सत्य को स्थापित होने के लिए तीन चरणों में गुजरना होता है,
उपहास, विरोध और अंत में स्वीकृति।
अध्यात्मक विचारों के आभाव में व्यक्ति गुमराह हो जाता है।
❝ भगवान को खोजने की कोशिश मत करो।
इस तरह से कार्य करो,
कि वह आपको ही ढूंढ लें। ❞
ISKCON
❝ पाप अँधेरे के समान है,
जो ज्ञान का उजाला होते ही दूर हो जाता है। ❞
महाकवि कालिदास
❝ भिन्न-भिन्न परिस्थितियों से जूझते हुए,
व्यक्ति की सकारात्मक प्रतिक्रियाएँ ही..
चरित्र का व्याख्यान करती हैं। ❞
नितिन प्रताप सिंह
अपने आप का सुधार आपको खुद ही करना होगा,
दूसरे तो केवल आपको राह दिखा सकते हैं।
There are some thoughts that help you in freshness, new energy and enthusiasm in your life.
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