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स्नान यात्रा (Snana Yatra)

स्नान यात्रा
स्नान यात्रा जो कि देवस्नान पूर्णिमा या स्नान पूर्णिमा नाम से भी जाना जाता है। यह यात्रा हिंदू माह ज्येष्ठ की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला एक औपचारिक भगवान जगन्नाथ का भव्य स्नान उत्सव है।
❀ हिंदू कैलेंडर के अनुसार यह वर्ष का पहला अवसर है, जब भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा, सुदर्शन और मदनमोहन को पुरी जगन्नाथ मंदिर गर्भगृह से बाहर मंदिर परिसर के अंदर स्नान मंडप तक ले जाया जाता है।

❀ भगवान को औपचारिक रूप से शुद्ध पानी के 108 चांदी के कलश से स्नान कराया जाता है और सार्वजनिक दर्शकों के लिए सजाया जाता है।

❀ शाम को, स्नान अनुष्ठान के समापन पर, जगन्नाथ और बलभद्र को भगवान गणेश वेश मैं सजाई जाती है। भगवान के इस स्वरूप को 'गजानन बेश' कहा जाता है।

पारंपरिक रूप से माना जाता है कि स्नान यात्रा के बाद भगवान बीमार पड़ जाते हैं और उन्हें राज वैद्य की देखरेख में एकांत में स्वस्थ होने के लिए बीमार कमरे में रखा जाता है। राज वैद्य द्वारा दी गई आयुर्वेदिक दवा से देवता एक पखवाड़े में ठीक हो जाते हैं।

Snana Yatra in English

Snana Yatra which is also known as Devasnana Purnima or Snana Purnima.
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पुरी रथ यात्रा का धीमा सफर: परंपरा, आस्था और रहस्य

धार्मिक परंपरा, रीति-रिवाजों के महत्व और व्यावहारिक कारणों से पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा आमतौर पर एक दिन में गुंडिचा मंदिर नहीं पहुँचती है।

पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा के तीन रथ

रथ यात्रा भगवान जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा का वार्षिक रथ उत्सव है। वे तीन अलग-अलग रथों पर यात्रा करते हैं और लाखों लोग रथ खींचने के लिए इकट्ठा होते हैं।

पुरी रथ यात्रा से जुड़े 10 कम ज्ञात और रोचक तथ्य

पुरी रथ यात्रा विश्व के सबसे प्राचीन और विशाल धार्मिक उत्सवों में से एक है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के दिव्य रथों के दर्शन करने के लिए पुरी पहुँचते हैं।

भगवान जगन्नाथ का नीलाद्रि बीजे अनुष्ठान क्या है?

नीलाद्रि बीजे, वार्षिक रथ यात्रा उत्सव के अंत और भगवान जगन्नाथ की गर्भगृह में वापसी को चिह्नित करता है या फिर आप भगवान जगन्नाथ और उनकी प्यारी पत्नी माँ महालक्ष्मी के बीच एक प्यारी सी कहानी बता सकते हैं।

जगन्नाथ मंदिर प्रसाद को 'महाप्रसाद' क्यों कहा जाता है?

जगन्नाथ मंदिर में सदियों से पाया जाने वाला महाप्रसाद लगभग 600-700 रसोइयों द्वारा बनाया जाता है, जो लगभग 50 हजार भक्तों के बीच वितरित किया जाता है।

पुरी जगन्नाथ के गुंडिचा रानी और नाकचणा कथा

श्रीगुंडिचा मंदिर की दीवार के सामने दो द्वार हैं। एक 'सिंहद्वार' और दूसरा 'नाकचणा द्वार'। 'श्रीगुंडिचायात्रा' के दिन मंदिर के सिंहद्वार से तीन रथ निकलते हैं और गुंडिचा मंदिर के सिंहद्वार की ओर बढ़ते हैं।

यूनाइटेड किंगडम में रथ यात्रा समारोह

रथ-यात्रा उत्सव देश बिदेश में कई अलग-अलग स्थानों पर आयोजित किए जाते हैं, जो उत्सव लंदन का सबसे बड़ा प्रसिद्ध सनातन उत्सव है। रथ-यात्रा, इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (ISKCON) द्वारा प्रायोजित सबसे बड़ा स्ट्रीट फेस्टिवल है।

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