लगभग 400 वर्ष पहले का वह दौर, जब विदेशी आक्रमणकारी, अफगान, तुर्क और मुगल एक के बाद एक भारत के समृद्ध राज्यों पर अधिकार जमाने का प्रयास कर रहे थे। ऐसे कठिन समय में भी एक ऐसा राज्य था जिसने अदम्य साहस, स्वाभिमान और वीरता के बल पर हर चुनौती का सामना किया। वह था राजपूतों की गौरवशाली भूमि मेवाड़।
इस ऐतिहासिक धारावाहिक के इस रोमांचक एपिसोड में बालक प्रताप की वीरता, संस्कार और भविष्य के महान योद्धा बनने की नींव को दर्शाया गया है। प्रताप अपनी माता रानी जयवंता बाई के लिए विशेष फूल लाने निकलता है। रानी जयवंता बाई उसे धर्म, साहस और मातृभूमि की रक्षा का महत्व समझाते हुए एक आदर्श क्षत्रिय बनने की प्रेरणा देती हैं। इसी दौरान प्रताप की दृष्टि मेवाड़ की पारंपरिक राजसी तलवार पर पड़ती है, जिसे देखकर वह मंत्रमुग्ध हो जाता है।
दूसरी ओर, महाराणा उदय सिंह को एक वर्ष पूर्व अफगानों के साथ हुई भीषण लड़ाई की स्मृतियाँ सताने लगती हैं। प्रताप की मुलाकात अपनी छोटी माँ रानी भटियानी से भी होती है, जिनकी सुंदरता और व्यक्तित्व पूरे राजमहल में चर्चित हैं। लेकिन परिस्थितियाँ अचानक बदल जाती हैं और प्रताप स्वयं अफगान सैनिकों के खतरे के बीच पहुँच जाता है।
क्या बालक प्रताप अफगान सैनिकों के चंगुल से सुरक्षित निकल पाएगा? जानिए इस रोमांच, वीरता और इतिहास से भरपूर "महाराणा प्रताप" के इस प्रेरणादायक एपिसोड में।
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