Sawan 2026
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

लक्षदीपम (Lakshadeepam)

तिरुवनंतपुरम में श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर अपने लक्षदीपम उत्सव के लिए प्रसिद्ध है - एक लुभावने उत्सव जिसमें मंदिर परिसर में एक लाख (100,000) तेल के दीपक जलाए जाते हैं। श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का लक्षदीपम एक आध्यात्मिक अनुष्ठान है जो की वास्तुशिल्प सौंदर्य और सामुदायिक भक्ति का एक असाधारण मिश्रण है। यह उत्सव हर छह साल में एक बार मनाया जाता है।
लक्षदीपम क्या है?
❀ लक्षदीपम का अर्थ है “एक लाख दीपक जलाना।” हर छह साल में एक बार आयोजित होने वाला यह मुराजपम का भव्य समापन है, जो गहन वैदिक मंत्रोच्चार (ऋग, यजुर और साम वेद) की 56-दिवसीय अवधि है।
❀ पहला रिकॉर्डेड उत्सव जनवरी 1750 में राजा मार्तंड वर्मा के शासनकाल में मनाया गया था, और यह भक्ति और सांस्कृतिक भव्यता की एक दृश्य अभिव्यक्ति है।

लक्षदीपम कब मनाया जाता है
❀ हर छह साल में एक बार, आमतौर पर मकर संक्रांति (14-15 जनवरी) के मलयालम त्योहार मकरम 1 पर मनाया जाता है।
❀ पिछला त्योहार जनवरी 2020 में मनाया गया था, जिसका अगला संस्करण 2026 में होगा।

लक्षदीपम समारोह की मुख्य बातें
❀ दीप जलाना: मंदिर, गोपुरम, शिवली मार्ग और पवित्र पद्मतीर्थम तालाब के चारों ओर मिट्टी और पीतल के दीपक सजाए जाते हैं गए हैं।
❀ शीवेली जुलूस: पुजारी पारंपरिक गरुड़ वाहन जुलूस में पद्मनाभ, नरसिंह और कृष्ण की मूर्तियों को ले जाते हैं - आमतौर पर त्रावणकोर शाही परिवार के सदस्यों और सैकड़ों वैदिक विद्वानों के साथ।
❀ पारंपरिक तेल के दीयों के साथ-साथ, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था का उपयोग वातावरण को बढ़ाने के लिए किया जाता है, जो इसे वास्तव में शानदार बनाता है।

ड्रेस कोड:
❀ पुरुष: पारंपरिक मुंडू/धोती, मुंडू के नीचे शर्ट नहीं।
❀ महिलाएं: साड़ी या लंबी स्कर्ट; युवा लड़कियां स्कर्ट/टॉप में।

लक्षदीपम के दौरान प्रवेश:
केवल पास के माध्यम से (सार्वजनिक रूप से लगभग 15,000, कर्मचारियों/शाही परिवार के लिए 5,000)। लक्षदीपम के दौरान यहां भीड़ हो जाती है, इसलिए पहले से योजना बना लें।

Lakshadeepam in English

The Sree Padmanabhaswamy Temple in Thiruvananthapuram is famous for its Lakshadeepam festival - a breathtaking celebration in which one lakh (100,000) oil lamps are lit across the temple premises.
यह भी जानें

Blogs Lakshadeepam BlogsPadmanabhaswamy Temple Blogs10 Avatars Of Bhagwan Shri Vishnu BlogsDashavatar BlogsKrishna BlogsRam BlogsMatsya Avtar BlogsParsuram Avtar Blogs

अगर आपको यह ब्लॉग पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस ब्लॉग को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

ब्लॉग ›

सावन शिवरात्रि 2026

आइए जानें! सावन शिवरात्रि से जुड़ी कुछ जानकारियाँ एवं सम्वन्धित कुछ प्रेरक तथ्य.. | बृहस्पतिवार, 30 जुलाई 2026 से शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 तक

ISKCON एकादशी कैलेंडर 2026

यह एकादशी तिथियाँ केवल वैष्णव सम्प्रदाय इस्कॉन के अनुयायियों के लिए मान्य है | ISKCON एकादशी कैलेंडर 2026

अमेरिका में कैसे मनाई जाती है जन्माष्टमी?

अमेरिका श्रीकृष्ण के मंदिरों में जन्माष्टमी के त्यौहार पर भक्तों की भीड़ उमड़ती है और त्योहार का उत्सव भव्य रूप से मनाया जाता है। जन्माष्टमी उत्सव के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका में मंदिर द्वारा कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, पुजारियों और अन्य वक्ताओं द्वारा भगवान श्री कृष्ण के जीवन से सबक सुनाया जाते हैं।

संकष्टी चतुर्थी और विनायक चतुर्थी में क्या अंतर है?

शास्त्रों के अनुसार अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी जो पूर्णिमा के बाद आती है उसे संकष्टी चतुर्थी कहते हैं।

मंदिर के शिखर दर्शन का महत्व

मंदिर में दर्शन के कई नियम हैं और उनका पालन करना जरूरी है। साथ ही यह भी माना जाता है कि यदि आप किसी कारण से मंदिर के अंदर प्रवेश नहीं कर सकते हैं, तो आपको बाहर से इसके शिखर के दर्शन अवश्य करने चाहिए।

अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता का क्या अर्थ है?

भगवान श्री राम के प्रिय भक्त प्रभु हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधि के दाता के रूप में जाना जाता है। हनुमान चालीसा की एक चौपाई भी है “अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता अस बर दीन जानकी माता”। अर्थात हनुमान जी की भक्ति से व्यक्ति के जीवन में आठ प्रकार की सिद्धियाँ और नौ प्रकार की निधियाँ प्राप्त होती हैं।

पूजा और व्रत में क्यों नहीं किया जाता प्याज और लहसुन का इस्तेमाल?

हमारे हिंदू धर्म में कई मान्यताएं प्रचलित हैं, जिनका हम पालन भी करते हैं। शास्त्रों के अनुसार खासतौर पर प्याज और लहसुन भगवान को चढ़ाने की मनाही है। यह जानते हुए भी कि प्याज-लहसुन गुणों की खान है, लेकिन इसके बाद भी व्रत में बनने वाले किसी भी तरह के खाने में प्याज-लहसुन का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।

Sawan 2026 - Sawan 2026
Sawan 2026 - Sawan 2026
Bhakti Bharat APP