पितृ पक्ष - Pitru Paksha
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

गोस्वामी तुलसीदास की सूरदास जी से भेंट - सत्य कथा (Goswami Tulsidas Ki Surdas Ji Se Bhent)


Add To Favorites Change Font Size
श्री सूरदास जी से भगवान् का विनोद करना:
संवत् १६१६ मे जब श्री तुलसीदास जी कामदगिरि पर्वत के पास निवास कर रहे थे, तब श्रीगोकुलनाथ जी की प्रेरणा से श्रीसूरदास जी उनके पास आये। उन्होने अपना सूरसागर ग्रंथ दिखाया और दो पद गाकार सुनाये, तुलसीदास जी ने पुस्तक उठाकर हृदय से लगा ली और भगवान् श्री कृष्ण की बडी महिमा गायी।
सूरदास जी अनन्य कृष्ण भक्त थे और तुलसीदास जी अनन्य राम भक्त। दोनों अपने अपने प्रभु के गुणगान खूब करते थे। दोनों अपने-अपने प्रभु के एक से बढ़ कर एक पद सुना रहे थे।

भगवान के सभी नामो का एक सा माहात्म्य है परंतु कभी-कभी संत और भगवान के बीच में विनोद हो जाता है। दोनों संत अपने अपने प्रभु के नाम का महात्यम बताने लगे।

निश्चय करने के लिए एक तराजू लाया गया। तुलसीदास जी ने अपने प्रभु का स्मरण किया और विराजने के लिए विनती की और सूरदास जी ने अपने प्रभु का स्मरण किया और दूसरे पलड़े पर विराजमान होने को कहा। दोनों के इष्ट गुप्त रूप में विराजमान हो आए।

तुलसीदास जी वाला पलड़ा भारी हो गया। अब सूरदास श्री को बड़ा दुःख हुआ। वे कहने लगे कि बेकार में ही श्री कृष्ण के चक्कर में पड़ गए। इसने तो हमारी नाक कटवा दी अब तो हम इसका भजन नहीं करेंगे।

सूरदास जी ने पद गाना छोड़ दिया तो श्रीनाथ जी से रहा नहीं गया। प्रभु श्रीनाथ जी सूरदास जी के सामने आये और उन्हें मानाने लगे। सुरदास जी ने कहा कि आपके नाम का पलड़ा तो हल्का पड गया, मेरी नाक कट गयी।

श्री नाथ जी मुस्कुराए और बोले: बाबा ! आप जपते हो कृष्ण-कृष्ण और पलड़े पर आपने आवहान किया मेरे अकेले श्री कृष्ण का। तुलसीदास जी जपते है सीताराम और उन्होंने ने पलड़े पर आवाहन किया युगल जोड़ी सीताराम जी का।

अब अकेले श्री कृष्ण का वजन एक ओर और सीता-राम जी दोनों का वजन एक ओर। किशोरी जी जहाँ हो वहाँ का पलड़ा तो भारी होगा ही, मेरे अकेले का वजन तो युगल जोड़ी से कम ही होगा न।

भगवान् के सभी नाम एक समान ही है। सूरदास जी समझ गए कि यह तो केवल हास्य लीला है। दोनों संत गले मिले, सूरदास जी का हाथ पकड़कर गोस्वामी जी ने उन्हें संतुष्ट किया और श्री गोकुलनाथ जी को एक पत्र लिख दिया। सात दिन सत्संग करके सूरदास जी लौट गये।
यह भी जानें

Prerak-kahani Shri Ram Prerak-kahaniShri Hanuman Prerak-kahaniTulsidas Prerak-kahaniTrue Story Prerak-kahaniTrue Prerak-kahaniSurdas Ji Prerak-kahaniSita Ram Prerak-kahaniVrindavan Prerak-kahaniKrishna Prerak-kahaniGokulnath Ji Prerak-kahaniYugal Kishor Prerak-kahani

अगर आपको यह prerak-kahani पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस prerak-kahani को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें।

Latest Prerak-kahani ›

शिशु प्रेम लेकर तो आता है - प्रेरक कहानी

भाषा के शब्द भी प्रतीक हैं, हाव-भाव या चित्र भी प्रतीक हैं। किस चीज के प्रतीक? ऑडियो-विजुअल माध्यमों (पुस्तकों, प्रवचनों, चित्रों या चलचित्रों) द्वारा हम जो कुछ भी सिखाते हैं..

स्वयं प्रभु मूर्तिमान होकर जनाबाई का हाथ बंटाते - प्रेरक कहानी

नामदेवजी के साथ जनाबाई का कुछ पारलौकिक सम्बन्ध था। संवत १४०७ में नामदेवजी ने समाधि ली, उसी दिन उनके पीछे-पीछे कीर्तन करती हुई जनाबाई भी विठ्ठल भगवान में विलीन हो गईं।

बहरे भक्त का सत्संग प्रेम - प्रेरक कहानी

एक संत के पास बहरा आदमी सत्संग सुनने आता था। उसे कान तो थे पर वे नाड़ियों से जुड़े नहीं थे। एकदम बहरा, एक शब्द भी सुन नहीं सकता था।

ग्राम देवता की सीख का फल - प्रेरक कहानी

उन्हीं के संस्कारों का परिणाम ये हुआ कि आज कई पीढ़ियों के बाद भी उनका परिवार धर्म की राह पर चलता हुआ फल-फूल रहा है।..

निंदा से सदैव बचना चाहिए - प्रेरक कहानी

एक बार एक राजा ने यह फैसला लिया कि वह प्रतिदिन 100 अंधे लोगों को खीर खिलाया करेगा। एक दिन खीर वाले दूध में सांप ने मुंह डाला

मानवता भीतर के संस्कारों से पनपती है - प्रेरक कहानी

श्री टी.एन. शेषन जब मुख्य चुनाव आयुक्त थे, तो परिवार के साथ छुट्टीयां बिताने के लिए मसूरी जा रहे थे। परिवार के साथ उत्तर प्रदेश से निकलते हुऐ रास्ते में..

जब तक दुख नहीं मिलते, प्रभु की याद नहीं आती - प्रेरक कहानी

फिर सुपरवाईजर ने उसका ध्यान आकर्षित करने के लिए एक १० रु का नोट नीचे फैंका, जो ठीक मजदूर के सामने जा कर गिरा..

Navratri Specials 2026 - Navratri Specials 2026
Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Bhakti Bharat APP