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✨जगन्नाथ रथ यात्रा - Jagannath Rath Yatra

Jagannath Rath Yatra Date: Rath Yatra: Tuesday, 20 June 2023
जगन्नाथ रथ यात्रा

जगन्नाथ रथ यात्रा भगवान विष्णु के अवतार भगवान जगन्नाथ उनके भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के साथ जगत प्रसिद्ध जगन्नाथ पुरी मंदिर में आयोजित की जाती है। आदि गुरु शंकराचार्य के निर्देशानुसार एक हिंदू को अपने जीवन काल में चार धाम यात्रा अवश्य करनी चाहिए। जगन्नाथ धाम मंदिर इन चार तीर्थस्थलों में से पूर्व दिशा की ओर स्थापित धाम है।

गुण्डिचा माता मंदिर रथ यात्रा से एक दिन पहिले भगवान जगन्नाथ के विश्राम के लिए साफ किया जाता है, मंदिर की सफाई के इस अनुष्ठान को गुण्डिचा माजन के नाम से जाना जाता है। तथा मंदिर की सफाई के लिए जल इन्द्रद्युम्न सरोवर से लाया जाता है। रथ यात्रा में प्रयोग होने वाले रथ का निर्माण कार्य अक्षय तृतीया के शुभ पर्व पर भगवान जगन्नाथ के आशीर्वाद के साथ हो जाता है।

संबंधित अन्य नामपुरी रथ यात्रा, हेरा पंचमी, गुण्डिचा माजन, बहुदा यात्रा, स्नान यात्रा, अधर पना, नीलाद्रि बीजे, सुना बेश, संध्या दर्शन/नवमी दर्शन, गजानन बेश, नेत्र उत्सव
सुरुआत तिथिआषाढ़ शुक्ल द्वितीया
उत्सव विधिरथ यात्रा, प्रार्थना, कीर्तन।

Jagannath Rath Yatra in English

Jagannath Rath Yatra organized for Shri Vishnu avtran Lord Jagannatha with His brother Balabhadra and sister Devi Subhadra at famous Jagannatha temple Puri.

स्नान यात्रा

4 June 2023
रथ यात्रा तथा बहुदा यात्रा से भी पहले हमें एक और रोचक यात्रा के बारे में जानना चाहिए। जगन्नाथ रथ यात्रा के अनुष्ठान की तैयारियाँ रथ यात्रा के दिन से बहुत पहले से प्रारंभ हो जाया करतीं हैं। रथयात्रा से लगभग 18 दिन पहले भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और उनकी बहन देवी सुभद्रा को औपचारिक जल स्नान कराया जाता है। जिसे स्नान यात्रा के नाम से जाना जाता है।

स्नान यात्रा के दिन, भगवान को जगन्नाथ मंदिर के उत्तरी कुएं से खींचे गए शुद्ध जल के 108 बर्तनों से स्नान कराया जाता है।

ठंडे जल से स्नान के उपरांत भगवान बीमार पड़ जाते हैं, और 15 दिनों तक भक्तों को भी दर्शन नही देते हैं। इस अवधि को अनासारा के रूप में जाना जाता है। 15 दिनों के बाद भगवान वापस लौट कर आते हैं, और भक्तों को दर्शन देते हैं। भगवान के इन दर्शन को नव यौवन दर्शन तथा नेत्रोत्सव कहा जाता है। तथा नेत्रोत्सव के अगले ही दिन, भव्य जगन्नाथ रथ यात्रा उत्सव मनाया जाता है! ब्लॉग: करोना क्वारंटाइन वैसे ही है, जैसे जगन्नाथ रथयात्रा मे अनासार

हेरा पंचमी

24 June 2023
हेरा पंचमी, जगन्नाथ धाम पुरी में रथ यात्रा की प्रक्रिया के दौरान किया जाने वाला एक अनुष्ठान है। रथयात्रा के पांचवें दिन, यह अनुष्ठान आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष में माता महालक्ष्मी द्वारा किया जाता है।

हेरा पंचमी मुख्य रूप से गुण्डिचा मंदिर में मनाई जाती है। इस दिन मुख्य मंदिर अर्थात जगन्नाथ धाम मंदिर से भगवान जगन्नाथ की पत्नी माता लक्ष्मी, सुवर्ण महालक्ष्मी के रूप में गुंडिचा मंदिर में आती हैं। उन्हें मंदिर से गुण्डिचा मंदिर तक पालकी में ले जाया जाता है, जहाँ पुजारी उन्हें गर्वग्रह में ले जाते हैं और भगवान जगन्नाथ से मिलाते हैं। सुवर्ण महालक्ष्मी भगवान जगन्नाथ से पुरी के मुख्य मंदिर अपने धाम श्रीमंदिर में वापस चलने का आग्रह करती हैं।

भगवान जगन्नाथ उनके अनुरोध को स्वीकार करते हैं और माता लक्ष्मी को उनकी सहमति के रूप में एक माला (सनमाति माला) देते हैं। फिर शाम को माता लक्ष्मी गुंडिचा मंदिर से जगन्नाथ मंदिर लौटती हैं। मुख्य मंदिर प्रस्थान से पहले, वह क्रोधित हो जाती है और अपने एक सेवक को नंदीघोष (भगवान जगन्नाथ का रथ) के एक हिस्से को नुकसान पहुंचाने का आदेश देती है। जिसे रथ भंग कहा जाता है।

माता महालक्ष्मी गुंडिचा मंदिर के बाहर एक इमली के पेड़ के पीछे छिपकर इन सभी कार्यों के लिए निर्देश देती हैं। कुछ समय बाद माता हेरा गौरी साही नामक गोपनीयता मार्ग के माध्यम से शाम को जगन्नाथ मंदिर पहुँच जाती हैं।

संत एवं गुरुओं के मत के अनुसार, हेरा पंचमी श्रीमंदिर के महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में से एक है। भगवान जगन्नाथ के लाखों भक्त इस अनोखे अनुष्ठान का आनंद लेते हैं।

बहुदा यात्रा

29 June 2023
देवशयनी एकादशी के दिन से भगवान जगन्नाथ चार महीने के लिए अपनी निद्रा मे चले जाते हैं। इससे पहले, भगवान जगन्नाथ को अपने मुख्य मंदिर मे लौटना आवश्यक है।

अतः रथयात्रा के 8वें दिन के बाद, दशमी तिथि पर अपने मुख्य मंदिर लौटने की यात्रा को बहुडा यात्रा के नाम से जाना जाता है। बाहुदा यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ देवी अर्धासिनी घर में एक छोटा सा पड़ाव रखते हैं। माँ अर्धासिनी के इस मंदिर को मौसी माँ मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।

गजानन बेश

4 June 2023
स्नान यात्रा के औपचारिक स्नान के बाद गजानन या हाती बेश में भगवान जगन्नाथ और बलभद्र को अलंकृत करने की परंपरा है। आखिरकार, यह समारोह वार्षिक रथ यात्रा की प्रस्तावना है। साहान मेला से लाखों भक्त इस अवधि के दौरान पुरी में भाई-बहन के देवताओं के 'दर्शन' करने के लिए आते हैं। इसके बाद भगवन 14 दिन के लिए अनसर में चले जाते हैं।

नेत्र उत्सव

19 June 2023
अनसर के 14 दिन बाद नेत्र उत्सव मनाया जाता है, भगवान जगन्नाथ, मां सुभद्रा, प्रभु बलभद्र स्वस्थ हो चके होते हैं, और भक्तों को दर्शन देते हैं। मंदिर सेवक भगवान की आंखों में काजल लगाते हैं और चंदन, सिंदूर का तिलक करते हैं और वह सार्वजनिक रूप से दर्शन देने के लिए तैयार होते हैं।

सुना बेश

सुना बेश, जिसे राजाधिराज बेशा, राजा बेशा और राजराजेश्वर बेशा के नाम से भी जाना जाता है, एक ऐसी घटना है जब देवताओं जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को सोने के गहनों से सजाया जाता है। सुनाभाषा साल में 5 बार मनाई जाती है। यह आमतौर पर माघ पूर्णिमा, बहुदा एकादशी, दशहरा, कार्तिक पूर्णिमा और पौस पूर्णिमा को मनाया जाता है।

मंदिर के सूत्रों के अनुसार, अतीत में, देवताओं को सुशोभित करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सोने के गहनों का कुल वजन 208 किलोग्राम से अधिक था, जो शुरू में 138 डिजाइनों में बनाया गया था। हालाँकि, अब केवल 20-30 डिज़ाइन का उपयोग किया जाता है।

अधर पना

सुना बेश के एक दिन बाद, जब भाई-बहन सुनहरे पोशाक में चमकते हैं, तो मीठे पेय से भरे विशाल बर्तन तीन रथों पर प्रसाद के रूप में चढ़ाए जाते हैं। आषाढ़ शुक्ल पख्य द्वादशी के दिन अधर पना का यह रोचक अनुष्ठान किया जाता है।

नीलाद्रि बीजे

नीलाद्री बीजे वार्षिक रथ यात्रा उत्सव के अंत और भगवान जगन्नाथ की गर्भगृह में वापसी का प्रतीक है या फिर आप भगवान जगन्नाथ और उनकी प्यारी पत्नी माँ महालक्ष्मी के बीच एक प्यारी सी कहानी बता सकते हैं। नीलाद्री बिजे समारोह के दिन, भगवान अपने भाई और बहन के साथ श्री मंदिर लौटते हैं। नीलाद्री बीजे भगवान जगन्नाथ ने देवी लक्ष्मी को उपहार के रूप में रसगुल्ला भेंट देते हैं।

पवित्र त्रिमूर्ति का विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा उत्सव नीलाद्रि बीजे अनुष्ठान के साथ समाप्त होता है।

संबंधित जानकारियाँ

आवृत्ति
वार्षिक
समय
1 दिन
सुरुआत तिथि
आषाढ़ शुक्ल द्वितीया
समाप्ति तिथि
आषाढ़ शुक्ल द्वितीया
महीना
जून / जुलाई
मंत्र
जय जगन्नाथ।
प्रकार
ओडिशा में सार्वजनिक अवकाश
उत्सव विधि
रथ यात्रा, प्रार्थना, कीर्तन।
महत्वपूर्ण जगह
पुरी, जगन्नाथ मंदिर, इस्कॉन मंदिर।
पिछले त्यौहार
Niladri Bije: 12 July 2022, Adhara Pana: 11 July 2022, Suna Besha: 10 July 2022, Bahuda Yatra: 9 July 2022, Sandhya Darshan: 8 July 2022, Hera Panchami: 5 July 2022, Rath Yatra: 1 July 2022, Netro Utsav: 29 June 2022, Snan Yatra: 14 June 2022

फोटो प्रदर्शनी

फुल व्यू गैलरी
Jagannath Rathyatra: Netro Utsav Wishes

Jagannath Rathyatra: Netro Utsav Wishes

Jagannath Rathyatra: Snan Purnima Wishes

Jagannath Rathyatra: Snan Purnima Wishes

Jagannath Rathyatra: Hera Panchami

Jagannath Rathyatra: Hera Panchami

Jagannath Rathyatra: Sandhya Darshan

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Jagannath Rathyatra: Bahuda Yatra

Jagannath Rathyatra: Bahuda Yatra

Suna Besha

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Adhara Pana

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Niladri Bije

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