janmashtami 2026
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

क्या ईश्वर में सम्पूर्ण विश्वास है - प्रेरक कहानी (Kya Eshwar Me Poorn Vishwash Hai)


Add To Favorites Change Font Size
एक बार, दो बहुमंजिली इमारतों के बीच, बंधी हुई एक तार पर लंबा सा बाँस पकड़े, एक कलाकार चल रहा था। उसने अपने कन्धे पर अपना बेटा बैठा रखा था। सैंकड़ों लोग दिल साधे देख रहे थे। सधे कदमों से, तेज हवा से जूझते हुए, अपनी और अपने बेटे की ज़िंदगी दाँव पर लगाकर, उस कलाकार ने दूरी पूरी कर ही ली।
भीड़ आह्लाद से उछल पड़ी, तालियाँ, सीटियाँ बजने लगी। लोग उस कलाकार की फोटो खींच रहे थे, उसके साथ सेल्फी ले रहे थे। उससे हाथ मिला रहे थे। वो कलाकार माइक पर आया, भीड़ को बोला, क्या आपको विश्वास है कि मैं यह दोबारा भी कर सकता हूँ?

भीड़ चिल्लाई - हाँ हाँ, तुम कर सकते हो।
उसने पूछा - क्या आपको विश्वास है
भीड़ चिल्लाई - हाँ पूरा विश्वास है, हम तो शर्त भी लगा सकते हैं कि तुम सफलता पूर्वक इसे दोहरा भी सकते हो।

कलाकार बोला - पूरा पूरा विश्वास है ना।
भीड़ बोली - हाँ हाँ
कलाकार बोला - ठीक है, कोई मुझे अपना बच्चा दे दे, मैं उसे अपने कंधे पर बैठा कर रस्सी पर चलूँगा।

फिर एक दम खामोशी, शांति, चुप्पी सी फैल गयी।
कलाकार बोला - डर गए? अभी तो आपको विश्वास था कि मैं कर सकता हूँ। असल में आपका यह मुझ पर विश्वास है, परंतु मुझपे दृढ़-विश्वास नहीं है। दोनों विश्वासों में फर्क है साहेब!

यही कहना है, ईश्वर हैं! ये तो विश्वास है! परन्तु ईश्वर में सम्पूर्ण विश्वास नहीं है। क्या ईश्वर में सम्पूर्ण विश्वास है?
अगर ईश्वर में पूर्ण विश्वास है तो चिंता, क्रोध और तनाव क्यों?
यह भी जानें

Prerak-kahani Syrcus Prerak-kahaniKalakar Prerak-kahaniTrust Prerak-kahaniVishwas Prerak-kahani

अगर आपको यह prerak-kahani पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस prerak-kahani को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

Latest Prerak-kahani ›

भक्ति का अनमोल फल- संत रामदास की कथा

बहुत समय पहले की बात है, महाराष्ट्र के एक छोटे से गाँव में रामदास नाम का एक युवक रहता था। रामदास बचपन से ही धार्मिक प्रवृत्ति का था।

यह भटकाव ही इंसान को थका रहा है - प्रेरक कहानी

इंसान अपने लक्ष्य से भटक रहा है और यह भटकाव ही इंसान को थका रहा है। यह लक्ष्य प्राप्ति में सबसे बड़ी बाधा है।

सत्संग की सही शिक्षा - प्रेरक कहानी

एक संत ने अपने दो शिष्यों को दो डिब्बों में मूँग के दाने दिये और कहाः ये मूँग हमारी अमानत हैं। ये सड़े गले नहीं बल्कि बढ़े-चढ़े यह ध्यान रखना...

जब चंदन का बाग बना कोयला? - प्रेरक कहानी

एक राजा जो बहुत परोपकारी थे, उनके पास बहुत ही सुन्दर और विशाल चन्दन का बाग था जिससे हर वर्ष उनको सहस्त्रों रूपये का चन्दन अन्य देशावरों को जाता जिससे तेल और इत्र तैयार किये जाते थे..

राजधर्म और तपस्या का फर्क - प्रेरक कहानी

सम्राट भरत, जिनके बारे में कहा जाता है कि उनके नाम पर हमारे देश का नाम भारत पड़ा, वे बड़े प्रतापी और सुयोग्य शासक थे। राजा भरत शासन करते हुए भी कठोर तपस्या किया करते थे...

महिमा राम नाम की - प्रेरक कहानी

राम राम कहने जैसे छोटे काम की वजह से आज उसकी जान बच गई। राम कहने से तर जाओगे..

मानव धर्म ही सर्वोपरि - प्रेरक कहानी

एक विदेशी को अपराधी समझ जब राजा ने फांसी का हुक्म सुनाया तो उसने अपशब्द कहते हुए राजा के विनाश की कामना की।...

Janmashtami - Janmashtami
Shri Krishna Bhajan - Shri Krishna Bhajan
Bhakti Bharat APP