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अधूरा पुण्य (Adhura Punya)

अधूरा पुण्य
✔ दिनभर पूजा की भोग, फूल, चुनरी, आदि सामिग्री चढ़ाई - पुण्य
✖ पूजा के बाद, गन्दिगी के लिए समान पेड़/नदी के पास फेंक दिया - अधूरा पुण्य
क्या प्रभु आपसे खुश हुए होंगे ?
✔ मंदिर गये विधिवत पूजा-अर्चना की - पुण्य
✖ ज़ूते-चप्पल अ-व्यवस्थित जहग उतारे - अधूरा पुण्य

✔ लाखों का निमंत्रण किया, हज़ारों को भोज कराया - पुण्य
✖ और खाना निम्न क्वालिटी का खिलाया, या सफाई का ध्यान नहीं दिया - अधूरा पुण्य

✔ जागरण / भगवत-कथा की, लोगों को भोज कराया - पुण्य
✖ रोड पे टेंट लगा कर लोगों को असुविधा की... टेंट लगाने के लिए रोड पे होल / खुआई की - अधूरा पुण्य

✔ त्योहार मनाए, गिफ्ट और मिठाइयाँ बांटी, लोगों का अभिवादन किया - पुण्य
✖ पटाखे से प्रदूषण किया, गंदगी फैलाई, ट्रॅफिक अव्यवस्था फैलाई - अधूरा पुण्य

✔ आपने भंडारा किया हज़ारों को खाना खिलाया - पुण्य
✖ पर प्लेट्स गंदगी के लिए छोड़ दिए - अधूरा पुण्य

✔ मंदिर गये फूल चढ़ाए, पकवान चढ़ाए - पुण्य
✖ पॉली-बेग, बेकार खाली डब्बे वहीं छोड़ दिए - अधूरा पुण्य
क्या प्रभु आपसे खुश हुए होंगे?

✔ नारियल फोड़े, लोगों मे बाँटे, पूजा की - पुण्य
✖ पर नारियल का कूड़ा वही छोड़ दिया - अधूरा पुण्य

✔ कार छोड़ कर मेट्रो का सफ़र चुना - पुण्य
✖ मेट्रो मे ही खाना पीना शुरू किया - अधूरा पुण्य

✔ जानवरों पे उपकार किया, उनको पाला, सेवा की - पुण्य
✖ पर उनसे सड़क / गली मे गंदगी करा दी - अधूरा पुण्य

अपने पुण्य को अधूरा ना छोडे, पुण्य पूरा ही करें...
स्वच्छ भारत अभियान - (एक नहीं) दो कदम स्वच्छता की ओर !!

Adhura Punya in English

All Day Worship With Bhog, Flowers, Chunri, Etc. - Punya After Worship, Throwing All the Ingredients Under the Tree or River to Create Filthiness - Incomplete Punya

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अधर पणा

अधर पणा अनुष्ठान आषाढ़ महीने त्रयोदशी तिथि पर पुरी जगन्नाथ मंदिर में आयोजित किया जाता है।

सावन शिवरात्रि 2024

आइए जानें! सावन शिवरात्रि से जुड़ी कुछ जानकारियाँ एवं सम्वन्धित कुछ प्रेरक तथ्य.. | सावन शिवरात्रि: Friday, 2 August 2024

कांवर यात्रा की परंपरा किसने शुरू की?

धार्मिक ग्रंथों में माना जाता है कि भगवान परशुराम ने ही कांवर यात्रा की शुरुआत की थी। इसीलिए उन्हें प्रथम कांवरिया भी कहा जाता है।

तुलाभारम क्या है, तुलाभारम कैसे करें?

तुलाभारम और तुलाभरा जिसे तुला-दान के नाम से भी जाना जाता है, एक प्राचीन हिंदू प्रथा है यह एक प्राचीन अनुष्ठान है। तुलाभारम द्वापर युग से प्रचलित है। तुलाभारम का अर्थ है कि एक व्यक्ति को तराजू के एक हिस्से पर बैठाया जाता है और व्यक्ति की क्षमता के अनुसार बराबर मात्रा में चावल, तेल, सोना या चांदी या अनाज, फूल, गुड़ आदि तौला जाता है और भगवान को चढ़ाया जाता है।

हिंदू धर्म में पूजा से पहले संकल्प क्यों लिया जाता है?

संकल्प का सामान्य अर्थ है किसी कार्य को करने का दृढ़ निश्चय करना। हिंदू धर्म में परंपरा है कि किसी भी तरह की पूजा, अनुष्ठान या शुभ कार्य करने से पहले संकल्प लेना बहुत जरूरी होता है।

भगवान जगन्नाथ के अलग-अलग बेश?

बेश एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ है पोशाक, पोशाक या पहनावा। 'मंगला अलाती' से 'रात्रि पहुड़' तक प्रतिदिन, पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर की 'रत्नवेदी' पर देवताओं को सूती और रेशमी कपड़ों, कीमती पत्थरों से जड़े सोने के आभूषणों, कई प्रकार के फूलों और अन्य पत्तियों और जड़ी-बूटियों से सजाया जाता है। जैसे तुलसी, दयान, मरुआ आदि। चंदन का लेप, कपूर और कभी-कभी कीमती कस्तूरी का उपयोग दैनिक और आवधिक अनुष्ठानों में किया जाता रहा है।

नेत्र उत्सव

नेत्रोत्सव रथ यात्रा से एक दिन पहले आयोजित किया जाता है।

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