भक्तमाल: भगवान महावीर
वास्तविक नाम - वर्धमान
अन्य नाम - जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर, तीर्थंकर महावीर
शिष्य - एकादश गणधर, इन्द्रभूति गौतम
आराध्या - श्वेतांबर परंपरा, दिगंबर परंपरा
जन्म - 599 ईसा पूर्व
जन्म स्थान - कुंडग्राम (वैशाली, बिहार के पास)
निर्वाण: 527 ईसा पूर्व, पावापुरी (बिहार)
वैवाहिक स्थिति - श्वेतांबर दृष्टिकोण महावीर विवाहित, दिगंबर दृष्टिकोण आजीवन ब्रह्मचारी
पिता - राजा सिद्धार्थ
माता - महारानी त्रिशला
प्रसिद्ध - जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर
आत्मज्ञान (केवल ज्ञान): 12 वर्षों की गहन तपस्या के बाद
प्रतीक: सिंह
पवित्र ग्रंथ: जैन आगम (उनकी शिक्षाओं पर आधारित)
भगवान महावीर, जिन्हें वर्धमान के नाम से भी जाना जाता है, जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर थे और एक महान आध्यात्मिक गुरु थे जिन्होंने मुक्ति के प्राचीन जैन मार्ग को पुनर्जीवित किया।
भगवान महावीर के मूल उपदेश
❀ अहिंसा
❀ सत्य
❀ अस्तेय (चोरी न करना)
❀ ब्रह्मचर्य (संयम)
❀ अपरिग्रह (अनासक्ति)
आध्यात्मिक महत्व
भगवान महावीर ने सिखाया कि आत्म-अनुशासन, करुणा और उचित आचरण मोक्ष की ओर ले जाते हैं। उनका संदेश सभी आत्माओं की समानता और सभी जीवों के प्रति कठोर अहिंसा पर बल देता है।
उनकी अहिंसा, आत्म-संयम और अनासक्ति की शिक्षाएं आत्माओं को मोक्ष और आंतरिक पवित्रता की ओर मार्गदर्शन करती हैं।