व्यंकटेश जी की आरती (Venkatesh Ji Ki Aarti)


शेषाचल अवतार तारक तूं देवा ।
सुरवर मुनिवर भावें करिती जन सेवा ॥
कमलारमणा अससी अगणित गुण ठेवा ।
कमलाक्षा मज रक्षुनि सत्वर वर द्यावा ॥

जय देव जय देव जय व्यंकटेशा ।
केवळ करूणासिंधु पुरविसी आशा ॥
भक्तिभारत लिरिक्स

हे निजवैकुंठ म्हणुनी ध्यातों मी तू तें ।
दाखविसी गुण कैसे सकळिक लोकाते ॥

देखुनि तुझे स्वरूप सुख अद्‌भुत होते ।
ध्यातां तुजला श्रीपति दृढ मानस होते ॥
Venkatesh Ji Ki Aarti - Read in English
Sheshachala Avatara Taraka Tu Deva। Suravara Munivara Bhave Kariti Jana Seva॥
Aarti Shri Vishnu AartiShri Satyanarayan AartiPurnima AartiPooramasi AartiPoornima AartiPurnima Vart Aarti
अगर आपको यह आरती पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!


* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

आरती ›

श्री गणेश आरती

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥...

शिव आरती - ॐ जय शिव ओंकारा

जय शिव ओंकारा, ॐ जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥

श्री सिद्धिविनायक आरती: जय देव जय देव

श्री सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई, श्री गणेश आरती | सुख करता दुखहर्ता, वार्ता विघ्नाची | जय देव जय देव..

ॐ जय जगदीश हरे आरती

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

पंच परमेष्ठी आरती

इह विधि मंगल आरति कीजे, पंच परमपद भज सुख लीजे । इह विधि मंगल आरति कीजे..