Sheetal Shashti Date: Saturday, 20 June 2026
शीतल षष्ठी ओडिशा, विशेषकर संबलपुर में मनाया जाने वाला सबसे आध्यात्मिक और महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह त्योहार भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह का स्मरण कराता है और भक्ति, पवित्रता और दिव्य शक्तियों के मिलन का प्रतीक है। शीतल षष्ठी, \"शीतल\" का अर्थ है शीतल या सुखदायक और \"षष्ठी\" चंद्र पखवाड़े के छठे दिन को संदर्भित करता है।
शीतल षष्ठी त्योहार की पौराणिक पृष्ठभूमि
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त करने के लिए गहन तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर, भगवान शिव ने उनका प्रस्ताव स्वीकार कर लिया और देवताओं, ऋषियों और भक्तों ने उनके दिव्य विवाह का उत्सव मनाया। शीतल षष्ठी इसी पवित्र विवाह का पुनर्मंचन है। यह त्योहार ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष के छठे दिन मनाया जाता है, जो आमतौर पर मई या जून में होता है।
शीतल षष्ठी त्योहार के प्रमुख अनुष्ठान और उत्सव
❀ दिव्य विवाह समारोह: भगवान शिव और देवी पार्वती की मूर्तियों का विधिपूर्वक विवाह संपन्न कराया जाता है।
❀ पुरोहितों द्वारा विस्तृत वैदिक अनुष्ठान और मंत्रों का पाठ किया जाता है।
❀ समुदाय के परिवार प्रतीकात्मक रूप से दूल्हा और दुल्हन के रिश्तेदार बन जाते हैं।
शीतल षष्ठी उत्सव की भव्य शोभायात्रा
इस उत्सव का एक प्रमुख आकर्षण रंगारंग शोभायात्रा है, जिसमें शामिल हैं: सजी हुई पालकी और रथ, पारंपरिक संगीत और ढोल, लोक नृत्य और मार्शल आर्ट प्रदर्शन, भक्त “हर हर महादेव” का जाप करते हैं। हजारों लोग इस उत्सव को देखने के लिए एकत्रित होते हैं।
| शुरुआत तिथि | ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष के छठे दिन |
| कारण | भगवान शिव |
| उत्सव विधि | व्रत, पूजा, व्रत कथा, भजन-कीर्तन, गौरी-शंकर मंदिर में पूजा, रुद्राभिषेक |
Sheetal Shashti is one of the most spiritual and significant festivals celebrated in Odisha, especially in Sambalpur. The festival commemorates the divine marriage of Bhagwan Shiva and Goddess Parvati and symbolizes devotion, purity, and the union of divine powers.
शीतल षष्ठी उत्सव के प्रसिद्ध स्थल
यह त्योहार पूरे ओडिशा में मनाया जाता है, लेकिन सबसे भव्य आयोजन संबलपुर के
समलेश्वरी मंदिर और भुवनेश्वर के
श्री लिंगराज मंदिर में होते हैं।
संबलपुर शीतल षष्ठी यात्रा अपनी विशालता और सांस्कृतिक भव्यता के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। शीतल षष्ठी केवल एक धार्मिक त्योहार ही नहीं बल्कि एक प्रमुख सांस्कृतिक आयोजन भी है जो: सामुदायिक एकता को बढ़ावा देता है, ओडिशा की लोक परंपराओं को संरक्षित करता है, भक्ति और सांस्कृतिक गतिविधियों में भागीदारी को प्रोत्साहित करता है, विभिन्न क्षेत्रों से पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
शीतल षष्ठी त्योहार का आध्यात्मिक महत्व
भक्तों का मानना है कि शीतल षष्ठी को श्रद्धापूर्वक मनाने से: वैवाहिक सामंजस्य, समृद्धि और सुख, बाधाओं का निवारण, भगवान शिव और देवी पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस त्योहार के दौरान कई अविवाहित श्रद्धालु अच्छे जीवनसाथी के लिए प्रार्थना करते हैं।
शीतल षष्ठी त्योहार पर लोकप्रिय भक्ति मंत्र:
हर हर महादेव!
ॐ नमः शिवाय!
जय माँ पार्वती!
संबंधित जानकारियाँ
शुरुआत तिथि
ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष के छठे दिन
उत्सव विधि
व्रत, पूजा, व्रत कथा, भजन-कीर्तन, गौरी-शंकर मंदिर में पूजा, रुद्राभिषेक
Updated: May 19, 2026 11:19 AM
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