मुख्य आकर्षण - Key Highlights |
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| ◉ भोरमदेव मंदिर को छत्तीसगढ़ का खजुराहो कहा जाता है। |
| ◉ इस मंदिर परिसर में मडवा महल, चेरकी महल और इस्तालिक मंदिर जैसे अन्य महत्वपूर्ण मंदिर भी शामिल हैं। |
| ◉ यह मंदिर शैव धर्म का एक प्रमुख केंद्र है और भक्तों, इतिहासकारों, कला प्रेमियों और पर्यटकों को आकर्षित करता है। |
भोरमदेव मंदिर भारत के छत्तीसगढ़ राज्य में कवर्धा (कबीरधाम) के पास स्थित एक प्रसिद्ध प्राचीन हिंदू मंदिर है। भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर को इसकी सुंदर नक्काशीदार मूर्तियों और बेहतरीन वास्तुकला के कारण अक्सर छत्तीसगढ़ का खजुराहो कहा जाता है।
भोरमदेव मंदिर दर्शन का समय
मंदिर पूरे सप्ताह खुला रहता है और दर्शन का समय सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक है।
भोरमदेव मंदिर के मुख्य त्योहार
भोरमदेव मंदिर में मनाया जाने वाला मुख्य त्योहार वार्षिक 'भोरमदेव महोत्सव' है। यह हर साल मार्च के आखिरी सप्ताह में (खासकर होली के 13वें दिन, यानी चैत्र कृष्ण पक्ष की तेरस के आसपास) आयोजित किया जाता है। महाशिवरात्रि, श्रावण के सोमवार के दौरान विशेष पूजा और सामुदायिक मेले आयोजित किए जाते हैं।
भोरमदेव मंदिर कैसे पहुँचें
भोरमदेव मंदिर छत्तीसगढ़ के कवर्धा में स्थित है। भोरमदेव मंदिर तक पहुँचने के लिए सबसे पहले कवर्धा (जो यहाँ से 18 किलोमीटर दूर है) पहुँचना होता है, जो यहाँ का सबसे नजदीकी प्रमुख शहर है। सबसे नज़दीकी मुख्य रेलवे स्टेशन रायपुर जंक्शन और दुर्ग जंक्शन हैं। सबसे नज़दीकी एयरपोर्ट रायपुर का स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट (माना एयरपोर्ट) है, जो लगभग 130 से 135 किलोमीटर दूर है।
भोरमदेव मंदिर परिसर का विकास कई सदियों में हुआ, मुख्य रूप से 7वीं और 12वीं शताब्दी ईस्वी के बीच। ये मंदिर नाग वंश और कलचुरी काल के शासकों से जुड़े हैं, जब मध्य भारत में शैव धर्म और मंदिर निर्माण की परंपराएं खूब फली-फूलीं।
भोरमदेव नाम भगवान शिव से जुड़ा है, जिनकी यहाँ स्थानीय रूप में पूजा की जाती है। यह मंदिर परिसर शैव पूजा का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया और मध्य व पूर्वी भारत की विभिन्न कलात्मक परंपराओं के सांस्कृतिक मेल-जोल को दर्शाता है।
भोरमदेव परिसर में कई महत्वपूर्ण स्मारक शामिल हैं: भोरमदेव मंदिर, मड़वा महल, चेरकी महल ये मंदिर मध्यकालीन मध्य भारत की धार्मिक मान्यताओं, कलात्मक परंपराओं और शाही संरक्षण के मूल्यवान ऐतिहासिक प्रमाण हैं।
6 AM - 8 PM
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