Shri Krishna Bhajan
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अधूरा पुण्य (Adhura Punya)

अधूरा पुण्य
✔ दिनभर पूजा की भोग, फूल, चुनरी, आदि सामिग्री चढ़ाई - पुण्य
✖ पूजा के बाद, गन्दिगी के लिए समान पेड़/नदी के पास फेंक दिया - अधूरा पुण्य
क्या प्रभु आपसे खुश हुए होंगे ?
✔ मंदिर गये विधिवत पूजा-अर्चना की - पुण्य
✖ ज़ूते-चप्पल अ-व्यवस्थित जहग उतारे - अधूरा पुण्य

✔ लाखों का निमंत्रण किया, हज़ारों को भोज कराया - पुण्य
✖ और खाना निम्न क्वालिटी का खिलाया, या सफाई का ध्यान नहीं दिया - अधूरा पुण्य

✔ जागरण / भगवत-कथा की, लोगों को भोज कराया - पुण्य
✖ रोड पे टेंट लगा कर लोगों को असुविधा की... टेंट लगाने के लिए रोड पे होल / खुआई की - अधूरा पुण्य

✔ त्योहार मनाए, गिफ्ट और मिठाइयाँ बांटी, लोगों का अभिवादन किया - पुण्य
✖ पटाखे से प्रदूषण किया, गंदगी फैलाई, ट्रॅफिक अव्यवस्था फैलाई - अधूरा पुण्य

✔ आपने भंडारा किया हज़ारों को खाना खिलाया - पुण्य
✖ पर प्लेट्स गंदगी के लिए छोड़ दिए - अधूरा पुण्य

✔ मंदिर गये फूल चढ़ाए, पकवान चढ़ाए - पुण्य
✖ पॉली-बेग, बेकार खाली डब्बे वहीं छोड़ दिए - अधूरा पुण्य
क्या प्रभु आपसे खुश हुए होंगे?

✔ नारियल फोड़े, लोगों मे बाँटे, पूजा की - पुण्य
✖ पर नारियल का कूड़ा वही छोड़ दिया - अधूरा पुण्य

✔ कार छोड़ कर मेट्रो का सफ़र चुना - पुण्य
✖ मेट्रो मे ही खाना पीना शुरू किया - अधूरा पुण्य

✔ जानवरों पे उपकार किया, उनको पाला, सेवा की - पुण्य
✖ पर उनसे सड़क / गली मे गंदगी करा दी - अधूरा पुण्य

अपने पुण्य को अधूरा ना छोडे, पुण्य पूरा ही करें...
स्वच्छ भारत अभियान - (एक नहीं) दो कदम स्वच्छता की ओर !!

Adhura Punya in English

All Day Worship With Bhog, Flowers, Chunri, Etc. - Punya After Worship, Throwing All the Ingredients Under the Tree or River to Create Filthiness - Incomplete Punya

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भगवान जगन्नाथ के अलग-अलग बेश?

बेश एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ है पोशाक, पोशाक या पहनावा। 'मंगला अलाती' से 'रात्रि पहुड़' तक प्रतिदिन, पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर की 'रत्नवेदी' पर देवताओं को सूती और रेशमी कपड़ों, कीमती पत्थरों से जड़े सोने के आभूषणों, कई प्रकार के फूलों और अन्य पत्तियों और जड़ी-बूटियों से सजाया जाता है। जैसे तुलसी, दयान, मरुआ आदि। चंदन का लेप, कपूर और कभी-कभी कीमती कस्तूरी का उपयोग दैनिक और आवधिक अनुष्ठानों में किया जाता रहा है।

भगवान अलारनाथ की कहानी: श्री जगन्नाथ कथा

अनासार के दौरान जब भगवान जगन्नाथ बीमार हो जाते हैं, तब अलारनाथ मंदिर परिसर मे भगवान को खीर का भोग लगाया जाता है तथा साथ ही साथ भक्तों को भी यही भोग भेंट किया जाता है।

क्यों महाप्रभु एक दिन में मौसी माँ के घर नहीं पहुँच पाते?

धार्मिक परंपरा, रीति-रिवाजों के महत्व और व्यावहारिक कारणों से पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा आमतौर पर एक दिन में गुंडिचा मंदिर नहीं पहुँचती है।

जगन्नाथ मंदिर प्रसाद को 'महाप्रसाद' क्यों कहा जाता है?

जगन्नाथ मंदिर में सदियों से पाया जाने वाला महाप्रसाद लगभग 600-700 रसोइयों द्वारा बनाया जाता है, जो लगभग 50 हजार भक्तों के बीच वितरित किया जाता है।

पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा के तीन रथ

रथ यात्रा भगवान जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा का वार्षिक रथ उत्सव है। वे तीन अलग-अलग रथों पर यात्रा करते हैं और लाखों लोग रथ खींचने के लिए इकट्ठा होते हैं।

पुरी रथ यात्रा से जुड़े 10 कम ज्ञात और रोचक तथ्य

पुरी रथ यात्रा विश्व के सबसे प्राचीन और विशाल धार्मिक उत्सवों में से एक है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के दिव्य रथों के दर्शन करने के लिए पुरी पहुँचते हैं।

भगवान जगन्नाथ का नीलाद्रि बीजे अनुष्ठान क्या है?

नीलाद्रि बीजे, वार्षिक रथ यात्रा उत्सव के अंत और भगवान जगन्नाथ की गर्भगृह में वापसी को चिह्नित करता है या फिर आप भगवान जगन्नाथ और उनकी प्यारी पत्नी माँ महालक्ष्मी के बीच एक प्यारी सी कहानी बता सकते हैं।

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