Shri Krishna Bhajan

अधर पणा (Adhara Pana)

अधर पणा
अधर पणा, पुरी जगन्नाथ का एक अनुष्ठान है जो रथ यात्रा उत्सव के दौरान पुरी जगन्नाथ मंदिर में मनाया जाता है। अधर पणा अनुष्ठान आषाढ़ महीने त्रयोदशी तिथि पर आयोजित किया जाता है, जिसमें विशेष रूप से निर्मित मिटटी के बर्तनों में देवताओं को 100 लीटर पणा (मीठा पेय) परोसा जाता है।
अधर पणा अनुष्ठान कैसे आयोजित किया जाता है?
❀ आमतौर पर, अधर पणा आषाढ़ महीने त्रयोदशी तिथि पर मध्याह्न धूप (दोपहर-भोजन) के बाद दिया जाता है, जिसके बाद सोडाशा उपचार पूजा (16 प्रकार की पूजा) होती है। अधर पणा अनुष्ठान के दौरान, 12वीं शताब्दी के मंदिर के सिंह द्वार के पास खड़े प्रत्येक रथ पर मिटटी के बर्तन रखे जाते हैं। ये प्रभु के होठों तक पहुँचते हैं।

❀ बर्तन में दूध की मलाई, पनीर, चीनी, केला, कपूर, जायफल, काली मिर्च और ऐसे अन्य मसालों का 100 लीटर मिश्रण किया जाता है। फिर रथों में रहने वाली आत्माओं भूत, पिशाच, मानव, दानब को मुक्त करने के लिए इन्हें तोड़ दिया जाता है।

❀ जलपान केवल उन देवी-देवताओं के लिए है, जो रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और भगवान बलभद्र की रक्षा के लिए रथों पर रहते हैं, यही कारण है कि उन्हें 'रथ रक्षक' के नाम से जाना जाता है। भक्तों को यह पणा ग्रहण करना मना है।

❀ विशाल मिटटी के बर्तन कुंभारपाड़ा के कुम्हारों द्वारा तैयार किये जाते हैं। पहले, इस उद्देश्य के लिए 12 मिट्टी के बर्तनों का उपयोग किया जाता था। हालाँकि, सेवक अब केवल नौ बर्तनों में पणा परोसते हैं।

अधर पणा अनुष्ठान कौन तैयार करता है?
परंपरा के अनुसार, श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन और राघब दास मठ और बदौदिया मठ के अधिकारी स्थानीय कुम्हारों से मिट्टी के बर्तनों की व्यवस्था करते हैं, जो इन्हें बनाने के लिए तीन बोरी मिट्टी और एक बोरी रेत का उपयोग करते हैं। अनुष्ठान के लिए तीन विशेष मिट्टी के बर्तनों को आकार देने में उन्हें कम से कम एक महीने का समय लगता है।

अधर पणा के बाद अगले दिन नीलाद्रि बिजे का अनुष्ठान आयोजित किया जाता है।

Adhara Pana in English

Adhar Pana ritual is conducted at Puri Jagannath temple on Trayodashi tithi in the month of Ashadha.
यह भी जानें

Blogs Adhara Pana BlogsSnana Yatra BlogsDevasnana Purnima BlogsSnana Purnima BlogsGajanan Besh BlogsNiladri Bije BlogsPuri Rath Yatra Festival BlogsGundicha Yatra BlogsJagannath Rath BlogsChariot Festival BlogsRath Yatra Dates BlogsNetrautsav BlogsHera Panchami BlogsSuna Besh Blogs

अगर आपको यह ब्लॉग पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस ब्लॉग को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

ब्लॉग ›

रवि योग क्या है?

रवि योग तब बनता है जब सूर्य के नक्षत्र और चंद्रमा के नक्षत्र के बीच की दूरी 4वें, 6वें, 8वें, 9वें, 12वें या 14वें नक्षत्र के अलावा कुछ भी हो।

हिंदू देवताओं को सोने से क्यों सजाया जाता है?

हिंदू परंपरा में, देवताओं को सोने के आभूषणों से विलासिता के लिए नहीं, बल्कि गहरे प्रतीकात्मक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कारणों से सजाया जाता है।

मंडला पूजा क्या है?

मंडला पूजा, शास्त्रों में निर्धारित सभी तपस्या और दिनचर्या के साथ 41 दिनों की लंबी अवधि पूरे कठोर रीती रिवाज़ के साथ पालन किया जाने वाला अनुष्ठान है।

ब्रज के भावनात्मक 12 ज्योतिर्लिंग

ब्रजेश्र्वर महादेव: (बरसाना)श्री राधा रानी के पिता भृषभानु जी भानोखर सरोवर मे स्नान करके नित्य ब्रजेश्वर महादेव की पूजा करते थे।

जैन ध्वज क्या है?

जैन धर्म में जैन ध्वज महत्वपूर्ण है और इसके अनुयायियों के लिए एकता के प्रतीक के रूप में कार्य करता है। विभिन्न समारोहों के दौरान जैन ध्वज मंदिर के मुख्य शिखर के ऊपर फहराया जाता है।

रुद्राभिषेक क्या है ?

अभिषेक शब्द का शाब्दिक अर्थ है – स्नान कराना। रुद्राभिषेक का अर्थ है भगवान रुद्र का अभिषेक अर्थात शिवलिंग पर रुद्र के मंत्रों के द्वारा अभिषेक करना।

शरद विषुव | सितंबर विषुव

ग्रीष्म संक्रांति तब होती है जब पृथ्वी का सूर्य की ओर झुकाव अधिकतम होता है। इसलिए, ग्रीष्म संक्रांति के दिन, सूर्य दोपहर की स्थिति के साथ अपनी उच्चतम ऊंचाई पर दिखाई देता है जो ग्रीष्म संक्रांति से पहले और बाद में कई दिनों तक बहुत कम बदलता है।

Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Bhakti Bharat APP