Hanuman Jayanti


Updated: Dec 21, 2016 22:38 PM About | Dates | Read Also | Panchmukhi Hanuman


हनुमान जयंती (Hanuman Jayanti) is an important festival of Hindus, the Vanar Dev Ram Bhakta in India celebrated to commemorate the birth of Lord Hanuman. Shri Hanumant embodies power and energy, and magical powers and the ability to keep evil spirits Ginte worshiped as a God.

हनुमान जयंती (Hanuman Jayanti) is an important festival of Hindus, the Vanar Dev Ram Bhakta in India celebrated to commemorate the birth of Lord Hanuman. Shri Hanumant embodies power and energy, and magical powers and the ability to keep evil spirits Ginte worshiped as a God.

In various areas of the country Hanuman Jayanti is celebrated on different times, North India it is mainly celebrated on Chaitra Purnima. Read Hanuman Jayanti in Hindi

Upcoming Event: 31 March 2018

Information

Related Name
Hanumanh Jayanti, Hanumath Jayanti
Frequency
Yearly
Duration
1
Begins (Tithi)
Chaitra Shukla Purnima
Ends (Tithi)
Chaitra Shukla Purnima
Months
March / April
Futures Dates
9 April 20198 April 202027 April 2021
Past Dates
11 April 2017, 22 April 2016

Hanuman Jayanti in Hindi

हनुमान जयंती हिंदुओं का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, इसे भारत भर में वानर देवता राम भक्त हनुमान जी के जन्म के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। श्री हनुमंत शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक हैं, व जादुई शक्तियों और बुरी आत्माओं को जीनते की क्षमता रखने वाले देवता के रूप मे पूजे जाते हैं। हनुमान जयंती देश के विभिन्न इलाक़ों मे अलग-अलग समय पे मनाया जाता है, उत्तर भारत ये मुख्य रूप से चैत्र पूर्णिमा को मनाया जाता है।

About Shri Hanuman

केसरी तथा अंजना के पुत्र, हनुमानजी को महावीर, बजरंगबली, मारुती, पवनपुत्र, अंजनीपुत्र तथा केसरीनन्दन के नाम से भी जाना जाता है। श्री हनुमंत को शिवजी का रौद्र रूप भी मानते है, अतः प्रत्येक हनुमान मंदिर में शिवलिंग स्थापित की जाती है।
हनुमानजी की प्रतिमा पर लगा सिन्दूर अत्यन्त ही पवित्र होता है। भक्तगण प्रायः इस सिन्दूर का तिलक अपने मस्तक पर लगाते हैं। ऐसा माना जाता है, कि इस तिलक के मध्यम से भक्त भी हनुमानजी की कृपा से उनकी ही तरह शक्तिशाली, ऊर्जावान तथा संयमित होजाते हैं।

About Panchmukhi Hanuman

अहिरावण ने मां भवानी के लिए पाँच दीपक जलाए थे, जिन्हें पांच दिशाओं मे पांच जगह पर रखा गया था। इन पांचों दीपक को एक साथ बुझाने पर ही अहिरावन का वध हो सकता था, इस कारण हनुमान जी ने पंचमुखी रूप धारण किया। उत्तर दिशा में वराह मुख, दक्षिण दिशा में नरसिंह मुख, पश्चिम में गरुड़ मुख, आकाश की तरफ हयग्रीव मुख एवं पूर्व दिशा में हनुमान मुख। इस रूप को धारण कर उन्होंने सभी पांचों दीप बुझाए तथा अहिरावण का वध कर श्री राम और लक्ष्मण को मुक्त कराया।

आरती: श्री हनुमान जी

मनोजवं मारुत तुल्यवेगं, जितेन्द्रियं,बुद्धिमतां वरिष्ठम् ॥
वातात्मजं वानरयुथ मुख्यं, श्रीरामदुतं शरणम प्रपद्धे ॥

आरती: श्री शनिदेव जी

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।
सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥जय जय..॥

आरती: ॐ जय जगदीश हरे

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

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