👰टेसू पूनै - Tesu Punain

Tesu Punain Date: 19 October 2021
शरद पूर्णिमा के ही दिन, ब्रज क्षेत्र में टेसू और झेंजी का विवाह संपन्न होता है। इस विवाह के बाद हिंदुओं में विवाह उत्सव प्रारम्भिक कार्य सुरू हो जाते हैं।

शरद पूर्णिमा के ही दिन, ब्रज क्षेत्र में टेसू और झेंजी का विवाह संपन्न होता है। इस विवाह के बाद हिंदुओं में विवाह उत्सव प्रारम्भिक कार्य सुरू हो जाते हैं। एक वरदान के अनुसार, सबसे पहिले टेसू का विवाह होगा, फिर उसके बाद ही कोई विवाह उत्सव की प्रक्रिया प्रारंभ कर सकेगा।

टेसू झेंजी की यह परम्परा ब्रज, बुंदेलखण्ड और ग्वालियर मे विशेष रुप से प्रसिद्ध है। शहरी क्षेत्र मे यह प्रायः लुप्त ही होती जा रही है। टेसू झेंजी को सभी घरों मे घूमने की परम्परा को टेसू को खिला कर लाना कहा जाता है। यह रावण दहन के साथ दशहरे के दिन से ही आरंभ हो जाता है।

टेसू और झेंजी के गीतों का अध्ययन करने पर प्रतीत होता है कि झेंजी गीत व्यवस्थित और निश्चित विषय वस्तु को लेकर चलते है, जबकि टेसू गीत मात्र तुकबन्दियां प्रतीत होती हैं। कहीं कहीं झेंजी को सांझी भी कहा जाता है।

टेसू झेंजी स्वरूप:
आमतौर पर टेसू तीन सीधी लकड़ियों से बनाया जाते है। बीच मे दीपक रखने का स्थान बनाया जाता है तथा वहीं से टेसू को पकड़ा जाता है।

झेंजी, कच्ची मिट्टी से बनी गोलाकार घड़े के समान होतीं हैं, जिसमें दीपक अंदर की ओर रखा जाता है। दीपक को लगातार जलने के लिए प्रचुर मात्रा मे हवा के लिए झेंजी में रंग-बिरंगे झरोखे बनाए जाते हैं।

टेसू झेंजी विवाह समारोह:
ब्रज के प्रत्येक घर में टेसू-झेंजी के विवाह की सारी रस्में हर्ष एवं उल्लास के साथ सामान्य विवाह की तरह ही निभाई जाती हैं। कुछ लोग इतने उल्लास के साथ मानते हैं कि कार्ड छपवाना, बैंड-बाजा के साथ बाराती नाचते हुए झेंजी के घर पहुंचते हैं। टेसू एवं बारातियों के स्वागत के साथ विवाह की सारी रस्मे निभाई जाती है। जिसके अंतर्गत झेंजी की पैर पुजाई, कन्यादान तथा बारातियों को प्रीतिभोज भी दिया जाता है।

बच्चों के इस आयोजन में समाज और घर के बड़े-बुजुर्ग भी खुलकर दिल से अपना-अपना पूर्ण सहयोग करते हैं। सामाजिक सद्भाव के साथ हर घर का अनाज और पैसा एक साथ मिलकर एक हो जाता है। लड़कियों में अजब उल्लास रहता था तो लड़कों में भी। गांव के कुछ लोग बराती बनते हैं, और कुछ लोग घराती। रात में स्त्रियां और बच्चे एकत्र होकर गीत भजन का गान करते हैं। खील, बताशे, रेवड़ी बांटी जाती हैं तथा टेसू-झेंजी के विसर्जन के साथ ही अगले वर्ष के लिए समारोह की प्रतीक्षा प्रारंभ हो जाती है।

टेसू झेंजी विवाह की पौराणिक मान्यता:
एक वरदान के अनुसार, सबसे पहिले टेसू का विवाह होगा, फिर उसके बाद ही कोई विवाह उत्सव की प्रक्रिया प्रारंभ कर सकेगा।

मान्यता के अनुसार, भीम के पुत्र घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक को महाभारत का युद्ध मे आते समय झेंजी से प्रेम हो गया। उन्होंने युद्ध से लौटकर झेंजी से विवाह करने का वचन दिया, लेकिन अपनी माँ को दिए वचन, कि हारने वाले पक्ष की तरफ से वह युद्ध करेंगे के चलते वह कौरवों की तरफ से युद्ध करने आ गए और श्री कृष्ण ने उनका सिर माँग लिया। परंतु बर्बरीक ने महाभारत का युद्ध देखने की अपनी इच्छा व्यक्त की। तब श्री कृष्ण ने उनके सिर को एक ऊँचे पर्वत पर तीन लकड़ी के डंडों पर रख दिया। इसी कारण टेसू की तीन टाँगें बनाई जाती हैं।

इसके साथ-साथ बर्बरीक ने अपनी विवाह ना होने की बात भी भगवान श्री कृष्ण के सामने रखी। इस कारण भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया की, प्रत्येक वर्ष सर्वप्रथम तुम्हारा विवाह ही संपन्न होगा, उसके पश्चात ही कोई विवाह के शुभ कार्य प्रारंभ होंगे।

एक मत के अनुसार, विवाहों के आरंभ होने से पहले टेसू-झेंजी का विवाह इसलिए भी किया जाता है, ताकि जो शकुन-अपशकुन और विघ्न बाधाऐं आनी हों, वह इन्हीं के विवाह में आजाये तथा बाद में लोगों के बेटे-बेटियों के विवाह अच्छी तरह सम्पन्न हो सकें।

संबंधित अन्य नाम
टेसू झेंजी पूनै, टेसू झेंजी विवाह, टेसू पूर्णिमा, टेसू-झेंझी

Tesu Punain in English

In the Braj region, Tesu and Jhenji marry eachother on the day of Sharad Purnima..

टेसू गीत

1) आगरे कू जान्गे
चार कौरि लान्गे
कौरि अच्छी भइ तौ
टेसू में लगान्गे
टेसू अच्छौ भयो तौ
गाम में घुमान्गे
गाम अच्छौ भयो तौ
चक्की लगबान्गे
चक्की अच्छी भई तौ
पूरी पुआ करबान्गे

2) टेसू की गईया
कच्छ की गईया
अस्सी डला भूस खाय
सिगरे ताल कौ पानी पिए
हिंगन बटेश्वर जाय

3) सेलखड़ी भई सेलखड़ी
नौ सौ डिब्बा रेल खड़ी
एक डिब्बा आरम्पार
उसमें बैठे मियांसाब
मियां साब की काली टोपी
काले हैं कलयान जी
गौरे हैं गुरयान जी
कूद पड़े हनुमान जी
लंका जीते राम जी।

4) मेरा टेसू झंई अड़ा
खाने को मांगे दही बड़ा
दही बड़े में पन्नी
घर दो बेटा अठन्नी
अठन्नी अच्छी होती तो ढोलकी बनवाते
ढोलकी की तान अपने यार को सुनाते
यार का दुपट्टा साड़े सात की निशानी
देखो रे लोगे वो हो गई दिवानी।

5) आगरे की गैल में छोकरी सुनार की
भूरे भूरे बाल उसकी नथनी हज़ार की
अपने महल में ढोलकी बजाती
ढोलकी की तान अपने यार को सुनाती
यार का दुपटटा साड़े सात की निशानी
दखो रे लोगो वो हो गई दिवानी।

6) टेसू रे टेसू
घंटार बजईयो
दस नगरी दस गाँव बसईयो
बस गये तीतर बस गये मोर
सड़ी डुकरिया ए लै गये चोर
चोरन के घर खेती
खाय डुकरिया मोटी
मोटी है के दिल्ली गयी
दिल्ली ते दो बिल्ली लाई
एक बिल्ली कानी
सब बच्चों की नानी।

झेंजी गीत

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संबंधित जानकारियाँ

भविष्य के त्यौहार
9 October 202228 October 202316 October 20246 October 2025
आवृत्ति
वार्षिक
समय
1 दिन
सुरुआत तिथि
आश्विन शुक्ला पूर्णिमा
समाप्ति तिथि
आश्विन शुक्ला पूर्णिमा
महीना
अक्टूबर
कारण
टेसू झेंजी विवाह
उत्सव विधि
मंगल गीत, पूजा, भजन-कीर्तन
महत्वपूर्ण जगह
ब्रज, बुंदेलखण्ड एवं ग्वालियर के घरों मे
पिछले त्यौहार
30 October 2020
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