पितृ पक्ष - Pitru Paksha
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ग्रह वक्री क्या है? (What is Grah Vakri)

"ग्रह वक्री" वैदिक ज्योतिष (ज्योतिष शास्त्र) में प्रयुक्त एक शब्द है।
ग्रह → ग्रह
वक्री → वक्री या पीछे की ओर गतिमान

अर्थ:
जब कोई ग्रह आकाश में (पृथ्वी के दृष्टिकोण से) पीछे की ओर गति करता हुआ प्रतीत होता है, तो उसे वक्री कहते हैं। यह पृथ्वी और अन्य ग्रहों की अपनी कक्षाओं में गति में अंतर के कारण एक दृष्टि भ्रम है, लेकिन ज्योतिषीय दृष्टि से इसका बहुत महत्व है।

ग्रह जो वक्री हो सकते हैं:
❀ बुध
❀ शुक्र
❀ मंगल
❀ गुरु
❀ शनि

भक्ति भारत के अनुसार ज्योतिष में सूर्य और चंद्रमा कभी वक्री नहीं होते। राहु और केतु को हमेशा वक्री ही माना जाता है।

ज्योतिषीय मान्यता:
❀ वक्री ग्रह की ऊर्जा सीधी गति की तुलना में अधिक तीव्र होती है।
❀ यह उस ग्रह से संबंधित परिणामों में देरी, जटिलता या गहराई ला सकता है।

उदाहरण:
वक्री बुध → संचार में देरी, गलतफहमियाँ, पुनर्विचार।
वक्री शनि → कर्म संबंधी शिक्षाएँ, सफलता में देरी, आंतरिक संघर्ष।

संक्षेप में, ग्रह वक्री का अर्थ है कि कोई ग्रह वक्री है, और ज्योतिषीय रूप से यह व्यक्ति के जीवन में एक मजबूत लेकिन कभी-कभी विलंबित या विपरीत प्रभाव का संकेत देता है।

What is Grah Vakri in English

“Grah Vakri” (ग्रह वक्री) is a term used in Vedic astrology (Jyotish Shastra).
यह भी जानें

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