भक्तमाल: ऋषि अत्रि
अन्य नाम - ब्रह्मऋषि
आराध्य - त्रिमूर्ति - ब्रह्मा, विष्णु और शिव
वैवाहिक स्थिति - विवाहित
पिता - ब्रह्मा (मानस पुत्र)
पत्नी - अनुसूया
संतान - दुर्वासा, चंद्र और दत्तात्रेय
प्रसिद्धि - सप्तऋषि
ऋषि अत्रि हिंदू परंपरा में सबसे पूजनीय ऋषियों में से एक हैं और प्राचीन भारत के सात महान ऋषियों - सप्तऋषियों में गिने जाते हैं।
हिंदू धर्म में ऋषि अत्रि का महत्व
❀ ऋषि अत्रि को ऋग्वेद में कई भजनों की रचना का श्रेय दिया जाता है।
❀ वे सत्य, तपस्या और ज्ञान के प्रतीक हैं।
❀ उनकी वंश परंपरा, जिसे अत्रेय परंपरा कहा जाता है, ने वैदिक ज्ञान और आयुर्वेद में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
ऋषि अत्रि को ब्रह्मऋषि (ऋषियों का सर्वोच्च वर्ग) के रूप में जाना जाता है। वह ब्रह्मा के मानस पुत्र थे। उनकी पत्नी देवी अनसूया, अपनी अद्वितीय पवित्रता और भक्ति के लिए जानी जाती थीं। चित्रकूट में
सती अनुसूया का मंदिर है।
जानिए
ऋषि कश्यप के बारे में।
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