और जो भी पाते, उसे शाम को मिल-बांट कर खाते..

अंध-अनुसरण कैसे पनपता है?- प्रेरक कहानी

इंस्पेक्शन के दौरान उन्होंने देखा कि कैम्प एरिया के मैदान में दो सिपाही एक बैंच की पहरेदारी कर रहे हैं।..

भक्त के अधीन भगवान - अनाथ बालक की कहानी

एक गरीब बालक था जो कि अनाथ था। एक दिन वो बालक एक संत के आश्रम मे आया और बोला कि बाबा आप सबका ध्यान रखते है..

सेवा भाव ना भूलें, क्षमाशील बनें - प्रेरक कहानी

एक राजा था, उसने 10 खूंखार जंगली कुत्ते पाल रखे थे। जिनका इस्तेमाल वह लोगों को उनके द्वारा की गयी गलतियों पर मौत की सजा देने के लिए करता था...

सच्चा साधु कौन है - प्रेरक कहानी

एक साधु को एक नाविक रोज इस पार से उस पार ले जाता था, बदले मैं कुछ नहीं लेता था, वैसे भी साधु के पास पैसा कहां होता था। नाविक सरल था, पढा लिखा तो नहीं, पर समझ की कमी नहीं थी।

प्रत्येक वस्तु पर हमारा ही अधिकार हो? - प्रेरक कहानी

एक राजा ने यह घोषणा करवा दिया कि कल सुबह जब मेरे महल का मुख्य दरवाज़ा खोला जायेगा तब जिस शख़्स ने भी महल में जिस वस्तु या जीव को हाथ लगा दिया वह वस्तु या जीव उसकी हो जाएगी।

ह्रदय से जो जाओगे सबल समझूंगा तोहे: सूरदास जी की सत्य कथा

हाथ छुड़ाए जात हो, निवल जान के मोये । मन से जब तुम जाओगे, तब प्रवल माने हौ तोये । - सूरदास जी

Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Bhakti Bharat APP